जयंत की दोस्ती बीजेपी उम्मीदवारों के लिए पड़ेगी महंगी? पश्चिमी यूपी में कट सकता है कई विधायकों का टिकट

UP BJP-RLD alliance : उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए पश्चिमी यूपी  ‘सियासी प्रयोगशाला’ बन सकता है .  एनडीए मे आरएलडी (RLD) प्रमुख जयंत चौधरी के आने से गठबंधन का कुनबा तो बढ़ गया है,लेकिन इसने बीजेपी के मौजूदा विधायकों और टिकट के लिए उममीद पाले उम्मीदवारों की टेंशन बढ़ा दी है. 2027 के चुनावों को लेकर सीट शेयरिंग और टिकट वितरण की चुनौती अभी से बीजेपी के सामने खड़ी होती दिखाई दे रही है.

UP BJP-RLD alliance:पश्चिमी यूपी में सीट शेयरिंग का पेंच

जयंत चौधरी अब आधिकारिक तौर पर बीजेपी के साथ हैं और 2027 का चुनाव मिलकर लड़ने की योजना है. हालांकि, सीट शेयरिंग का फॉर्मूला सुलझाना आसान नहीं लग रहा है. 2022 में समाजवादी पार्टी के साथ रहते हुए आरएलडी ने 33 सीटों पर चुनाव लड़ा था. अब पाला बदलने के बाद भी आरएलडी अपनी दावेदारी कम करने के मूड में नहीं दिख रही है.

आरएलडी की 35 सीटों की डिमांड

पार्टी के अंदरूनी सूत्रों और बड़े नेताओं का कहना है कि 2024 के लोकसभा चुनाव में भले ही पार्टी 2 सीटों पर मान गई थी, लेकिन 2027 के विधानसभा चुनाव  में 35 से कम सीटों पर समझौता नहीं होगा. आरएलडी इसके लिए 2002 के फॉर्मूले का हवाला दे रही है, जब उसने बीजेपी के साथ गठबंधन में 38 सीटों पर चुनाव लड़ा था और 14 सीटों पर जीत दर्ज की थी.

एक दर्जन से ज्यादा विधायकों की सीट पर संकट

जयंत चौधरी से दोस्ती बनाए रखने के लिए बीजेपी को अपने एक दर्जन से ज्यादा सिटिंग विधायकों की सीटें गंवानी पड़ सकती हैं. फिलहाल आरएलडी के पास 9 विधायक हैं (8 चुनाव में जीते और 1 उपचुनाव में), लेकिन आरएलडी की नजर अब उन सीटों पर भी है जहाँ वर्तमान में बीजेपी का कब्जा है. आरएलडी ने शामली, मुजफ्फरनगर, बागपत और मेरठ जैसे जिलों में अपनी पसंद की सीटों की फेहरिस्त तैयार कर ली है.

किन सीटों पर मंडरा रहा है खतरा?

पश्चिमी यूपी की सियासत में आरएलडी एक बड़ा फैक्टर है. केसी त्यागी के आरएलडी में आने के बाद किठौर, हस्तिनापुर और मुरादनगर जैसी सीटों पर बीजेपी के लिए संकट गहरा गया है. सूत्र बता रहे हैं कि गाजियाबाद की लोनी सीट, जहाँ से बीजेपी के नंद किशोर विधायक हैं, यहां भी आरएलडी अपने उम्मीदवार उतारने की तैयारी मं है. 2022 में आरएलडी यहाँ बहुत मामूली अंतर से हारी थी, इसलिए वह इस बार यह सीट हर हाल में लेना चाहती है.

बीजेपी के लिए संतुलन बनाना बड़ी चुनौती

जानकारों का मानना है कि पिछले ढाई दशकों में यूपी की राजनीति काफी बदली है. आरएलडी को उसकी मनचाही सीटें देना बीजेपी के लिए मुश्किल हो सकता है, क्योंकि इससे अन्य सहयोगी दल भी ज्यादा सीटों की मांग करेंगे. अनुमान है कि बीजेपी 15 से 18 सीटें ही ऑफर कर सकती है. अब देखना यह है कि क्या जयंत चौधरी इतने कम पर मानेंगे या बीजेपी को अपने विधायकों की बलि देनी पड़ेगी ?

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