नई दिल्ली। जापानी निवेश फर्म सॉफ्टबैंक द्वारा अपनी हिस्सेदारी कम किए जाने के बावजूद, प्रसिद्ध आईवियर रिटेलर 'लेंसकार्ट सॉल्यूशंस' पर निवेशकों का भरोसा पूरी तरह कायम है। मई 2026 में लॉक-इन अवधि समाप्त होने के बाद सॉफ्टबैंक और अन्य विदेशी प्राइवेट इक्विटी निवेशकों द्वारा बेचे गए तमाम शेयरों को घरेलू म्युचुअल फंडों तथा विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने हाथों-हाथ खरीद लिया है। यह घटनाक्रम कंपनी की मजबूत वित्तीय स्थिति और भविष्य के शानदार विकास पर निवेशकों के गहरे विश्वास को उजागर करता है।
म्युचुअल फंडों की बड़ी हिस्सेदारी
सितंबर 2026 के आंकड़ों के अनुसार, एसबीआई एग्रेसिव हाइब्रिड फंड लेंसकार्ट में सबसे बड़ा संस्थागत फंड निवेशक बनकर उभरा है, जिसके पास कंपनी की 3 प्रतिशत हिस्सेदारी है। इसके बाद कोटक टेक्नोलॉजी फंड के पास 1.76 प्रतिशत और एचएसबीसी मल्टी कैप फंड के पास 1.34 प्रतिशत हिस्सेदारी दर्ज की गई है।
शेयर बाजार में शानदार प्रदर्शन
निवेशकों के इस अटूट भरोसे का असर कंपनी के शेयरों पर भी साफ नजर आ रहा है। हाल ही में शुक्रवार के कारोबारी सत्र में लेंसकार्ट का शेयर 0.59 प्रतिशत की बढ़त के साथ 646.50 रुपये के स्तर पर बंद हुआ। बीते एक साल के दौरान कंपनी के शेयरों में 43.4 प्रतिशत की शानदार तेजी दर्ज की गई है, जबकि इसी अवधि में प्रमुख सूचकांक निफ्टी 50 में 11.7 प्रतिशत की गिरावट आई थी।
मजबूत वित्तीय नतीजे और भविष्य की संभावनाएं
बाजार विश्लेषकों का मानना है कि यह तेजी केवल बाजार के उत्साह का परिणाम नहीं है, बल्कि यह कंपनी के ठोस मुनाफे और मजबूत बुनियादी ढांचे को दर्शाती है। हालिया वित्तीय परिणामों के मुताबिक, जून तिमाही में लेंसकार्ट का राजस्व सालाना आधार पर 34 प्रतिशत की जोरदार छलांग के साथ 2,710 करोड़ रुपये पर पहुंच गया है। विश्लेषकों का यह भी कहना है कि वित्त वर्ष 2027-28 के लिए कंपनी के मुनाफे के अनुमानों में 27 से 30 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी की गई है, जो इसे बाजार में एक बेहद मजबूत और टिकाऊ खिलाड़ी के रूप में स्थापित कर रहा है।

