डिजिटल भुगतान शुल्क पर व्यापारियों का विरोध, दिल्ली में आज ‘नो यूपीआई डे’

नई दिल्ली | देश की राजधानी नई दिल्ली में डिजिटल भुगतान (Digital Payment) को लेकर छिड़े विवाद के बीच विभिन्न व्यापारिक संगठनों ने 2 अक्टूबर को 'नो यूपीआई डे' (No UPI Day) मनाने का आधिकारिक ऐलान किया है। इस विशेष दिन पर शहर के व्यापारी ग्राहकों से यूपीआई (UPI) के माध्यम से भुगतान स्वीकार न करने की अपील करेंगे। व्यापारिक संगठनों का कहना है कि वे डिजिटल भुगतानों पर किसी भी प्रकार के अतिरिक्त शुल्क (MDR/Charges) लगाए जाने की व्यवस्था का कड़ा विरोध करते हैं।

व्यापारिक संगठनों का विरोध और 'नो यूपीआई डे' का एलान

दिल्ली व्यापार महासंघ और फेडरेशन ऑफ दिल्ली ट्रेड एसोसिएशन जैसे प्रमुख व्यापारिक निकायों ने इस अनोखे अभियान को अपना पूर्ण समर्थन दिया है। इन संगठनों से जुड़े व्यापारियों से आग्रह किया गया है कि वे 2 अक्टूबर के दिन यूपीआई का उपयोग करने से बचें। व्यापारिक संगठनों का तर्क है कि इस अभियान के माध्यम से डिजिटल भुगतानों पर प्रस्तावित शुल्क के खिलाफ सरकार और संबंधित एजेंसियों तक अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया जाएगा। व्यापारियों का यह भी मानना है कि खुदरा और छोटे कारोबारों में आज यूपीआई का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जाता है, ऐसे में यदि इस पर किसी भी तरह का अतिरिक्त वित्तीय शुल्क लगाया जाता है, तो इससे छोटे कारोबारियों की कमर टूट जाएगी और उनके मुनाफे पर प्रतिकूल असर पड़ेगा।

सीबीएसई (CBSE) द्वारा स्कूलों में डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के निर्देश

एक तरफ जहाँ व्यापारी वर्ग डिजिटल भुगतान पर संभावित शुल्क का विरोध कर रहा है, वहीं दूसरी ओर केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने अपने से संबद्ध सभी विद्यालयों में डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए नए और सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं। बोर्ड ने सभी स्कूलों को यह निर्देश दिए हैं कि वे विद्यार्थियों की स्कूल फीस के साथ-साथ स्कूल परिसर की कैंटीन, लाइब्रेरी और अन्य सभी प्रकार की आवश्यक सेवाओं के भुगतान के लिए यूपीआई (UPI) और रुपे कार्ड (RuPay Card) की आधुनिक सुविधा अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराएँ।

इसके साथ ही, कम इंटरनेट कनेक्टिविटी या नेटवर्क की समस्या वाले ग्रामीण या अर्ध-शहरी क्षेत्रों के स्कूलों के लिए 'यूपीआई लाइट', 'यूपीआई लाइटएक्स' और 'यूपीआई 123पे' जैसे वैकल्पिक माध्यमों को अपनाने की उपयोगी सलाह भी दी गई है।

स्कूलों के लिए जागरूकता अभियान और वित्तीय साक्षरता मॉड्यूल

सीबीएसई बोर्ड के निर्देशों के अनुसार, विद्यालयों को अभिभावकों और छात्र-छात्राओं के लिए डिजिटल भुगतान से जुड़ी जागरूकता और तकनीकी सहायता व्यवस्था विकसित करने के भी निर्देश दिए गए हैं। बोर्ड ने स्कूलों को फीस भुगतान के लिए 'भारत बिल पेमेंट सिस्टम' (BBPS) से जुड़ने की सलाह दी है। इसके अतिरिक्त, विद्यालयों के ईआरपी (ERP) सिस्टम के साथ डिजिटल भुगतान प्रणाली को जोड़कर शिक्षकों व कर्मचारियों का वेतन तथा अन्य नियमित खर्चों का भुगतान पूरी तरह ऑनलाइन किए जाने पर जोर दिया गया है। बोर्ड ने शिक्षकों के विशेष प्रशिक्षण सत्रों में डिजिटल भुगतान की तकनीकी जानकारी देने तथा विद्यार्थियों के पाठ्यक्रम में वित्तीय साक्षरता मॉड्यूल को शामिल करने के भी निर्देश जारी किए हैं, ताकि समय रहते बच्चों को डिजिटल बैंकिंग की पूरी समझ मिल सके।

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