Friday, January 16, 2026

‘ऑफिस टाइम के बाद ऑफिस से कॉल नहीं’ लोकसभा में प्राइवेट मेंबर बिल पेश कर कर्मचारियों के लिए “राइट टू डिस्कनेक्ट” की रखी गई मांग

शुक्रवार को लोकसभा में एक प्राइवेट मेंबर बिल पेश किया गया, जिसमें कर्मचारियों को ऑफिस टाइम के बाद काम की कॉल और ईमेल को इग्नोर करने का कानूनी अधिकार देने की मांग की गई है. सुप्रिया सुले Supriya Sule ने इस बिल को पेश किया. इससे वर्क-लाइफ बैलेंस की बहस पर फिर से फोकस लौट आया है.

Supriya Sule ने “राइट टू डिस्कनेक्ट बिल, 2025” पेश किया

न्यूज़ एजेंसी PTI के मुताबिक, NCP MP सुप्रिया सुले ने “राइट टू डिस्कनेक्ट बिल, 2025” पेश किया, जिसमें एक एम्प्लॉई वेलफेयर अथॉरिटी बनाने का प्रस्ताव है ताकि यह पक्का किया जा सके कि वर्कर्स को ऑफिस के घंटों के बाद या छुट्टियों में ऑफिशियल बातचीत सुनने के लिए मजबूर न किया जाए.
इस कानून में हर एम्प्लॉई को काम के घंटों के बाद काम से जुड़े कॉल और ईमेल को मना करने का अधिकार देने का भी प्रस्ताव है, जिसमें सभी संबंधित मामलों के लिए प्रावधान हैं.
प्राइवेट मेंबर बिल MPs को ऐसे मुद्दे पेश करने की इजाज़त देते हैं जिनके बारे में उन्हें लगता है कि उन पर कानून बनना चाहिए, हालांकि ऐसे बिल मुश्किल से ही पास होते हैं, लेकिन सरकार के जवाब के बाद उन्हें ज़्यादातर वापस ले लिया जाता है.

पीरियड्स की छुट्टी, NEET और दूसरी चीज़ों पर भी आए प्रस्ताव

PTI की रिपोर्ट के मुताबिक, कांग्रेस MP कडियम काव्या ने पीरियड्स बेनिफिट्स बिल, 2024 पेश किया, जिसका मकसद पीरियड्स के दौरान महिला कर्मचारियों को खास सुविधाएं देने के लिए एक कानूनी ढांचा बनाना है.
LJP MP शांभवी चौधरी ने भी कामकाजी महिलाओं और छात्राओं के लिए पेड पीरियड्स की छुट्टी पक्का करने के साथ-साथ पीरियड्स में साफ़-सफ़ाई की सुविधाओं और उससे जुड़े हेल्थ बेनिफिट्स तक पहुंच पक्का करने के लिए एक बिल पेश किया.
कांग्रेस MP मणिकम टैगोर ने अंडरग्रेजुएट मेडिकल एडमिशन के लिए तमिलनाडु को NEET से छूट देने का प्रस्ताव पेश किया.
यह तमिलनाडु सरकार के सुप्रीम कोर्ट जाने के कुछ हफ़्ते बाद आया है, जब उसने राज्य के एंटी-NEET कानून को मंज़ूरी देने से राष्ट्रपति के इनकार को चुनौती दी थी.
निर्दलीय MP विशालदादा प्रकाशबापू पाटिल ने जर्नलिस्ट (हिंसा रोकथाम और सुरक्षा) बिल, 2024 पेश किया, जिसका मकसद पत्रकारों पर हमलों को रोकना और उनकी प्रॉपर्टी की सुरक्षा करना है.
भाजपा सांसद गणेश सिंह ने सर्वोच्च न्यायालय में कार्यवाही में हिंदी के उपयोग और अन्य प्रावधान विधेयक, 2024 पेश किया, जिसमें शीर्ष अदालत के कामकाज में हिंदी के व्यापक उपयोग का प्रस्ताव है.

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