नई दिल्ली। करवा चौथ के अवसर पर चांदनी चौक में भारतीय जनता पार्टी (BJP) द्वारा आयोजित 'लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ' पदयात्रा को लेकर राजनीतिक और व्यावसायिक हलकों में एक नया विवाद खड़ा हो गया है। राजनीतिक कार्यकर्ताओं और स्थानीय कारोबारियों ने त्योहारों के व्यस्त समय में बाजार के भीतर ऐसे आयोजन करने पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि इस प्रकार की गतिविधियों से त्योहारी सीजन में मुख्य बाजारों का कारोबार और ग्राहकों की आवाजाही सीधे तौर पर प्रभावित होती है।
इजाजत और विरोध के स्थानों पर उठे सवाल
राजनीतिक एक्टिविस्ट योगेंद्र यादव ने सोशल मीडिया के माध्यम से सवाल उठाया कि दिल्ली के सबसे घने और व्यस्त चांदनी चौक बाजार में मंच बनाकर प्रदर्शन करने के लिए क्या पुलिस से 10 दिन पूर्व अनुमति ली गई थी या यह आयोजन बिना इजाजत के हुआ। इसी के साथ सीजेपी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने भी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए पूछा कि क्या यह पदयात्रा किसी पूर्व निर्धारित विरोध स्थल पर आयोजित की जा रही थी और इससे त्योहार के समय स्थानीय व्यापार पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभाव का ध्यान क्यों नहीं रखा गया।
व्यापारियों में असंतोष और करोड़ों के नुकसान का मुद्दा
किनारी बाजार गोटा जरी व्यापार मंडल के पूर्व महामंत्री संजय गुप्ता ने कहा कि आगामी 1 नवंबर को रामलीला मैदान में प्रस्तावित कांग्रेस की महारैली से व्यापार में करोड़ों के नुकसान की बात करने वाले व्यापारी नेता अब इस आयोजन पर मौन क्यों हैं। लहंगे और सूट के कारोबारी राहुल शर्मा ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि करवा चौथ से ठीक एक दिन पहले पदयात्रा होने से आम दुकानदारों और ग्राहकों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ा।
त्योहारों के दौरान राजनीतिक गतिविधियों से परहेज की अपील
चांदनी चौक में हुई इस पदयात्रा के बाद बाजारों में राजनीतिक कार्यक्रमों के असर पर बहस और तेज हो गई है। व्यापारियों का स्पष्ट मानना है कि त्योहारी सीजन में बाजारों में खरीदारों की भारी भीड़ होती है, ऐसे में किसी भी दल के राजनीतिक प्रदर्शन से यातायात और व्यापार दोनों बाधित होते हैं। चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) के चेयरमैन बृजेश गोयल ने भी सभी राजनीतिक दलों से अपील की है कि त्योहारों के दौरान व्यस्त व्यापारिक क्षेत्रों में किसी भी प्रकार के राजनीतिक आयोजन करने से बचा जाना चाहिए।

