नई दिल्ली। मध्य और पूर्वी अफ्रीका में पैर पसार रहे घातक 'इबोला वायरस' (Ebola Virus) के प्रकोप को देखते हुए भारत सरकार पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ गई है। इबोला प्रभावित देशों से आने वाले या वहां से होकर गुजरने वाले अंतरराष्ट्रीय यात्रियों की कड़ी निगरानी के लिए 'एयर सुविधा पोर्टल' को फिर से एक्टिव कर दिया गया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा इबोला को अंतरराष्ट्रीय चिंता का सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल (PHEIC) घोषित किए जाने के बाद यह कदम उठाया गया है। अब प्रभावित देशों से आने वाले यात्रियों को भारत में उतरने से पहले ऑनलाइन 'सेल्फ-डिक्लेरेशन फॉर्म' (SDF) भरना अनिवार्य होगा, जिससे हवाई अड्डों और बंदरगाहों पर स्क्रीनिंग की प्रक्रिया को डिजिटल और अधिक मजबूत बनाया जा सके।
फ्रांस में फ्लाइट के भीतर डॉक्टर मिला पॉजिटिव, संपर्क में आए 5 लोग आइसोलेट
अफ्रीका के बाद अब इस वायरस ने यूरोप में भी दस्तक दे दी है। फ्रांस में एक अनुभवी भारतीय या विदेशी डॉक्टर के इबोला संक्रमित मिलने के बाद हड़कंप मच गया है। फ्रांस की स्वास्थ्य मंत्री स्टेफनी रिस्ट के मुताबिक, यह डॉक्टर डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (DRC) में एक चिकित्सा मिशन से लौटे थे। फ्लाइट में बैठते समय उनमें कोई लक्षण नहीं थे, लेकिन सफर के दौरान तेज सिरदर्द होने पर उन्होंने खुद ही अलर्ट जारी किया। पेरिस एयरपोर्ट पर लैंड करते ही डॉक्टर को तुरंत अस्पताल के विशेष आइसोलेशन वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया। वहीं, फ्लाइट में उनके संपर्क में आए 5 अन्य संदिग्ध यात्रियों की पहचान कर उन्हें भी 21 दिनों (इन्क्यूबेशन पीरियड) के लिए क्वारंटाइन कर दिया गया है।
यूरोप में खतरे का अनुमान कम, लेकिन कांगो में मौतों का आंकड़ा 290 के पार
यूरोपीय सेंटर फॉर डिजीज प्रिवेंशन एंड कंट्रोल (ECDC) का मानना है कि यूरोपीय देशों के आम नागरिकों के लिए इस संक्रमण का खतरा फिलहाल बेहद कम है। इसके बावजूद सुरक्षात्मक कदम उठाए जा रहे हैं। दूसरी ओर, संक्रमण के मुख्य केंद्र डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (DRC) में हालात लगातार बिगड़ रहे हैं। कांगो सरकार द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, देश में अब तक इबोला के 1,118 पुष्ट मामले सामने आ चुके हैं, जिनमें से 291 मरीजों की मौत हो चुकी है। वैश्विक स्वास्थ्य एजेंसियां संक्रमण की इस चेन को तोड़ने के लिए लगातार प्रयास कर रही हैं।

