Thursday, February 26, 2026

सार्वजनिक शौचालयों में तेजाब के इस्तेमाल पर सख्त महिला आयोग, जिम्मेदार MCD अफसरों पर FIR करने के दिये निर्देश

दिल्ली :दिल्ली महिला आयोग ने सार्वजनिक शौचालयों में तेजाब (MCD ACID) के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए दिल्ली नगर निगम के अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज करने के निर्देश दिये हैं. इस संबंध में नगर निगम आयुक्त (MCD ACID) को भी नोटिस जारी किया गया है.

छापेमारी के दौरान बरामद हुआ 50 लीटर तेजाब

दिल्ली महिला आयोग ने इसी महीने की 6 अप्रैल को दरियागंज में जीबी पंत अस्पताल के गेट नंबर 8 के सामने एक एमसीडी महिला शौचालय का निरीक्षण किया और शौचालय के अंदर खुले में एसिड (ACID) से भरा 50 लीटर का डिब्बा पाया.  इसके बाद ही दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाती मालीवाल ने एमसीडी के अधिकारियों के खिलाफ केस रजिस्टर करने के निर्देश दिये.

MCD ने तेजाब से सफाई के लिए किया था अनुबंध

दिल्ली महिला आयोग ने केस रजिस्टर करने के निर्देश से देने से पहले इस मामले को लेकर नगर निगम के अधिकारियों को तलब किया और पूछताछ की. पूछे जाने पर अधिकारियों ने बताया है कि नगर निगम (MCD)  ने 2017 में 40 शौचालय परिसरों के रखरखाव और संचालन के लिए एक एजेंसी के साथ अनुबंध किया गया था. नगर निगम ने एजेंसी को निर्देश दिया था कि वह हर हफ्ते तेजाब से शौचालय की सफाई करे, नहीं तो 1000 रुपये जुर्माना लगेगा

नगर निगम आयुक्त को भी महिला आयोग ने नोटिस भेजा

दिल्ली महिला आयोग ने दिल्ली नगर निगम के सार्वजनिक शौचालयों में तेजाब के इस्तेमाल को लेकर नगर निगम आयुक्त को नोटिस जारी किया है. आयोग ने इसी महीने के 6 अप्रैल को दरियागंज में जीबी पंत अस्पताल के गेट नंबर 8 के सामने एक एमसीडी महिला शौचालय का निरीक्षण किया और शौचालय के अंदर खुले में एसिड से भरा 50 लीटर का डिब्बा मिला. पूछताछ करने पर आयोग को सफाई कर्मचारी के साथ-साथ श्री राम ग्रामीण विकास संस्थान (जिसे एमसीडी द्वारा शौचालय परिसर के रखरखाव और संचालन के लिए अनुबंध दिया गया है) के एक कर्मचारी द्वारा सूचित किया गया था कि वे हर महीने शौचालयों को साफ करने के लिए एसिड खरीदते हैं.

खुले में तेजाब रखना, खरीदना और बेचना अवैध

आयोग नगर निगम के शौचालय में इतनी बड़ी मात्रा में खुले में तेजाब पाकर हैरान रह गया. यह गैरकानूनी और बेहद खतरनाक है क्योंकि कोई भी इस तेज़ाब  को हासिल कर सकता था और एसिड हमले के लिए इसका इस्तेमाल कर सकता था. आयोग ने तुरंत तेजाब को दिल्ली पुलिस द्वारा जब्त करवाया और नगर निगम के अधिकारियों से शौचालयों में तेजाब की मौजूदगी के बारे में स्पष्टीकरण मांगते हुए समन जारी किये.

अधिकारियों ने MCD द्वारा स्पष्ट निर्देश ना होने का दिया हवाला

सिटी ज़ोन के वरिष्ठ अधिकारी आयोग के समक्ष उपस्थित हुए और लिखित उत्तर में बताया कि सार्वजनिक शौचालयों की सफाई के लिए तेज़ाब के उपयोग को रोकने के लिए नगर निगम द्वारा कोई दिशानिर्देश जारी नहीं किया गया है. उन्होंने यह भी बताया कि शौचालयों की सफाई नगर निगम और एजेंसी के बीच अनुबंध के आधार पर लगाए गए नियमों और शर्तों के अनुसार एजेंसी द्वारा की जाती है. इसके अलावा, उन्होंने शौचालय के रखरखाव और संचालन के लिए नगर निगम और एजेंसी (श्री राम ग्रामीण विकास संस्थान) के बीच अनुबंध समझौते की एक प्रति भी आयोग को सौंपा .

एसिड इस्तेमाल ना करने पर 1000 रुपये का जुर्माना

अनुबंध समझौते को देखने पर आयोग ने पाया कि उस पर 17.07.2017 को हस्ताक्षर किए गए थे और 40 शौचालय परिसरों का रखरखाव एजेंसी को सौंपा गया था. नगर निगम द्वारा आयोग को दिए गए जवाब में अनुबंध समझौते (एमसीडी और एजेंसी के बीच) के नियम और शर्तों के नियम 36 की ओर इशारा किया गया है, जिसमें स्पष्ट रूप से कहा गया है कि अगर एजेंसी द्वारा साप्ताहिक रूप से शौचालयों की सफाई के लिए एसिड का उपयोग नहीं किया जाता है, तो नगर निगम द्वारा एजेंसी पर प्रति दिन 1000 रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा.

अधिकारियों ने मौखिक रूप से आयोग को सूचित किया कि नगर निगम ने शौचालयों के संचालन और रखरखाव के लिए निजी एजेंसियों के साथ जिन अनुबंध समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं, उनमें से अधिकांश उसी प्रारूप का पालन करते हैं, जैसा की दिए गए अनुबंध समझौते का है.

खुले में एसिड के प्रयोग पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई है पाबंदी

महिला आयोग की तरफ से कहा गया कि नगर निगम ने जिस तरह से शौचालयों का सफाई के लिए एसिड के प्रयोग को अनुमति दी है, वो देश में एसिड के उपयोग पर भारत के माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा जारी निर्देशों का उल्लंघन है. नगर निगम ने एजेंसी पर ऐसी अवैध शर्तें थोपकर एजेंसी को गैरकानूनी काम करने के लिए प्रोत्साहित किया है और दिल्ली में महिलाओं और लड़कियों की जान जोखिम में डाली है. इस संबंध में आयोग ने नगर निगम आयुक्त को नोटिस जारी कर मामले में स्पष्टीकरण भी मांगा है.

दिल्ली महिला आयोग ने नगर निगम के उन शौचालयों का ब्योरा मांगा है, जिसमें संचालन और रखरखाव करने वाली एजेंसियों को शौचालयों की सफाई के लिए तेजाब का इस्तेमाल करने का निर्देश दिया गया है, साथ ही उनसे सम्बंधित अनुबंध के दस्तावेज भी मांगे हैं. आयोग ने उन अधिकारियों का विवरण भी मांगा है जो शौचालयों को साफ करने के लिए तेजाब का उपयोग करने के लिए एजेंसियों को निर्देश देने के इस अवैध कार्य के लिए जिम्मेदार हैं, साथ ही उनके खिलाफ की गई कार्रवाई के बारे में भी जानकारी मांगी है. आयोग ने यह भी पूछा है कि क्या उनके खिलाफ आईपीसी की धारा 188 के तहत एफआईआर दर्ज की गई है या नहीं. इसके अलावा, आयोग ने नगर निगम द्वारा अपने शौचालयों में तेज़ाब के उपयोग को रोकने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी भी मांगी है.

दिल्ली एमसीडी ने किया सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन

दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल ने कहा, “यह बहुत चौंकाने वाला मामला है. नगर निगम खुद अपने शौचालयों में तेजाब के इस्तेमाल को बढ़ावा दे रही है. माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने तेज़ाब के उपयोग, बिक्री और भंडारण के खिलाफ कड़े निर्देश जारी किए हैं लेकिन एमसीडी तेजाब के इस्तेमाल को रोकने के बजाय जानबूझकर अपनी एजेंसियों को शौचालय की सफाई के लिए तेजाब का इस्तेमाल करने को कह रही है जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है.

शौचालयों मे एसिड के प्रयोग पर पाबंदी की मांग

स्वाती मालीवाल ने कहा कि उक्त समझौते के नियमों और शर्तों में संशोधन किया जाना चाहिए और इस खंड को वापस लिया जाना चाहिए. नगर निगम को इस तरह के निर्देश जारी करने में शामिल अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवानी चाहिए. इसके अलावा, नगर निगम को शौचालयों की सफाई के लिए तेज़ाब के उपयोग को रोकने के लिए शौचालय रखरखाव एजेंसियों को सख्त निर्देश जारी करना चाहिए

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