नई दिल्ली। भारतीय करदाताओं के लिए अब केवल पारंपरिक नौकरी या वेतन ही आय का एकमात्र जरिया नहीं रह गया है। शेयर बाजार में ट्रेडिंग, नए कारोबार, फ्रीलांसिंग और क्रिप्टोकरेंसी में निवेश जैसे विभिन्न आधुनिक साधनों से होने वाली कमाई भी करदाताओं के आयकर रिटर्न फॉर्म में तेजी से अपनी जगह बना रही है। कराधान संबंधी वार्षिक रिपोर्ट 'हाउ इंडिया फाइल्ड इन 2026' के अनुसार, आकलन वर्ष 2026-27 में स्वयं अपना रिटर्न दाखिल करने वाले 47.3 प्रतिशत करदाताओं ने नौकरी के अतिरिक्त कम से कम एक अन्य वित्तीय स्रोत से होने वाली आय का ब्योरा दर्ज कराया है, जबकि आकलन वर्ष 2022-23 में यह अनुपात महज 9.5 प्रतिशत ही दर्ज किया गया था। इस प्रकार बीते चार वर्षों में ऐसे करदाताओं की हिस्सेदारी में करीब पांच गुना का बड़ा उछाल आया है।
कमाई के बहुविध साधनों में वृद्धि और करदाताओं का बदला रुझान
रिपोर्ट के आंकड़ों से स्पष्ट होता है कि केवल अन्य साधनों से कमाने वाले व्यक्तियों की संख्या में बढ़ोतरी ही नहीं हुई है, बल्कि एक से अधिक गैर-वेतन स्रोतों से आय प्राप्त करने वाले करदाताओं का अनुपात भी काफी बढ़ा है। जहां आकलन वर्ष 2022-23 में केवल 3.5 प्रतिशत करदाताओं ने दो या उससे अधिक गैर-वेतन साधनों से होने वाली आय की जानकारी दी थी, वहीं आकलन वर्ष 2026-27 में यह आंकड़ा बढ़कर 24.4 प्रतिशत के स्तर पर पहुंच गया है। इसका सीधा अर्थ यह है कि वर्तमान समय में देश का हर चौथा करदाता अपनी आय के कम से कम दो गैर-वेतन स्रोतों का आधिकारिक ब्योरा अपने आयकर रिटर्न में दे रहा है।
आयकर रिटर्न फॉर्म के स्वरूप और चयन में आया बड़ा बदलाव
आय के विभिन्न नए स्रोतों के जुड़ने का प्रत्यक्ष प्रभाव आयकर रिटर्न (आईटीआर) के प्रारूप और उसके चयन पर भी साफ तौर पर देखा जा रहा है। अब अधिक से अधिक करदाताओं को वे जटिल रिटर्न फॉर्म भरने पड़ रहे हैं जिनमें पूंजीगत लाभ, व्यावसायिक आय और अन्य विविध वित्तीय लेन-देन का विस्तृत विवरण दर्ज किया जाता है। आंकड़ों के मुताबिक, आकलन वर्ष 2026-27 के दौरान लगभग 62 प्रतिशत आयकर रिटर्न ऐसे दर्ज किए गए जो सामान्य वेतनभोगियों के लिए निर्धारित आईटीआर-1 फॉर्म के बजाय अन्य विशिष्ट श्रेणियों वाले फॉर्मों में भरे गए थे। दो वर्ष पूर्व आकलन वर्ष 2024-25 में यह हिस्सेदारी 40 प्रतिशत थी, जो भारतीय करदाताओं के वित्तीय व्यवहार में आ रहे बड़े बदलाव को दर्शाती है।

