महारैली में शामिल होने आए लोगों को नहीं मिला होटल, सड़क बनी रात का ठिकाना

नई दिल्ली। देश की राजधानी में आयोजित विशाल महारैली में शिरकत करने हेतु भारत के विभिन्न राज्यों से भारी संख्या में लोगों का आगमन हुआ। दूर-दराज के क्षेत्रों से आए अनेक समर्थक शनिवार को ही दिल्ली पहुंच चुके थे, हालांकि वहां पहुंचते ही उनके समक्ष सबसे विकराल समस्या ठहरने के स्थान की खड़ी हो गई। ऐतिहासिक रामलीला मैदान तथा उसके आसपास स्थित अधिकांश होटलों में कमरे पूरी तरह फुल होने अथवा चेक-इन बंद होने की वजह से नवागंतुकों को स्थान नहीं मिल सका। ऐसी स्थिति में मजबूर होकर बहुसंख्यक लोगों को कड़कती रात खुले आसमान के नीचे गुजारने पर विवश होना पड़ा।

होटलों में कमरे न मिलने से सड़कों पर बितानी पड़ी रात

कमरों की भारी किल्लत के कारण कई लोगों ने रामलीला मैदान परिसर में ही अपना आशियाना बना लिया, तो कुछ लोगों ने आसपास की सड़कों और फुटपाथों पर बिस्तर बिछाकर रात काटी। ठहरने की व्यवस्था के लिए दर्जनों लोगों ने पास के होटलों के चक्कर काटे, परंतु उन्हें भारी निराशा का सामना करना पड़ा। कुछ यात्रियों को अत्यधिक मनमाना किराया चुकाने के पश्चात कमरे प्राप्त हो सके, जबकि शेष लोगों को रात बिताने के लिए अन्य विकल्पों की तलाश में भटकना पड़ा। महाराष्ट्र से पहुंचे साहिल नामक समर्थक ने अपनी आपबीती सुनाते हुए बताया कि होटलों द्वारा दोगुना से भी अधिक किराया मांगा गया, जिसके चलते मजबूरी में उनके साथ आए कुछ साथियों ने भारी रकम देकर कमरे लिए जबकि बाकी लोग जगह की तलाश में इधर-उधर घूमते रहे।

मध्य प्रदेश और दूर-दराज से आए लोगों की आपबीती

इसी क्रम में मध्य प्रदेश के झाबुआ जिले से आए हर्षित ने जानकारी दी कि वे अपने सहयोगियों के साथ शनिवार को ही दिल्ली आ गए थे। उन्हें पूरी उम्मीद थी कि स्थानीय स्तर पर कमरे उपलब्ध हो जाएंगे, किंतु दर्जनों स्थानों पर पूछताछ करने के बावजूद ठहरने का कोई प्रबंध नहीं हो सका। रात भर की कड़ी मशक्कत और दुश्वारियों को झेलने के उपरांत रविवार की सुबह यह सभी लोग पूरी निष्ठा के साथ महारैली में सम्मिलित होने पहुंचे। रैली में राजनीतिक कार्यक्रमों के प्रतिभागियों के साथ-साथ ऐसे नागरिक भी बड़ी संख्या में पहुंचे थे, जिनकी मुख्य शिकायत मतदाता सूची से अपने नाम काटे जाने को लेकर थी। इसके अतिरिक्त दिल्ली के ही स्थानीय क्षेत्रों जैसे गीता कॉलोनी, सीलमपुर, जाफराबाद, न्यू सीलमपुर, मुनिरका तथा द्वारका से भी जनसमूह मैदान में एकत्र हुआ।

आयोजकों द्वारा की गई ठहरने की व्यवस्थाएं पड़ीं नाकाफी

महारैली में सहभागिता करने आए लोगों की सुविधा के लिए कांग्रेस पार्टी द्वारा अपने सांसदों के आधिकारिक आवासों और पार्टी कार्यालयों में भी रुकने का विशेष प्रबंध किया गया था। हालांकि, प्रत्याशा से कहीं अधिक भीड़ आ जाने के कारण ये तमाम प्रबंध अपर्याप्त सिद्ध हुए और सभी आगुंतकों को वहां जगह हासिल नहीं हो सकी। अंततः व्यवस्था न बन पाने के चलते भारी संख्या में आए लोगों को रामलीला मैदान के खुले प्रांगण तथा समीपवर्ती सड़कों पर ही रात बितानी पड़ी।

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