Friday, July 3, 2026
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महाकुंभ में शाही स्नान का क्यों रहता है संतो को भी इंतजार,क्या है इस पवित्र स्नान का महत्व

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Mahakumbh Shahi Snan
Mahakumbh Shahi Snan

Mahakumbh Shahi Snan :  महाकुंभ का ये भव्य उत्सव 13 जनवरी से 26 फरवरी तक चलेगा. इस दौरान संगम में डुबकी लगाने के लिए वैसे तो हर तिथि शुभ है लेकिन 6 तिथियां ऐसी है जो बेहद खास हैं. इनमें 3 शाही स्नान की तिथियां हैं. महाकुंभ में पहला शाही स्नान 14 फरवरी यानी मकर संक्रांति के दिन है,वहीं दूसरा शाही स्नान 29 जनवरी को मौनी अमावस्या के दिन होगा और तीसरा और अंतिम शाही स्नान 3 फरवरी को वंसत पंचनी के दिन होगा.

Mahakumbh Shahi Snan  :  महाकुंभ में स्नान की खास तिथियां 

पहला स्नान – 13 जनवरी , पौष पूर्णिमा

दूसरा स्नान – 14 फरवरी ,मकर संक्रांति पर पहला शाही स्नान

तीसरा स्नान –  29 जनवरी को  मौनी अमावस्या पर दूसरा शाही स्नान

चौथा स्नान – 3 फरवरी को वसंत पंचमी  के मौके पर  तीसरा शाही स्नान

पांचवां स्नान – 12 फरवरी  को  माधी पूर्णिमा  के मौके पर

छठा स्नान – 26 फरवरी  को महाशिवरात्री  के मौके पर

महाकुंभ में शाही स्नान का  महत्व 

नदी के किनारे कुंभ के आयोजन में सबसे अधिक महत्व इस दौरान होने वाले स्नान का है, इस दौरान कुछ खास तिथियां होती हैं, जिसक बारे में कहा जाता है कि इस दिन पवित्र जल में स्नान करने पर विशेष फल की प्राप्ति होती है.इनमें भी शाही स्नान का दिन खास होता है. क्योंकि इस दिन के स्नान की शुरुआत नागा साधुओं, अघोड़ी बाबाओं और अन्य साधु संतों के स्नान से होती है.शाही स्नान में सबसे पहले नागा साधु संगम में स्नान करते हैं. फिर अखाड़ों के साधु संतो को स्नान का असवर मिलता है इसके बाद आम लोग स्नान कर पुण्य का लाभ उठाते हैं.शाही स्नान को बेहद खास माना जाता है क्योंकि मान्यता है कि इस दिन संगम में डुबकी लगाने से कई गुना ज्यादा पुण्य मिलता है. सनातन परंपरा में मान्यता है कि शाही स्नान के अवसर पर पवित्र संगम में डुबकी लगाने से लोग इस लोक के साथ-साथ अपना परलोक भी सुधार लेते हैं और उनके पितरों की आत्मा को भी शांति मिलती है.