विपक्ष ने आरोप लगाया है कि स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के दौरान वोटर रोल में गलतियों और गड़बड़ियों को बताने के लिए इस्तेमाल किए गए सॉफ्टवेयर में ट्रांसपेरेंसी की कमी ने इलेक्शन कमीशन Election Commission के लिए कई सवाल खड़े किए हैं और पूरी प्रक्रिया पर लोगों का भरोसा कम किया है.
कांग्रेस जनरल सेक्रेटरी जयराम रमेश ने रविवार को आरोप लगाया कि पोल बॉडी का ECINET सॉफ्टवेयर की डिटेल्स शेयर करने से मना करना “बड़े पैमाने पर हुए सेंट्रलाइज़्ड मैनिपुलेशन की असलियत दिखाता है”. पार्टी लीडर पवन खेड़ा ने चीफ इलेक्शन कमिश्नर (CEC) ज्ञानेश कुमार पर चुनावी प्रोसेस में “ट्रांसपेरेंसी रोकने” का आरोप लगाया.
तृणमूल कांग्रेस (TMC) की नेता और राज्यसभा MP मेनका गुरुस्वामी ने जानना चाहा कि पोल बॉडी क्या “छिपा रही है”.
RTI के जवाब में SIR सॉफ्टवेयर की जानकारी देने से EC का इनकार
तीनों विपक्षी नेताओं ने यह बात हिंदुस्तान टाइम्स की उस रिपोर्ट का ज़िक्र करते हुए कही, जिसमें कहा गया था कि EC ने SIR एक्सरसाइज़ के दौरान वोटर रोल में गलतियों और गड़बड़ियों की पहचान करने के लिए इस्तेमाल किए गए सॉफ्टवेयर का नाम और वर्शन बताने से मना कर दिया है. पोल बॉडी ने दावा किया है कि यह जानकारी “कमर्शियल कॉन्फिडेंस, ट्रेड सीक्रेट्स और इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी” से जुड़ी है और राइट टू इन्फॉर्मेशन (RTI) एक्ट के तहत छूट वाली है.
हलांकि हिंदुस्तान टाइम्स ने ये भी साफ किया है कि उसकी रिपोर्ट को फाइल करते समय EC और BJP की तरफ से तुरंत कोई रिएक्शन
नहीं आया, लेकिन दोनों ने पहले इलेक्टोरल रोल में बदलाव में किसी भी तरह की गड़बड़ी से इनकार किया है.
जयराम रमेश ने उठाए Election Commission के फैसले पर सवाल
रमेश ने X पर HT रिपोर्ट शेयर करते हुए कहा, “इलेक्शन कमीशन ऑफ़ इंडिया विवादित ECINET सॉफ्टवेयर के बारे में जानकारी छिपा रहा है, जो इस खतरनाक SIR के केंद्र में है, जिसका इस्तेमाल इलेक्टोरल रोल में सेंट्रलाइज़्ड हेराफेरी के लिए किया गया है. आज, एक बड़े नेशनल डेली ने बताया कि ECI ने राइट टू इन्फॉर्मेशन (RTI) एप्लीकेशन के जवाब में SIR में इस्तेमाल हो रहे सॉफ्टवेयर के बारे में जानकारी देने से मना कर दिया है. हल्के बहाने बनाते हुए, ECI ने SIR में इस्तेमाल हो रहे सॉफ्टवेयर का नाम बताने से मना कर दिया है, या यह कन्फर्म करने से मना कर दिया है कि क्या AI का इस्तेमाल हो रहा है और क्या सेफगार्ड्स हैं.”
The Election Commission of India continues to hide information about the controversial ECINET software at the heart of the disastrous SIR, that has been used to centralise manipulation of the electoral rolls. Today, a leading national daily revealed that the ECI has refused to provide information on the software being used in the SIR in its response to a Right to Information (RTI) application. Using flimsy excuses, the ECI has refused to name the software being used in the SIR, or confirm whether AI is being used and what safeguards are in place. The lack of transparency around the ECINET software and the use of AI has damaged the credibility of the entire process among citizens. The ECI is repeatedly refusing to provide this information because it will reveal the reality of the massive, centralised manipulation that has taken place. •Why did Indians find out from disclosures of Tata Consultancy Services (TCS) that they developed the ECINET software? Why has this not been transparently disclosed by the ECI? •Why has the ECI repeatedly denied the use of AI in the SIR and electoral roll revision, when it is clearly being used? The ECINET software and the IT Division of the ECI were the focus of several objections raised by Election Commissioners Sukhbir Singh Sandhu and Vivek Joshi. The complaints even reached the Department of Personnel and Training (DoPT), which comes under the Prime Minister himself. The public knows that massive manipulation has taken place. Gyanesh Kumar must go. The SIR must be suspended forthwith.
— Jairam Ramesh (@Jairam_Ramesh) October 25, 2026
ECI जानकारी नहीं दे रहा है क्योंकि इससे असलियत सामने आ जाएगी- जयराम रमेश
कांग्रेस नेता ने कहा, “ECINET सॉफ्टवेयर और AI के इस्तेमाल में ट्रांसपेरेंसी की कमी ने लोगों के बीच पूरे प्रोसेस के भरोसे को नुकसान पहुंचाया है.” उन्होंने आगे कहा, “ECI बार-बार यह जानकारी देने से मना कर रहा है क्योंकि इससे बड़े पैमाने पर हुए सेंट्रलाइज़्ड मैनिपुलेशन की असलियत सामने आ जाएगी.”
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि पोल बॉडी ने यह पब्लिक में क्यों नहीं बताया कि सॉफ्टवेयर टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज़ (TCS) ने बनाया था, जिसके बारे में उन्होंने दावा किया कि यह कंपनी के खुलासे से पता चला. “ECI ने SIR और इलेक्टोरल रोल रिवीजन में AI के इस्तेमाल से बार-बार इनकार क्यों किया है, जबकि इसका साफ तौर पर इस्तेमाल हो रहा है?”
उन्होंने कहा, “ECINET सॉफ्टवेयर और ECI के IT डिवीज़न पर इलेक्शन कमिश्नर सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने कई आपत्तियां उठाई थीं. शिकायतें डिपार्टमेंट ऑफ़ पर्सनल एंड ट्रेनिंग (DoPT) तक भी पहुंचीं, जो खुद प्रधानमंत्री के अंडर आता है. जनता जानती है कि बड़े पैमाने पर हेरफेर हुआ है. ज्ञानेश कुमार को जाना चाहिए. SIR को तुरंत सस्पेंड किया जाना चाहिए.”
Why is Gyanesh Kumar Gupta blocking transparency in the electoral process as though it were evidence from a crime scene and he were the criminal? Is it because he is a criminal of the highest order who has subverted democracy and committed treason, and now cannot afford to let the truth come out? But oh wait, the truth has already come out. And there is no way for Gyanesh Babu to hide his deeds and escape their consequences now.
— Pawan Khera 🇮🇳 ಪವನ್ ಖೇರಾ (@Pawankhera) October 25, 2026
वहीं कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने इस मुद्दे पर CEC कुमार पर भी निशाना साधा. उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा, “ज्ञानेश कुमार गुप्ता चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता को ऐसे क्यों रोक रहे हैं जैसे कि यह किसी क्राइम सीन से सबूत हो और वह खुद अपराधी हों?”
उन्होंने आरोप लगाया कि CEC ने लोकतंत्र को खत्म कर दिया है और कहा कि सच्चाई को अब और नहीं छिपाया जा सकता.
“बहुत ही मज़ेदार! ECI क्या छिपा रहा है???”- टीएमसी
तृणमूल कांग्रेस (TMC) की नेता और राज्यसभा MP मेनका गुरुस्वामी ने भी रिपोर्ट को लेकर चुनाव आयोग की आलोचना की. उन्होंने X पर लिखा, “बहुत ही मज़ेदार! ECI क्या छिपा रहा है???”
RTI में क्या पूछा गया था और चुनाव आयोग ने क्या जवाब दिया
हिंदुस्तान टाइम्स ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि, EC ने यह भी कहा कि “SIR एक्सरसाइज़ के लिए कोई नया सॉफ्टवेयर डेवलप या खरीदा नहीं गया है”, और इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर (ERO) किसी इलेक्टर को शामिल करने या बाहर करने का फैसला “फैक्ट्स और रिकॉर्ड के आधार पर” करते हैं.
16 अक्टूबर का यह जवाब तेलंगाना के करीमनगर में रहने वाले सोशल एक्टिविस्ट एमए मुजीब अय्यूब की RTI एप्लीकेशन के जवाब में आया है.
अय्यूब ने वोटर डेटा में गलतियों या गड़बड़ियों का पता लगाने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले सॉफ्टवेयर, एप्लीकेशन या AI प्लेटफॉर्म का नाम और वर्जन मांगा था; क्या ऐसा सिस्टम वेरिफिकेशन, सुधार या डिलीट करने के लिए रिकॉर्ड को ऑटोमैटिकली फ्लैग करता है, और उसके बाद क्या वर्कफ़्लो होता है; क्या किसी भी स्टेज पर AI, मशीन लर्निंग, प्रेडिक्टिव एनालिटिक्स या ऑटोमेटेड डिसीजन सपोर्ट टूल्स का इस्तेमाल किया गया था; असली वोटरों के गलत पॉजिटिव और गलत तरीके से फ्लैग करने के खिलाफ सुरक्षा उपाय; और वह अथॉरिटी जो वोटर के रिकॉर्ड पर कार्रवाई करने से पहले फ्लैग की गई गड़बड़ियों को रिव्यू या अप्रूव करती है.
अय्यूब के पहले सवाल के जवाब में, ECI ने RTI एक्ट के सेक्शन 8(1)(d) का इस्तेमाल किया, जो कमर्शियल कॉन्फिडेंस, ट्रेड सीक्रेट्स या इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी से जुड़ी जानकारी को छूट देता है, जिसके खुलासे से किसी तीसरे पक्ष की कॉम्पिटिटिव पोजीशन को नुकसान हो सकता है.
ऑटोमैटिक फ्लैगिंग, AI या ML के इस्तेमाल और गलत फ्लैगिंग के खिलाफ सुरक्षा उपायों से जुड़े सवालों के बारे में, कमीशन ने कहा कि मांगी गई जानकारी एक “क्लैरिफिकेशन” थी जो एक्ट के सेक्शन 2(f) के तहत “जानकारी” की परिभाषा में नहीं आती है.

