मानसिक स्वास्थ्य पर बड़ा अलर्ट, हर 10वां भारतीय मानसिक बीमारी से प्रभावित

नई दिल्ली: देश में मानसिक स्वास्थ्य के बढ़ते मामलों को लेकर विशेषज्ञों ने गंभीर चिंता जताई है। एक हालिया चर्चा के दौरान विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में हर दस में से एक व्यक्ति किसी न किसी मानसिक विकार की चपेट में है, जबकि तनाव और मानसिक परेशानियों से जूझने वाली आबादी का दायरा इससे भी कहीं अधिक बड़ा है। 'फ्रीडम फ्रॉम साइलेंट सफरिंग मेंटल हेल्थ इन अर्बन इंडिया' विषय पर आयोजित एक विशेष सत्र में चिकित्सा जगत के दिग्गजों ने इस समस्या से निपटने के लिए शुरुआती दौर में ही पहचान और रोकथाम पर जोर देने की वकालत की है।

मानसिक स्वास्थ्य केवल गंभीर बीमारियों तक सीमित नहीं

कार्यक्रम के दौरान पूर्व इहबास प्रमुख और पैसिफिक वनहेल्थ में मनोचिकित्सा एवं मानसिक स्वास्थ्य के निदेशक प्रो. डॉ. निमेष जी. देसाई ने स्पष्ट किया कि देश की लगभग 10 से 12 प्रतिशत आबादी मानसिक विकारों से सीधे तौर पर प्रभावित है। उन्होंने बताया कि मानसिक स्वास्थ्य एक बहुत व्यापक दायरा है, जिसमें रोजमर्रा के तनाव और हल्की मानसिक अशांति से लेकर गंभीर मानसिक विकार तक शामिल हैं। इसलिए स्वास्थ्य प्रणाली को केवल गंभीर रूप से बीमार मरीजों के उपचार तक ही सीमित नहीं रखना चाहिए, बल्कि शुरुआती स्तर पर ही इसके लक्षणों को पहचानकर कदम उठाने की आवश्यकता है।

खुले तौर पर चर्चा और शुरुआती हस्तक्षेप है जरूरी

होप केयर इंडिया के निदेशक और इंडियन एसोसिएशन आफ प्राइवेट साइकियाट्री के दिल्ली चैप्टर के अध्यक्ष डॉ. दीपक राजेहा ने इस बात पर बल दिया कि समाज में तनाव, चिंता और अवसाद जैसे विषयों पर खुलकर बातचीत का माहौल तैयार किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि हमारी स्वास्थ्य व्यवस्था केवल इलाज पर ही निर्भर रहेगी, तो वह हमेशा समस्या से पीछे ही नजर आएगी। इसलिए बीमारी के बढ़ने का इंतजार करने के बजाय शुरुआती हस्तक्षेप और रोकथाम पर ध्यान देना बेहद जरूरी है।

जोखिमों की समय रहते पहचान पर जोर

पैसिफिक वनहेल्थ के सह-संस्थापक एवं अध्यक्ष डॉ. स्वदीप श्रीवास्तव ने मानसिक स्वास्थ्य को समग्र सेहत का एक अहम हिस्सा बताया। उन्होंने कहा कि गंभीर समस्याएं पैदा होने के बाद इलाज शुरू करने से बेहतर है कि जोखिमों की पहचान पहले ही कर ली जाए और लोगों को मानसिक रूप से स्वस्थ रखने के लिए काम किया जाए। इसी उद्देश्य के तहत पैसिफिक वनहेल्थ ने तनाव, चिंता और अवसाद की रोकथाम के लिए 'पी-एसएडी' (प्रिवेंशन आफ स्ट्रेस, एंग्जायटी एंड डिप्रेशन) नामक एक नई पहल की शुरुआत की है, जिसके माध्यम से जागरूकता फैलाने और शुरुआती जांच व सहायता को बढ़ावा दिया जाएगा। हील फाउंडेशन द्वारा पैसिफिक वनहेल्थ के सहयोग से 'हील वनहेल्थ कनेक्ट सीरीज' के तहत इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया था।

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