UP Women Empowerment लखनऊ : केंद्र में वर्ष 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार बनने और 2017 में उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में सरकार के गठन के बाद राज्य में विकास की नई दिशा देखने को मिली है. प्रदेश में बदली सरकार का सबसे अधिक लाभ महिलाओं को मिला है. सुरक्षा, सम्मान, स्वास्थ्य, शिक्षा और आर्थिक आत्मनिर्भरता के क्षेत्र में केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं ने महिलाओं के जीवन में व्यापक परिवर्तन किया है .
UP Women Empowerment:महिलाओं के लिए बेहतर हुआ माहौल
उत्तर प्रदेश में आज महिलाओं के लिए सुरक्षा और अवसरों का वातावरण पहले की तुलना में अधिक मजबूत माना जा रहा है. उज्ज्वला योजना, मिशन शक्ति, कन्या सुमंगला योजना, स्वयं सहायता समूह और लखपति दीदी अभियान जैसी योजनाओं ने महिलाओं को सामाजिक और आर्थिक रूप से सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है.
सरकार का दावा है कि इन योजनाओं के माध्यम से महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने के नए अवसर मिले हैं और वे परिवार के साथ-साथ समाज और अर्थव्यवस्था में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं.
महिला सुरक्षा बनी सर्वोच्च प्राथमिकता
योगी सरकार ने सत्ता संभालने के बाद महिला सुरक्षा को प्राथमिकता के केंद्र में रखा. प्रदेश में एंटी रोमियो स्क्वॉड का गठन किया गया, महिला हेल्पलाइन 1090 को मजबूत किया गया और सभी थानों में महिला हेल्प डेस्क स्थापित की गई.
इसके अलावा मिशन शक्ति अभियान के जरिए महिलाओं को उनके अधिकारों और सुरक्षा संबंधी प्रावधानों के प्रति जागरूक किया गया. पुलिस भर्ती में महिलाओं को 20 प्रतिशत आरक्षण दिए जाने से महिला पुलिसकर्मियों की संख्या में भारी संख्या में वृद्धि हुई है.
वर्ष 2017 में जहां महिला पुलिसकर्मियों की संख्या लगभग 10 हजार थी, वहीं अब यह बढ़कर 44 हजार से अधिक हो चुकी है. पिंक पेट्रोलिंग और महिला बीट पुलिसिंग जैसी व्यवस्थाओं ने भी महिलाओं में सुरक्षा का विश्वास बढ़ाया है.
उज्ज्वला योजना ने बदली ग्रामीण महिलाओं की जिंदगी
प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना को महिला सशक्तीकरण की सबसे प्रभावी योजनाओं में शामिल किया जाता है. उत्तर प्रदेश इस योजना का सबसे बड़ा लाभार्थी राज्य रहा है.
प्रदेश में लगभग 1.86 करोड़ परिवारों को मुफ्त गैस कनेक्शन उपलब्ध कराए गए हैं. इससे ग्रामीण महिलाओं को लकड़ी और उपलों के धुएं से होने वाली आंखों और फेफड़ों की बीमारियों से राहत मिली है.
साथ ही खाना बनाने में लगने वाला समय कम हुआ है, जिससे महिलाएं अन्य आर्थिक और सामाजिक गतिविधियों में भी भागीदारी कर पा रही हैं.
कन्या सुमंगला योजना बनी बेटियों का सहारा
बेटियों के जन्म से लेकर उनकी शिक्षा तक आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना शुरू की गई.
इस योजना के तहत अब तक 27.37 लाख से अधिक बालिकाओं को लाभ दिया जा चुका है. विभिन्न चरणों में कुल 25 हजार रुपये की सहायता प्रदान की जाती है.
योजना का उद्देश्य बालिका शिक्षा को प्रोत्साहित करना, कन्या भ्रूण हत्या जैसी सामाजिक बुराइयों पर रोक लगाना और बेटियों के भविष्य को सुरक्षित बनाना है.
स्वयं सहायता समूहों से बढ़ी आर्थिक ताकत
महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) एक बड़ा माध्यम बनकर उभरे हैं. प्रदेश में करीब एक करोड़ महिलाओं को इन समूहों से जोड़ा गया है.
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत गठित इन समूहों ने महिलाओं को बैंकिंग सेवाओं, ऋण और स्वरोजगार से जोड़ा है. आज लाखों महिलाएं डेयरी, हस्तशिल्प, खाद्य प्रसंस्करण, सिलाई-कढ़ाई और अन्य छोटे उद्योगों के माध्यम से आय अर्जित कर रही हैं.
इन समूहों ने ग्रामीण महिलाओं में नेतृत्व क्षमता और आत्मविश्वास को भी बढ़ाया है.
लखपति दीदी अभियान से बढ़ी उद्यमिता
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल ‘लखपति दीदी’ अभियान को उत्तर प्रदेश में व्यापक स्तर पर लागू किया गया है. इसका लक्ष्य स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं की वार्षिक आय एक लाख रुपये या उससे अधिक तक पहुंचाना है.
सरकार की ओर से महिलाओं को कौशल विकास, प्रशिक्षण, विपणन और वित्तीय सहायता प्रदान की जा रही है. इसके परिणामस्वरूप बड़ी संख्या में महिलाएं स्वरोजगार करके समाज में अपनी बड़ी जगह बना रही हैं. कई महिलाएं तो उद्यमी के रूप में भी सामने आई हैं.
प्रदेश में अब तक 18.55 लाख महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं, जो अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन रही हैं.
मिशन शक्ति बना जनजागरण का अभियान
मिशन शक्ति केवल सरकारी कार्यक्रम तक सीमित नहीं रहा, बल्कि महिला जागरूकता और सशक्तीकरण का एक व्यापक सामाजिक आंदोलन बन गया है.
स्कूलों, कॉलेजों, ग्राम पंचायतों और शहरी क्षेत्रों में आयोजित कार्यक्रमों के माध्यम से महिलाओं को उनके अधिकारों, कानूनी सहायता और सरकारी योजनाओं की जानकारी दी जा रही है. इससे महिलाओं में आत्मविश्वास और जागरूकता दोनों बढ़ी हैं.
महिलाओं के खिलाफ गंभीर अपराधों में कमी का दावा
सरकार का कहना है कि महिला सुरक्षा को लेकर किए गए प्रयासों का असर अपराध के आंकड़ों में भी दिखाई दे रहा है.
एनसीआरबी के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2016 में उत्तर प्रदेश में दहेज उत्पीड़न और दहेज हत्या के मामलों की दर प्रति लाख महिलाओं पर 2.4 थी, जो 2024 में घटकर 1.8 रह गई है.
इसी तरह महिलाओं के अपहरण के मामले 2016 के 13,014 से घटकर 2024 में 7,919 रह गए हैं. वहीं रेप की दर 4.6 से घटकर 2.8 होने का दावा किया गया है.
सुरक्षा के साथ शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार पर भी फोकस
महिला कल्याण के क्षेत्र में अब केवल सुरक्षा ही नहीं, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य और आर्थिक सशक्तीकरण को भी समान महत्व दिया जा रहा है.
सरकार की विभिन्न योजनाओं का उद्देश्य महिलाओं को लाभार्थी के बजाय विकास प्रक्रिया का सक्रिय भागीदार बनाना है. इसी सोच के तहत रोजगार, स्वरोजगार और कौशल विकास से जुड़ी योजनाओं को लगातार विस्तार दिया गया है.
बदल रही है उत्तर प्रदेश की नारी शक्ति की पहचान
पिछले नौ वर्षों में उत्तर प्रदेश में महिलाओं की स्थिति में व्यापक बदलाव देखने को मिला है. सुरक्षा के बेहतर माहौल, शिक्षा और रोजगार के अवसरों तथा आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में किए गए प्रयासों ने महिलाओं को नई पहचान दी है.
आज प्रदेश की महिलाएं केवल योजनाओं की लाभार्थी नहीं, बल्कि राज्य के विकास की अग्रणी शक्ति के रूप में उभर रही हैं. यही बदलाव उत्तर प्रदेश के महिला सशक्तीकरण मॉडल की सबसे बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है.

