जेल प्रहरी की गुमशुदगी से बढ़ी चिंता, सुसाइड नोट ने खड़े किए कई सवाल

बालोद: छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में स्थित उप जेल में पदस्थ जेल प्रहरी महेंद्र वर्मा के रहस्यमय तरीके से अचानक लापता हो जाने के बाद प्रशासनिक और पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है। घर से गायब होने से ठीक पहले महेंद्र ने अपने भांजे के मोबाइल नंबर पर एक वीडियो भेजा था। इस वीडियो के जरिए उन्होंने यह जानकारी दी थी कि उन्होंने अपनी स्कूटी की डिक्की के अंदर एक खत (पत्र) छिपाकर रखा है। जब परिजनों ने घबराकर स्कूटी की डिक्की खोली, तो उसमें से आठ पन्नों का एक विस्तृत पत्र बरामद हुआ, जिसे विशेष रूप से पुलिस अधीक्षक (SP) और जिला कलेक्टर के नाम संबोधित किया गया है।

इस सनसनीखेज पत्र में लापता जेल प्रहरी ने जेलर पर गंभीर मानसिक प्रताड़ना, बेवजह दबाव बनाने और कई अन्य संगीन आरोप जड़े हैं। परिजनों के अनुसार, इस पत्र में जेल के भीतर एक विचाराधीन या सजायाफ्ता बंदी के पास से मोबाइल फोन बरामद होने की एक घटना का प्रमुखता से जिक्र किया गया है। महेंद्र वर्मा का मुख्य आरोप यह था कि उस मामले में जेलर द्वारा उन्हें जबरन जिम्मेदार ठहराया जा रहा था और कथित रूप से पूरा आरोप अपने ऊपर लेने के लिए उन पर लगातार भारी दबाव बनाया जा रहा था।

इसके अलावा, महेंद्र ने अपने इस पत्र में दुर्ग जेल अधीक्षक मनीष संभाकर का नाम भी स्पष्ट रूप से लिखा है और उनके ऊपर भी गंभीर मानसिक तनाव व प्रताड़ना देने के आरोप लगाए हैं। पत्र में उन्होंने अपनी ड्यूटी के दौरान की गई तलाशी की एक घटना का भी हवाला दिया है। साथ ही अपने परिवार, मासूम बच्चों और भविष्य की जिम्मेदारियों को लेकर कई भावुक बातें लिखी गई हैं।

थाने में गुमशुदगी दर्ज, पुलिस तलाश में जुटी

सामने आए इस वीडियो और आठ पन्नों के मार्मिक पत्र को देखने के बाद परिजन तुरंत स्थानीय थाने पहुंचे और जेल प्रहरी महेंद्र वर्मा की गुमशुदगी की आधिकारिक रिपोर्ट दर्ज कराई। इस घटना के सामने आने के बाद से ही पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां उनकी तलाश में लगातार जुटी हुई हैं, हालांकि अभी तक उनका कोई भी आधिकारिक सुराग हाथ नहीं लग पाया है।

उल्लेखनीय है कि बालोद जिला जेल की सुरक्षा व्यवस्था और बंदियों तक अवैध तरीके से मोबाइल फोन पहुंचने के मामले पहले भी कई बार विवादों और सवालों के घेरे में रहे हैं। पूर्व में दिसंबर 2025 के दौरान भी जिला जेल परिसर के भीतर से एक मोबाइल फोन बरामद हुआ था, जिसके बाद जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हुए थे।

फिलहाल, जेल प्रहरी द्वारा इस पत्र में लगाए गए तमाम गंभीर आरोपों की किसी भी स्वतंत्र एजेंसी द्वारा आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं की जा सकेगी। पुलिस की विस्तृत जांच-पड़ताल और स्वयं महेंद्र वर्मा के सकुशल मिलने के बाद ही इस पूरे प्रकरण की वास्तविक स्थिति से पर्दा उठ सकेगा।

सुसाइड नोट में क्या-क्या लिखा है?

महेंद्र वर्मा ने अपने इस सुसाइड नोट की शुरुआत अपने बड़े बेटे जयंत को संबोधित करते हुए की है। उन्होंने अपने बेटे से माफी मांगते हुए लिखा है कि वह पिता के रूप में अपनी जिम्मेदारियों से पीछे हट रहे हैं। उन्होंने बच्चों को पूरी मेहनत और लगन से पढ़ाई करने, अपने पैरों पर खड़े होने और अपने परिवार का हमेशा ख्याल रखने की नसीहत दी है। पत्र में उन्होंने अपने बेटे से कलेक्टर बनने के उनके सपने को खुद पूरा करने की भावुक इच्छा भी जताई है।

पत्र के अगले हिस्से में उन्होंने अपने दूसरे बेटे को डॉक्टर बनने का सपना पूरा करने की बात कही है और उससे भी अपने इस कदम के लिए माफी मांगी है। अपनी धर्मपत्नी को संबोधित करते हुए उन्होंने जीवन के हर मोड़ पर साथ निभाने के लिए उनका आभार जताया है और इस अचानक उठाए गए कदम के लिए क्षमा मांगी है। अपने माता-पिता से माफी मांगते हुए उन्होंने लिखा है कि वे उनके बुढ़ापे की लाठी और सहारा नहीं बन पाएंगे।

पत्र के एक अन्य हिस्से में महेंद्र ने अपने ऊपर चल रहे भारी मानसिक तनाव और कथित प्रताड़ना का दर्द बयां किया है। उन्होंने मनीष संभाकर समेत कुछ अन्य अधिकारियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने और उनके विरुद्ध एफआईआर दर्ज किए जाने की पुरजोर मांग की है। पत्र में उन्होंने जेल के भीतर तलाशी से जुड़ी एक विशेष घटना का भी जिक्र किया है। उन्होंने यह दावा किया है कि बीते 12 अगस्त 2026 की शाम उनकी तलाशी लिए जाने के दौरान उनके साथ कथित तौर पर बेहद अमानवीय व्यवहार किया गया था।

महेंद्र ने अपने पत्र में अपनी रोजाना की जा रही तलाशी का जिक्र करते हुए जेल के अंदर बंदियों की गतिविधियों और आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने मांग की है कि इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच के दौरान घटना से जुड़े सभी सीसीटीवी फुटेज (CCTV Footage) को सुरक्षित रखा जाए और उनकी गहन तकनीकी जांच कराई जाए।

पत्र के बिल्कुल अंतिम पड़ाव पर उन्होंने अपने पूरे परिवार की सुरक्षा को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने अपने परिवार को बालोद शहर से सुरक्षित कहीं अन्य स्थान पर ले जाने और अपने बच्चों का किसी अच्छे संस्थान या स्कूल में दाखिला कराने की अंतिम अपील की है। हालांकि, यह पूरा पत्र कुल आठ पन्नों का है और वर्तमान में यह सनसनीखेज सुसाइड लेटर परिजनों और स्थानीय पुलिस के पास सुरक्षित मौजूद है।

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