पाकिस्तान में आटे के दाम ने छुआ आसमान, इस्लामाबाद-रावलपिंडी में कीमतें देख व्यापारी परेशान

नई दिल्ली: पड़ोसी देश पाकिस्तान का नाम सामने आते ही वहां की बदहाल अर्थव्यवस्था, विकराल गरीबी, आसमान छूती महंगाई और बुनियादी खाद्य पदार्थों के लिए मचे हाहाकार की तस्वीरें जेहन में घूमने लगती हैं। पाकिस्तान लंबे समय से गंभीर आर्थिक बदहाली का सामना कर रहा है और वहां से आए दिन खाने-पीने की जरूरी चीजों के दाम बढ़ने की खबरें सुर्खियां बनती रहती हैं। इसी कड़ी में एक बार फिर पाकिस्तान के आम नागरिकों की थाली पर महंगाई की मार पड़ी है, जहां जुलाई महीने के अंतिम सप्ताह की तुलना में अगस्त के शुरुआती हफ्तों में आटे और मैदे की कीमतों में भारी उछाल दर्ज किया गया है।

संवेदनशील मूल्य सूचकांक (SPI) के आंकड़ों में हुआ बड़ा खुलासा

पाकिस्तानी मीडिया और वहां के प्रमुख समाचार पत्रों की रिपोर्टों के अनुसार, देश में गेहूं के आटे और मैदे के दामों में एक बार फिर अप्रत्याशित बढ़ोतरी हुई है। हाल ही में जारी किए गए संवेदनशील मूल्य सूचकांक (SPI) के आंकड़ों के मुताबिक, कराची शहर में 20 किलो गेहूं का आटा, 10 किलो आटे की बोरी और एक किलो मैदे की कीमतों में अतिरिक्त इजाफा हुआ है। पिछले सप्ताह जहां 20 किलो आटे का पैकेट 2,600 से 2,900 पाकिस्तानी रुपये के बीच बिक रहा था, वहीं अब वह बढ़कर 2,700 से 3,000 पाकिस्तानी रुपये तक पहुंच गया है। इसके अलावा 10 किलो की बोरी और मैदे के दाम भी काफी बढ़ गए हैं।

कई प्रमुख शहरों में बीस किलो आटे की बोरी हुई सौ रुपये तक महंगी

रिपोर्ट्स के मुताबिक छह अगस्त को समाप्त हुए सप्ताह के दौरान पाकिस्तान के कई अन्य प्रमुख शहरों में भी 20 किलो की आटे की बोरी की कीमत में औसतन सौ पाकिस्तानी रुपये की बढ़ोतरी देखने को मिली है। सेंसेटिव प्राइस इंडेक्स के आंकड़ों से यह स्पष्ट होता है कि हफ्ते-दर-हफ्ते व्हीट फ्लोर के दामों में लगातार इजाफा हो रहा है। इसके साथ ही बेकरी और अन्य उपयोग में आने वाले फाइन फ्लोर यानी मैदे की कीमतों में भी इसी अवधि के दौरान जबरदस्त तेजी दर्ज की गई है, जिससे आम आदमी का रसोई का बजट पूरी तरह से बिगड़ गया है।

इस्लामाबाद और रावलपिंडी में सबसे महंगे दामों पर बिक रहा आटा

खाद्य पदार्थों के बढ़ते दामों के बीच देश की राजधानी इस्लामाबाद और रावलपिंडी में स्थिति सबसे ज्यादा चिंताजनक बनी हुई है, जहां कीमतें अन्य शहरों की तुलना में काफी अधिक हैं। यहां 10 किलो गेहूं की थैली का दाम बढ़कर रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है, जिसके चलते 20 किलो आटे की थैली की कीमत तीन हजार चार, से लेकर तीन हजार एक सौ तैंतीस पाकिस्तानी रुपये तक जा पहुंची है। इसके अलावा बारीक मैदे का दाम भी यहां सबसे अधिक दर्ज किया गया है, जिससे उपभोक्ताओं की मुश्किलें कई गुना बढ़ गई हैं।

व्यापारियों की चेतावनी, आयात से पहले दाम नियंत्रित न किए तो बढ़ेगी मुसीबत

बढ़ती कीमतों को लेकर स्थानीय व्यापारियों और जानकारों का कहना है कि सरकार द्वारा दस लाख टन गेहूं के आयात किए जाने की योजना पर काम चल रहा है, लेकिन सरकार का ध्यान इस बीच आसमान छूती कीमतों को नियंत्रित करने पर बिल्कुल नहीं है। व्यापारियों का साफ तौर पर यह मानना है कि यदि विदेशी गेहूं देश में पहुंचने से पहले सरकार ने खुदरा और थोक बाजारों में कीमतों को काबू में नहीं किया, तो आम जनता को इस आयात का कोई भी वास्तविक लाभ नहीं मिल पाएगा और गरीबों की मुश्किलें और अधिक बढ़ जाएंगी।

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