Bihar Caste Census Report पर उपेंद्र कुशवाहा ने उठाया सवाल,कहा-रिपोर्ट में सब कुछ ठीक नहीं

नई दिल्ली :  बिहार सरकार ने आज गांधी जयंति के मौके पर बिहार में समाजिक सरोकारों को रेखांकित करते हुए राज्य में हुए जाति आधारित जनगणना / सर्वे की रिपोर्ट जारी कर दी है, जिसमें बताया गया है कि राज्य में पिछड़ों अति पिछड़ों की जनसंख्या कुल मिलाकर 63 प्रतिशत से भी ज्यादा है.

 देशभर में  Caste Census जरुरी -राहुल गांधी,कांग्रेस नेता

बिहार सरकार के इस caste census report को India Alliance के साथियों से शाबाशी मिल रही है. कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इस रिपोर्ट के बहाने केंद्र सरकार को निशाने पर ले लिया और सारे देश में जातिगत जनगणना का सवाल छेड़ दिया. राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर लिखा कि “ भारत के जातिगत आंकड़े जानना ज़रूरी है. जितनी आबादी, उतना हक़ – ये हमारा प्रण है.”

उपेंद्र कुशवाहा ने Caste Census Report पर उठाये सवाल

नीतीश सरकार का दावा है कि ये सांइटिफिक आंकड़ा है जो सघन सर्वे के द्वारा  इकट्ठा किया है, लेकिन सरकार के इस दावे पर राष्ट्रीय लोक जनता दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष उपेन्द्र कुशवाहा ने सवाल खड़े कर दिये हैं. सरकार द्वारा  आंकड़े की रिपोर्ट जारी होने के बाद उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि “जब से डेटा जारी हुआ है तब से लोग कह रहे हैं कि ये डेटा जारी हो गया है लेकिन किसी ने उनसे या उनके परिवार से उनकी जाति के बारे में नहीं पूछा. कुशवाहा ने जाति आधारित जनगणना रिपोर्ट की सटीकता पर सवाल उठाते हुए कहा कि “यह ऐसा पहला मामला नहीं है, जब बीपीएल सूची की बात आई  तब कोई भी गांव या पंचायत ऐसा नहीं था, जहां का आंकड़ा सूची 100% सही हो. अधिकांश गरीबों, भूमिहीनों के नाम , बेघर लोग सूची से बाहर कर दिये गये थे. इस बार भी ये पूछा जा रहा है कि सरकार ने क्या जल्दबाजी में ऐसा किया है ?

सोशल मीडिया पर भी caste census report पर  पूछ रहे हैं सवाल

उपेंद्र कुशवाहा ने जो सवाल उठाया है उन्हीं से मिलते जुलते सवाल सोशल मीडिया पर भी पूछे जा रहे हैं. पवन शर्मा नाम के यूजर ने लिख है, “बिहार में सवर्णों की तादाद 15.52% ब्राह्मणों की आबादी 3.66 प्रतिशत है. बिहार में सवर्ण जाति की आबादी इससे ज्यादा तो 1931 में थी और यह मजाक है कि हिंदुओं की जनसंख्या चार गुना बढ़ गई और सवर्ण जाति की जनसंख्या उतनी की उतनी ही है?“

 

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