Monday, January 26, 2026

पुलिस हिरासत में बुज़ुर्ग की मौत, अधिकारी पर लगे हत्या के आरोप, मचा बवाल !

बिहार पुलिस जिस पर बिहार की जनता की सुरक्षा का दाइत्व है . जिनपर बिहार के अपराधियों को ख़त्म करने की ज़िम्मेदारी है लेकिन अपरधियों पर जब उनका बस नहीं चलता तो वो आम जनता और मासूम लोगों पर अपनी वर्दी की हनक दिखाते हैं . ये बात हम नहीं बल्कि बिहार की जनता बता रही है. बिहार पुलिस पर सवालों के तीर छोड़ता ये मामला बक्सर ज़िले के कोरानसराय थाने से सामने आया है . जहां पुलिस की प्रताड़ना और बदसलूकी से तंग आकर और अपने आत्मसम्मान को ठेस लगने से आहत होकर एक बुज़ुर्ग शख्स ने पुलिस हिरासत में ही पंखे से लटक कर ख़ुदकुशी कर ली . इस घटना के बाद से पूरे पुलिस महकमे में हड़कंप मचा है.
ये मामला बुधवार की देर रात कोरानसराय थाने का है. जहाँ थाने के कंप्यूटर रूम में एक बुज़ुर्ग शख़्स ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली. आत्महत्या करने वाले शख्स कोपवां गांव के रहने वाले यमुना सिंह थे जिनकी उम्र 70 साल है. सूत्रों की माने तो मृतक के परिजन और भोला पासवान व मिथलेश पासवान के परिजन से लगभग 15-20 दिन पहले बच्चों के खेल में विवाद हुआ था जिसमें मारपीट भी हुई थी. उसी घटना में थानाध्यक्ष जुनैद आलम ने 70 साल के बुजुर्ग यमुना सिंह को गिरफ्तार कर हाजत में बंद कर दिया था. गांव वालों का मानना है कि यमुना सिंह काफी आत्मसम्मान वाले व्यक्ति थे. पुलिस उन्हें घर से बेइज़्जत कर घसीटते हुए मारते पीटते हुए लेकर गई थी शायद इसीलिए वो ये सदमा बर्दाश्त नहीं कर पाए और उन्होंने ये कदम उठाया लेकिन वहीं मृतक यमुना सिंह के बेटे और पोते का कुछ और ही कहना है . यमुना सिंह की मौत के बाद उनके बेटे अरूण कुमार सिंह उर्फ पिंटू ने थानाध्यक्ष जुनैद आलम व डुमरांव के प्रभारी डीएसपी कुमार वैभव पर उनकी हत्या किए जाने का आरोप लगाते हुए साथ ही स्थानीय चौकीदार पर एफआईआर दर्ज कराने की मांग की है. परिजनों ने सबूत के तौर पर एक वीडियो दिखाते हुए कहा कि थानाध्यक्ष जुनैद दरवाजे पर से ही उन्हें मारते हुए ले गए थे. परिजनों के मुताबिक यमुना सिंह की मौत पुलिस की पिटाई की वजह से हुई है . इस घटना के बाद आक्रोशित गाँव वालों ने सड़क जाम कर दिया और धरने पर बैठ गए लेकिन तभी इस मामले में सख्त रुख अपनाते हुए एसपी ने परिजनों से कहा कि आप लिखित आवेदन दीजिए मैं खुद कार्रवाई करूंगा. इसी के तहत कार्रवाई करते हुए जुनैद आलम को ससपेंड कर दिया गया है और इन्क्वायरी की बात कही गई है .
इस के बाद आक्रोशित लोगों में इन्साफ की उम्मीद जागी और जाम हटाया . अब ये आत्महत्या है या फिर हत्या ये तो पुलिस की जांच के बाद ही पता चल पायेगा लेकिन अगर पुलिस अधिकारी गलत हैं तो उन्हें सजा और मृतक को इन्साफ जरूर मिलना चाहिए.

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