नोएडा में बड़ा प्रशासनिक चूक का मामला, DM का पत्र प्राधिकरण से लापता

नोएडा:लखनऊ में हुए भीषण अग्निकांड के बाद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पूरे प्रदेश में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कड़े तेवर अपनाए थे। उन्होंने सभी जिलों में आवासीय सेक्टरों और गांवों की जमीनों पर बने बेसमेंट में अवैध रूप से संचालित वाणिज्यिक गतिविधियों, कोचिंग सेंटरों, नर्सिंग होम और पीजी जैसी इमारतों पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए थे, जो सुरक्षा मानकों का खुलेआम उल्लंघन कर रही हैं। मुख्यमंत्री के इन स्पष्ट आदेशों के बावजूद नोएडा में धरातल पर कोई व्यापक या प्रभावी कार्रवाई देखने को नहीं मिली है, जिससे स्थानीय निवासियों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं।

जिलाधिकारी के आदेश पर प्राधिकरण ने नहीं दिखाया कोई उत्साह

शासन से मिले निर्देशों के अनुपालन में जिले के जिलाधिकारी (डीएम) ने तत्परता दिखाते हुए नोएडा विकास प्राधिकरण को एक औपचारिक पत्र भेजा था। इस पत्र में स्पष्ट रूप से निर्देश दिए गए थे कि प्राधिकरण की ओर से एक जिम्मेदार अधिकारी को नोडल अफसर नामित किया जाए और सुरक्षा मानकों की अनदेखी करने वाली अवैध इमारतों को सील करने की प्रक्रिया तुरंत शुरू की जाए। प्रशासनिक आदेश मिलने के बाद भी प्राधिकरण के स्तर पर इस संवेदनशील मामले को लेकर कोई गंभीरता नहीं दिखाई गई और नियमों का उल्लंघन करने वाले संस्थानों के खिलाफ कोई ठोस अभियान नहीं चलाया जा सका।

प्राधिकरण कार्यालय से कार्रवाई से जुड़ी महत्वपूर्ण फाइल हुई गायब

इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाला और गैर-जिम्मेदाराना पहलू तब सामने आया, जब यह पता चला कि जिलाधिकारी द्वारा भेजा गया वह महत्वपूर्ण सरकारी पत्र ही प्राधिकरण कार्यालय से गायब हो चुका है। आश्चर्य की बात यह है कि नोएडा प्राधिकरण के अधिकारियों को इस बात की पूरी जानकारी है कि ऐसा कोई आदेश पत्र विभाग में आया था, लेकिन वर्तमान में वह पत्र कहाँ है और किस अधिकारी को इसकी जिम्मेदारी सौंपी गई थी, इस बात का जवाब किसी के पास नहीं है। फाइल के इस तरह रहस्यमयी ढंग से लापता होने के कारण पूरी जांच और सीलिंग की प्रक्रिया अधर में लटक गई है।

सुरक्षा मानकों के उल्लंघन से आम जनता की जान खतरे में

सरकारी तंत्र की इस बड़ी लापरवाही और सुस्त रवैये का सीधा खामियाजा नोएडा के आम नागरिकों को भुगतना पड़ रहा है। शहर के तमाम आवासीय क्षेत्रों में नियमों को ताक पर रखकर धड़ल्ले से व्यावसायिक गतिविधियां चलाई जा रही हैं, जहाँ न तो आग से बचाव के पर्याप्त साधन हैं और न ही आपातकालीन निकास की कोई व्यवस्था है। विभागीय अधिकारियों की इस उदासीनता के कारण अवैध रूप से चल रहे कोचिंग सेंटरों और पीजी में रहने वाले हजारों युवाओं की जान हर वक्त खतरे में बनी रहती है, जबकि प्रशासन फाइल ढूंढने की औपचारिकता में उलझा हुआ नजर आ रहा है।

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