एक मंगा कलाकार की एक भयावह भविष्यवाणी ने जापान में तूफान मचा रखा है. जापान के “नए बाबा वंगा” Japanese Baba Vaenga के रूप में जाने जाने वाले रियो तात्सुकी ने भविष्यवाणी की है कि 5 जुलाई 2025 को देश में एक आपदा आएगी. यह भविष्यवाणी उनकी 2021 में आई किताब मंगा द फ्यूचर आई सॉ में लिखी गई है. हालांकि इसमें कोई विशेष विवरण नहीं दिया गया है, लेकिन नानकाई गर्त में महाभूकंप के बढ़ते खतरे के बीच लोगों का डर भी बढ़ता जा रहा है.
सरकार ने की नानकाई गर्त में बचाव की तैयारी
जापान में ‘महाभूकंप’ की आशंका बढ़ने के साथ ही जापानी सरकार ने कहा है कि उसे संभावित प्राकृतिक आपदा के लिए बेहतर तैयारी करने की जरूरत है. सरकार ने कहा अगर नानकाई गर्त में कोई आपदा आती है तो 300,000 लोगों की जान जा सकती है.
सरकारी पैनल की रिपोर्ट के अनुसार, जापान में अगले 30 वर्षों में नानकाई गर्त में 7 या उससे अधिक तीव्रता का भूकंप आने की आशंका है. जोखिम का स्तर जो इससे पहले 75 प्रतिशत था, अब बढ़कर 82 प्रतिशत हो गया है.
जापान की भूकंप अनुसंधान समिति के अनुसार, महाभूकंप और उसके बाद जारी की जाने वाली सुनामी की चेतावनी से 298,000 लोगों की मृत्यु हो सकती है और 2 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर तक का नुकसान हो सकता है.
जापान ने ‘तैयारी योजना’ को अपडेट किया
जापानी सरकार द्वारा जारी किए गए नए अनुमानों के साथ, टोक्यो अब यह सुनिश्चित करने की दिशा में काम कर रहा है कि महाभूकंप के लिए उसकी तैयार योजना कारगर साबित हो.
2014 में, जापान में केंद्रीय आपदा प्रबंधन परिषद ने एक तैयारी योजना जारी की थी. जिसमें कई उपायों की सिफारिश की गई थी, जिससे भूकंप के कारण होने वाली मौतों में 80 प्रतिशत की कमी आने की बात कही गई थी.
हालांकि, मौजूदा सरकार के अनुसार, नवीनतम अनुमानों को ध्यान में रखते हुए, मौजूदा तैयारियों से मौतों में केवल 20 प्रतिशत की कमी आएगी. मंगलवार को जारी की गई एक नई तैयारी योजना में तटबंधों और निकासी भवनों के निर्माण के प्रयासों में वृद्धि और प्राकृतिक आपदा की स्थिति में सार्वजनिक तत्परता में सुधार के लिए नियमित अभ्यास की बात कही गई है.
स्थानीय मीडिया ने प्रधानमंत्री शिगेरू इशिबा के हवाले से कहा, “यह आवश्यक है कि राष्ट्र, नगर पालिकाएं, कंपनियां और गैर-लाभकारी संगठन एक साथ आएं और ज्यादा से ज्यादा लोगों की जान बचाने के लिए उपाय करें.”
जापान और उसका ‘महाभूकंप’
पिछले 1,400 वर्षों में, हर 100 से 200 वर्षों में जापान में नानकाई गर्त में एक “महाभूकंप” आया है. आखिरी भूकंप 1946 में आया था और रिक्टर स्केल पर इसकी तीव्रता 8.1 और 8.4 के आसपास दर्ज की गई थी.
जापान में 2011 में समुद्र के अंदर एक महाभूकंप भी आया था, जिसकी तीव्रता रिक्टर स्केल पर 9 से 9.1 मापी गई थी. 2011 की आपदा जापान में अब तक दर्ज किया गया सबसे शक्तिशाली भूकंप भी था.
हालांकि, जब महाभूकंप की बात आती है, तो जापान नानकाई गर्त पर नज़र रखता है. नानकाई गर्त 800 किलोमीटर लम्बा समुद्र के नीचे का गड्ढा है जो जापान के प्रशांत तट के समानांतर चलता है, जहां एक टेक्टोनिक प्लेट दूसरे के नीचे धीरे-धीरे खिसकती है.
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