गोरखपुर का टेराकोटा अब दुनिया में बिखेरेगा चमक, यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो में लगेंगे चार स्टॉल

Gorakhpur Terracotta गोरखपुर:गोरखपुर की पहचान बन चुका पारंपरिक टेराकोटा शिल्प अब वैश्विक बाजार में अपनी नई पहचान बनाने की तैयारी में है। ग्रेटर नोएडा के इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट में 25 से 29 सितंबर तक आयोजित होने वाले उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो (UPITS) के चौथे संस्करण में गोरखपुर के टेराकोटा उत्पादों के चार विशेष स्टॉल लगाए जाएंगे।

अंतरराष्ट्रीय स्तर के इस व्यापारिक मंच पर गोरखपुर के शिल्पियों को देश-विदेश से आने वाले खरीदारों, निर्यातकों और बड़े कारोबारी समूहों के सामने अपने उत्पाद प्रदर्शित करने का मौका मिलेगा। इससे स्थानीय टेराकोटा उत्पादों की ब्रांडिंग के साथ-साथ नए बाजार और निर्यात के अवसर मिलने की उम्मीद है।

Gorakhpur Terracotta:चार स्टॉल पर दिखेगी गोरखपुर की मिट्टी की कला

यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो में गोरखपुर के टेराकोटा उत्पादों के चार स्टॉल लगाए जाएंगे। उद्योग विभाग की ओर से इसके लिए जिन शिल्पियों और कारोबारियों का चयन किया गया है, उनमें मेसर्स अतरंगी कलाकारी की दीपिका सिंह, जो टेराकोटा ज्वेलरी और होम डेकोरेशन उत्पाद बनाती हैं, रीतिका कृतिका क्रिएशन की सुनीता मौर्या, गिफ्ट सिटी के कमलेश तिवारी और मेसर्स रोशनी एक उम्मीद ट्रस्ट की कोमल मद्देशिया शामिल हैं।

इन स्टॉल पर पारंपरिक टेराकोटा के साथ आधुनिक जरूरतों और डिजाइन के अनुरूप तैयार किए गए उत्पाद भी प्रदर्शित किए जाएंगे।

विदेशी खरीदारों तक पहुंचेगा गोरखपुर का टेराकोटा

ट्रेड शो में बड़ी संख्या में विदेशी प्रतिनिधियों और कॉरपोरेट खरीदारों के पहुंचने की उम्मीद है। ऐसे में गोरखपुर के टेराकोटा शिल्पियों को सीधे संभावित खरीदारों से संवाद करने और अपने उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार के सामने रखने का अवसर मिलेगा।

उद्योग विभाग के अनुसार, यह मंच टेराकोटा उत्पादों की सीधी ब्रांडिंग के साथ निर्यात की संभावनाओं को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

उद्योग उपायुक्त उज्ज्वल सिंह के मुताबिक, ट्रेड शो में लगाए जाने वाले स्टॉल गोरखपुर के शिल्पियों के हुनर को अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रदर्शित करने का माध्यम बनेंगे। उनके अनुसार, पारंपरिक हुनर को बेहतर नीति, तकनीक और बाजार का सहयोग मिलने पर स्थानीय शिल्प को बड़े कारोबारी अवसरों में बदला जा सकता है।

ओडीओपी में शामिल होने के बाद बदली तस्वीर

गोरखपुर के भटहट ब्लॉक का औरंगाबाद गांव टेराकोटा शिल्प के प्रमुख केंद्रों में माना जाता है। औरंगाबाद तथा आसपास के गांवों में कई परिवार पीढ़ियों से मिट्टी के इस पारंपरिक शिल्प से जुड़े हुए हैं।

वर्ष 2018 में शुरू की गई एक जिला एक उत्पाद (ODOP) पहल के तहत टेराकोटा को गोरखपुर के प्रमुख उत्पाद के रूप में पहचान मिली। इसके बाद शिल्पियों को उत्पादन बढ़ाने के लिए विद्युत चालित चाक, पगमिल और अनुदान आधारित ऋण जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराए जाने की जानकारी दी गई।

इसके साथ ही टेराकोटा की सरकारी स्तर पर ब्रांडिंग और विभिन्न मंचों पर प्रदर्शनी से उत्पाद को नए बाजारों तक पहुंचाने में मदद मिली।

आधुनिक डिजाइन से जुड़ रही नई पीढ़ी

टेराकोटा की बढ़ती मांग ने शिल्पकार परिवारों की आर्थिक गतिविधियों को भी प्रभावित किया है। कई शिल्पियों ने पारंपरिक कार्यस्थलों की जगह पक्की वर्कशॉप विकसित की हैं और अपने कारोबार को विस्तार दिया है।

खास बात यह है कि नई पीढ़ी भी इस पारंपरिक हुनर से जुड़ रही है। आधुनिक डिजाइन, नए उत्पाद और बाजार की बदलती जरूरतों को समझकर युवा अब पुश्तैनी कारोबार को नए तरीके से आगे बढ़ाने में योगदान दे रहे हैं।

टेराकोटा के पारंपरिक उत्पादों के साथ अब ज्वेलरी, होम डेकोरेशन और गिफ्ट आइटम जैसे उत्पाद भी तैयार किए जा रहे हैं। इससे मिट्टी के इस पारंपरिक शिल्प को आधुनिक बाजार से जोड़ने की संभावनाएं बढ़ी हैं।

यूपीआईटीएस से निर्यात को मिल सकता है नया बाजार

गोरखपुर के टेराकोटा के लिए यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो केवल उत्पादों की प्रदर्शनी का मंच नहीं है, बल्कि संभावित व्यापारिक साझेदारों और खरीदारों तक पहुंच बनाने का अवसर भी है। चार स्टॉल के जरिए स्थानीय शिल्पकार अपने उत्पादों को व्यापक बाजार के सामने रखेंगे।

यदि इस मंच से निर्यातकों और अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के साथ व्यावसायिक संबंध विकसित होते हैं, तो इसका लाभ गोरखपुर के टेराकोटा से जुड़े शिल्पकारों और कारोबारियों को आगे भी मिल सकता है। इस तरह सदियों पुराने मिट्टी के शिल्प को आधुनिक बाजार और वैश्विक कारोबार से जोड़ने की दिशा में यह आयोजन महत्वपूर्ण कड़ी बन सकता है।

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