Khamenei’s Funeral:मौत के हफ्तों बाद भी दफनाए नहीं गए हैं खामेनेई ! शव को विदाई देने में क्यों हिचक रहा है ईरान?

Khamenei’s Funeral : ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई (Ayatollah Ali Khamenei) की मौत को कई हफ्ते बीत चुके हैं, लेकिन अब तक उन्हें अंतिम विदाई नहीं दी गई है. इजरायल और अमेरिका के संयुक्त हवाई हमलों में मारे गए 86 वर्षीय खामेनेई के शरीर को दफनाने को लेकर ईरानी अधिकारियों में भारी असमंजस की स्थिति बनी हुई है. न्यूयॉर्क पोस्ट की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, इस देरी के पीछे सुरक्षा से जुड़े गंभीर कारण और लॉजिस्टिक चुनौतियां मुख्य वजह बनकर उभरी हैं.

Khamenei’s Funeral:इजरायली हमले का डर और सुरक्षा की चुनौतियां

ईरानी शासन को सबसे बड़ा डर इस बात का है कि यदि खामेनेई के लिए किसी बड़े सार्वजनिक आयोजन या स्टेट फ्यूनरल की घोषणा की गई, तो वह इजरायल के लिए एक आसान निशाना बन सकता है. शासन के भीतर यह चिंता घर कर गई है कि बड़ी जनसभा के दौरान इजरायल फिर से हवाई हमला कर सकता है. अधिकारियों का मानना है कि मौजूदा युद्ध के हालात में लाखों की भीड़ को सुरक्षा देना लगभग असंभव है.

शासन की कमजोरी और आंतरिक असंतोष

फाउंडेशन फॉर डिफेंस ऑफ डेमोक्रेसीज के विशेषज्ञ बेहनम तालेब्लू का मानना है कि देरी की एक बड़ी वजह सरकार का डर और उसकी कमजोरी है. उनके अनुसार, तेहरान इस समय इतना असुरक्षित महसूस कर रहा है कि वह किसी भी तरह का जोखिम लेने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा है. सरकार को न केवल बाहरी हमले का डर है, बल्कि उसे यह भी चिंता है कि सार्वजनिक शोक सभाएं कहीं सरकार विरोधी प्रदर्शनों और आंतरिक अशांति में न बदल जाएं.

साल 1989 जैसी स्थिति न बन पाना

जब 1989 में आयतुल्ला रूहोल्लाह खुमैनी का निधन हुआ था, तब तेहरान की सड़कों पर लाखों की भीड़ उमड़ी थी और एक ऐतिहासिक स्टेट फ्यूनरल हुआ था. हालांकि, खामेनेई की मौत के बाद वैसी जनभागीदारी और शोक की लहर गायब नजर आ रही है. विशेषज्ञों का कहना है कि सूचनाओं पर कड़े नियंत्रण और लगातार जारी हवाई हमलों के कारण आम जनता के बीच शोक जताने की स्थिति नहीं बन पा रही है, जो शासन के लिए एक मनोवैज्ञानिक हार जैसा है.

मशहद में अंतिम संस्कार की तैयारी और टलती तारीखें

ताजा रिपोर्ट्स के मुताबिक, अब अधिकारी तेहरान के बजाय मशहद शहर को अंतिम विदाई के लिए संभावित जगह मान रहे हैं. माना जा रहा है कि सुरक्षा के लिहाज से मशहद में व्यवस्था करना आसान होगा. गौरतलब है कि पहले 4 मार्च से तीन दिवसीय राजकीय शोक और अंतिम संस्कार की योजना बनाई गई थी, जिसे इजरायली हमलों के तेज होने के बाद रद्द कर दिया गया. अब तक नई तारीख का एलान न होना ईरान के भीतर मची भारी उथल-पुथल की ओर इशारा करता है.

Latest news

Related news