दिवाली पर सोना खरीदने से पहले जान लें 5 जरूरी बातें, बैंक बाजार के CEO ने दी सलाह

नई दिल्ली। धनतेरस और दीपावली के पवित्र पर्व पर पीली धातु यानी सोना खरीदना भारतीय परिवारों की एक बेहद प्राचीन और शुभ परंपरा मानी जाती है। त्योहारी सीजन के दौरान बाजारों में उमड़ने वाली भारी भीड़ और ग्राहकों की व्यस्तता के बीच एक समझदार, सुरक्षित और मुनाफे का सौदा करने के लिए वित्तीय विशेषज्ञ एवं बैंक बाजार के मुख्य कार्यकारी अधिकारी आदिल शेट्टी ने स्वर्ण आभूषणों की खरीदारी से जुड़े पांच महत्वपूर्ण नियमों और सावधानियों का विशेष उल्लेख किया है, जिनका पालन करके खरीदार किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी से बच सकते हैं।

प्रतिष्ठित और बीआईएस प्रमाणित ज्वैलर्स से ही करें खरीदारी

सोना हमेशा किसी अत्यंत प्रतिष्ठित ज्वेलर या भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) प्रमाणित भरोसेमंद स्टोर से ही क्रey किया जाना चाहिए। स्थानीय या असत्यापित दुकानों से खरीदारी करने के जोखिम उठाने के बजाय हमेशा ऐसे ब्रांड्स का चयन करना समझदारी है जो शत-प्रतिशत पारदर्शी बिलिंग व्यवस्था और स्पष्ट शुद्धता के मानक प्रदान करते हैं। प्रतिष्ठित एवं बड़े ज्वेलरी ब्रांड्स सामान्यतः अपने ग्राहकों को बायबैक अथवा एक्सचेंज (पुराना सोना बदलने) के आकर्षक विकल्प भी उपलब्ध कराते हैं, जो भविष्य की जरूरत के समय बेहद उपयोगी साबित होते हैं। इसके अलावा, सोने की खरीद-फरोख्त के दौरान नकद भुगतान करने से पूरी तरह बचना चाहिए और हमेशा डिजिटल माध्यमों का ही उपयोग करना चाहिए।

सोने की शुद्धता परखने के लिए हॉलमार्किंग की अनिवार्यता

खरीदे जा रहे सोने का वास्तविक मूल्य उसकी शुद्धता पर ही पूरी तरह निर्भर करता है, और बीआईएस हॉलमार्क इस बात की पुष्टि करने का सबसे अचूक और कानूनी माध्यम है। प्रत्येक प्रमाणित हॉलमार्क वाले सोने के आभूषण पर बीआईएस का आधिकारिक लोगो, 22 कैरेट या 24 कैरेट जैसे शुद्धता के स्पष्ट ग्रेड, और उस आभूषण विशेष से जुड़ा छह अंकों का एक विशिष्ट 'एचयूआईडी' यानी हॉलमार्क यूनिक आइडेंटिफिकेशन कोड अनिवार्य रूप से अंकित होता है। यदि बाजार में किसी असत्यापित विक्रेता द्वारा सोने पर असामान्य रूप से बहुत बड़ी छूट का लालच दिया जा रहा है, तो खरीदार को अत्यंत सतर्क हो जाना चाहिए क्योंकि ऐसी जगहों पर शुद्धता संदिग्ध हो सकती है।

प्रति ग्राम सोने की कीमत और मेकिंग चार्ज का गणित

सोने के बाजार भाव अंतरराष्ट्रीय स्तर के वैश्विक रुझानों और भारतीय रुपये के विनिमय दर के आधार पर प्रतिदिन परिवर्तित होते रहते हैं। हालांकि सोने की प्रति ग्राम दर सामान्य तौर पर 24 कैरेट शुद्ध सोने के आधार पर आंकी जाती है, किंतु ग्राहक का अंतिम बिल उसकी शुद्धता, दुकान के मेकिंग चार्ज और तीन प्रतिशत जीएसटी को जोड़कर तैयार किया जाता है। यदि आपका मुख्य उद्देश्य केवल आभूषण पहनने के बजाय भविष्य के लिए सुरक्षित निवेश करना है, तो जटिल कारीगरी वाले गहनों के स्थान पर सोने के सिक्के या बार (बिस्कुट) खरीदना अधिक फायदेमंद होता है, क्योंकि इन पर मेकिंग चार्ज या तो बहुत कम लगता है या बिल्कुल नहीं लिया जाता है।

स्पष्ट बायबैक नीतियां और एक्सचेंज शर्तों की जानकारी

सोने को भविष्य में पुनः बेचने या बदलने (एक्सचेंज करने) के नियम अलग-अलग ज्वेलर्स के यहां भिन्न-भिन्न हो सकते हैं। कुछ आभूषण विक्रेता बायबैक के समय शुद्धता के परीक्षण या धातु के वेस्टेज के नाम पर पांच से दस प्रतिशत तक की कटौती कर लेते हैं, जबकि कई प्रतिष्ठित विक्रेता केवल उन्हीं वस्तुओं को वापस स्वीकार करते हैं जिन पर उचित हॉलमार्क अंकित होता है। यही कारण है कि सोने का कोई भी आभूषण खरीदने से पूर्व ही दुकानदार से इन सभी बायबैक और एक्सचेंज से जुड़ी शर्तों के बारे में विस्तार से पूरी जानकारी प्राप्त कर लेनी चाहिए ताकि भविष्य में किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।

खरीद के पक्के बिल और हॉलमार्क प्रमाण पत्र की सुरक्षा

सोने का पक्का इनवॉइस (बिल) और उसका हॉलमार्क सर्टिफिकेट स्वयं सोने जितने ही बहुमूल्य और महत्वपूर्ण कानूनी दस्तावेज होते हैं। आने वाले समय में यदि आपको कभी आपातकालीन स्थिति में बैंक से ऋण (लोन) लेने के लिए सोना गिरवी रखना पड़े अथवा बाजार में उसे दोबारा बेचना पड़े, तो यही आधिकारिक कागजात आपके सबसे बड़े मददगार साबित होंगे। इसलिए इन महत्वपूर्ण दस्तावेजों की भौतिक प्रति के साथ-साथ उनकी डिजिटल कॉपियों को भी अपने मोबाइल अथवा कंप्यूटर में पूर्ण रूप से सुरक्षित सहेज कर रखना एक अत्यंत बुद्धिमत्तापूर्ण और दूरदर्शी कदम है।

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