Bihar SIR Protest पटना: बिहार की राजधानी पटना में गुरुवार, 8 अक्टूबर 2026 को मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर सियासी घमासान देखने को मिला. नेता प्रतिपक्ष और राष्ट्रीय जनता दल (RJD) नेता तेजस्वी यादव के नेतृत्व में महागठबंधन ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ ‘आक्रोश मार्च’ निकाला.
राजद, कांग्रेस, विकासशील इंसान पार्टी (VIP) और वाम दलों के नेताओं-कार्यकर्ताओं ने इस मार्च में हिस्सा लिया. प्रदर्शनकारियों ने इसे ‘ज्ञानेश भगाओ-लोकतंत्र बचाओ मार्च’ का नाम दिया. मार्च विधानसभा के पास स्थित शहीद स्मारक से शुरू होकर लोकभवन/राजभवन की ओर बढ़ा.
पटना में विपक्ष का प्रदर्शन शुरू हो गया है
प्रदर्शनकारी बैरिकेडिंग पर चढ़कर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और मोदी सरकार के खिलाफ जता रहे विरोध
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— Article19 India (@Article19_India) October 8, 2026
प्रदर्शन के दौरान ‘ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दो’, ‘वोट चोरी बंद करो’ और ‘लोकतंत्र बचाओ’ जैसे नारे लगाए गए. विपक्षी दलों ने SIR प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त पर तीखे सवाल उठाए.
Bihar SIR Protest :SIR को लेकर विपक्ष का बड़ा आरोप
महागठबंधन का आरोप है कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान बड़ी संख्या में योग्य मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं. विपक्ष का दावा है कि इसका सबसे ज्यादा असर गरीब, दलित और अल्पसंख्यक वर्ग के मतदाताओं पर पड़ा है.
विपक्षी नेताओं का कहना है कि मतदाता सूची से किसी योग्य नागरिक का नाम हटना उसके संवैधानिक मतदान अधिकार को प्रभावित करता है. इसी आधार पर महागठबंधन SIR प्रक्रिया का विरोध कर रहा है और इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा बता रहा है.
प्रदर्शनकारियों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करते हुए उन्हें ‘वोट चोर’ तक कहा.
पांच लेयर की बैरिकेडिंग,आगे बढ़ने पर पुलिस से धक्का-मुक्की
महागठबंधन के मार्च को देखते हुए पटना पुलिस ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए थे. मार्च के रास्ते में पांच लेयर की बैरिकेडिंग की गई थी, ताकि प्रदर्शनकारियों को राजभवन की ओर आगे बढ़ने से रोका जा सके.
मार्च के दौरान उस समय तनाव बढ़ गया जब तेजस्वी यादव ने बैरिकेडिंग पार करके आगे बढ़ने की कोशिश की. इसके बाद पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की की स्थिति बन गई.
पुलिस ने प्रदर्शन में शामिल कई नेताओं को अपने नियंत्रण में लिया. तेजस्वी यादव, उनकी बहन और राज्यसभा सांसद मीसा भारती, VIP प्रमुख मुकेश सहनी समेत कई नेताओं को पुलिस वाहन में बैठाया गया.
हालांकि, पटना एसएसपी के मुताबिक तेजस्वी यादव को हिरासत में नहीं लिया गया था. उन्हें राज्यपाल से मुलाकात के लिए लोकभवन ले जाया गया,जबकि प्रदर्शन में शामिल कुछ अन्य नेताओं को डिटेन किया गया.
प्रदर्शन के दौरान पूर्व विधायक अजीत कुशवाहा के बेहोश होने की भी जानकारी सामने आई.
राज्यपाल को सौंपा तीन पन्नों का ज्ञापन
प्रदर्शन के बाद महागठबंधन के प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल को तीन पन्नों का ज्ञापन सौंपा. इसमें विपक्ष ने SIR प्रक्रिया को रद्द करने समेत कई मांगें रखीं.
ज्ञापन में मुख्य मांगें थीं:
- SIR प्रक्रिया को रद्द किया जाए.
- मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई की जाए.
- ईवीएम के बजाय बैलेट पेपर से चुनाव कराने की व्यवस्था की जाए.
- वर्ष 2023 के संबंधित कानून की समीक्षा की जाए.
महागठबंधन का कहना है कि चुनावी प्रक्रिया में मतदाताओं का विश्वास सबसे महत्वपूर्ण है और मतदाता सूची को लेकर किसी भी तरह की आशंका को दूर किया जाना चाहिए.
तेजस्वी बोले- ज्ञानेश कुमार को बचाने के लिए बैरिकेडिंग
मार्च के दौरान तेजस्वी यादव ने प्रशासन और सरकार पर तीखा हमला बोला. उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को बचाने के लिए इतनी बड़ी संख्या में बैरिकेडिंग कर रहा है.
तेजस्वी ने दावा किया कि लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने के अधिकार को रोका जा रहा है और लोकतंत्र को कमजोर करने की साजिश की जा रही है.
महागठबंधन नेताओं ने कहा कि उनका आंदोलन किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि मतदाता अधिकारों और चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग को लेकर है.
प्रदर्शनकारियों ने अपनाया अलग अंदाज
पटना के प्रदर्शन में कुछ कार्यकर्ताओं ने ज्ञानेश कुमार का मुखौटा पहनकर प्रदर्शन किया. कुछ प्रदर्शनकारी हथकड़ी लगाकर भी मार्च में शामिल हुए.
इन प्रतीकात्मक प्रदर्शनों के जरिए विपक्षी कार्यकर्ताओं ने यह संदेश देने की कोशिश की कि उनके मुताबिक चुनावी प्रक्रिया और लोकतांत्रिक अधिकारों पर दबाव बढ़ रहा है.
मार्च के दौरान विपक्षी कार्यकर्ताओं की बड़ी संख्या के कारण इलाके में राजनीतिक माहौल काफी गर्म रहा.
बीजेपी-जेडीयू ने बताया ‘राजनीतिक हताशा’
महागठबंधन के प्रदर्शन पर बीजेपी और जेडीयू ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी। सत्ता पक्ष ने इसे विपक्ष की ‘राजनीतिक हताशा’ बताया.
बीजेपी और जेडीयू नेताओं का आरोप है कि जो राजनीतिक दल पहले बूथ कैप्चरिंग जैसी गतिविधियों के जरिए चुनाव जीतकर सरकार बनाते थे, वही अब मतदाता सूची के SIR को लेकर सवाल उठा रहे हैं.
सत्ता पक्ष का कहना है कि चुनावी प्रक्रिया को लेकर विपक्ष का आंदोलन राजनीतिक दबाव बनाने की कोशिश है और इससे चुनावी प्रक्रिया में बाधा पैदा हो सकती है.
7 अक्टूबर के प्रखंड स्तरीय मार्च का विस्तार
पटना में हुआ यह प्रदर्शन अचानक नहीं हुआ. महागठबंधन ने 7 अक्टूबर को प्रखंड स्तर पर आक्रोश मार्च का आयोजन किया था.विपक्षी दलों ने साफ कर दिया है कि SIR और चुनाव आयोग के खिलाफ उनका आंदोलन अभी खत्म नहीं हुआ है. महागठबंधन की ओर से आंदोलन को आगे भी जारी रखने का ऐलान किया गया है.
बिहार चुनाव से पहले बढ़ा राजनीतिक तापमान
बिहार में चुनावी माहौल के बीच SIR को लेकर शुरू हुआ यह विवाद अब बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन चुका है. एक तरफ महागठबंधन मतदाता सूची की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए इसे लोकतंत्र और मताधिकार से जोड़ रहा है, वहीं दूसरी तरफ सत्ता पक्ष विपक्ष के आरोपों को राजनीतिक हताशा बता रहा है.
पटना में तेजस्वी यादव के नेतृत्व में हुआ यह मार्च इसी बढ़ते राजनीतिक तनाव का बड़ा उदाहरण है. राजभवन तक पहुंचा यह विरोध प्रदर्शन अब बिहार की चुनावी राजनीति में SIR और चुनाव आयोग की भूमिका को एक अहम मुद्दा बना चुका है. विपक्ष के कड़े तेवर ने ये बता दिया है कि इस बार आर-पार की लड़ाई है. तेजस्वी यादव के साथ सड़क पर आई भीड़ से भी जनभावना का अंदाजा लगाया जा सकता है.

