अंबिकापुर: केंद्र सरकार की 'प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी)' एवं राज्य सरकार की 'मोर जमीन मोर मकान' योजना के अंतर्गत निर्मित फ्लैट्स की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। नगर निगम द्वारा ₹4.25 लाख में आवंटित किए गए ये आशियाने हस्तांतरण के कुछ ही समय भीतर जर्जर स्थिति में पहुंचने लगे हैं। बाहरी तरफ से आकर्षक दिखने वाले इन बहुमंजिला भवनों के भीतर सीपेज (पानी का रिसाव) और दीवारों में गहरी दरारें आ गई हैं, जिससे क्षुब्ध होकर कई हितग्राही अपने आवंटित मकानों को वापस करने की मांग कर रहे हैं।
10 वर्ष पूर्व शुरू हुई थी परियोजना, बजट के अभाव में लटका रहा काम
अंबिकापुर में लगभग एक दशक पूर्व पीएम आवास योजना के तहत फ्लैट्स निर्माण के लिए भूमिपूजन किया गया था। प्रशासनिक दावों के विपरीत, ठेकेदार द्वारा बजट के अभाव का हवाला देकर कार्य रोक दिए जाने के कारण यह परियोजना वर्षों तक अधर में लटकी रही:
स्वीकृत एवं निर्मित मकान: कुल स्वीकृत 1,200 मकानों में से प्रथम चरण में 22 करोड़ रुपये की लागत से केवल 493 फ्लैट्स का निर्माण पूर्ण किया गया।
निर्माण की गुणवत्ता पर प्रश्नचिह्न: नवनिर्मित परिसरों में छत से लगातार पानी टपकने और संरचनात्मक दरारें आने के कारण रहवासियों का जीवन जोखिम में पड़ गया है।
हितग्राहियों का आक्रोश और भारी आर्थिक बोझ
संपूर्ण राशि जमा करने के बावजूद घटिया निर्माण कार्य से आहत आवंटियों का कहना है कि उन्होंने जीवन भर की कमाई लगाकर यह आशियाना खरीदा था। अब स्थिति यह है कि आए दिन अधिकारियों और ठेकेदार के चक्कर काटने के बावजूद समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं निकल पा रहा है।
महापौर का आश्वासन एवं प्रशासनिक जवाबदेही
मामले के तूल पकड़ने पर अंबिकापुर नगर निगम की महापौर मंजूषा भगत ने कहा कि जिन स्थानों पर निर्माण कार्य अपूर्ण या गुणवत्ताहीन पाए गए हैं, उन्हें ठेकेदार के माध्यम से अविलंब दुरुस्त कराया जाएगा। उन्होंने परिसर में पेयजल, बिजली और अन्य बुनियादी सुविधाएं शीघ्र सुनिश्चित करने का आश्वासन भी दिया है। हालांकि, करोड़ों रुपये के इस बहुप्रतीक्षित प्रोजेक्ट में घटिया निर्माण सामग्री के प्रयोग ने नगर निगम की निगरानी प्रणाली और प्रशासनिक पारदर्शिता पर गंभीर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं।

