Thursday, February 12, 2026

ऐसी कार्रवाई की जाए ताकि इस तरह के हमले कभी न हों…’, Farooq Abdullah का पाकिस्तान को बड़ा संदेश

जम्मू एवं कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला Farooq Abdullah ने सोमवार को कहा कि कश्मीरियों ने 1947 में दो-राष्ट्र सिद्धांत को पानी में फेंक दिया था और कहा था कि उनका क्षेत्र पाकिस्तान के साथ नहीं जाएगा.
नेशनल कांफ्रेंस के अध्यक्ष ने कहा कि वह पहले पाकिस्तान के साथ बातचीत के पक्ष में थे, लेकिन अब वह चाहते हैं कि केंद्र सरकार ऐसी कार्रवाई करे कि इस तरह के हमले फिर कभी न हों.

मैं हमेशा पाकिस्तान के साथ बातचीत का पक्षधर रहा हूं…- Farooq Abdullah

एएनआई ने अब्दुल्ला के हवाले से कहा, “मैं हमेशा पाकिस्तान के साथ बातचीत का पक्षधर रहा हूं…हम उन लोगों को क्या जवाब देंगे जिन्होंने अपने प्रियजनों को खो दिया? क्या हम न्याय कर रहे हैं? बालाकोट नहीं. आज, राष्ट्र चाहता है कि ऐसी कार्रवाई की जाए ताकि इस तरह के हमले कभी न हों.” दो राष्ट्र सिद्धांत के बारे में बात करते हुए अब्दुल्ला ने पाकिस्तान को बड़ा संदेश दिया. उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर के लोगों ने 1947 में इस सिद्धांत को खारिज कर दिया और आज भी इसे स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं हैं.

हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, हम सब एक हैं- Farooq Abdullah

अब्दुल्ला ने कहा, “हमें खेद है कि हमारा पड़ोसी आज भी यह नहीं समझता है कि उसने मानवता की हत्या की है. अगर उन्हें लगता है कि ऐसा करने से हम पाकिस्तान के साथ चले जाएंगे, तो हमें उनकी गलतफहमी दूर कर देनी चाहिए. हम 1947 में उनके साथ नहीं गए, तो आज क्यों जाएंगे? हमने उस समय दो राष्ट्र सिद्धांत को पानी में फेंक दिया था. आज, हम भी दो राष्ट्र सिद्धांत को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं हैं. हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, हम सब एक हैं. हम उन्हें करारा जवाब देंगे.”

पाकिस्तान के सेना प्रमुख ने दो-राष्ट्र सिद्धांत पर क्या कहा था

फारूक अब्दुल्ला की यह टिप्पणी घातक पहलगाम आतंकी हमले के बाद आई है जिसमें 25 भारतीयों सहित 26 लोग मारे गए थे. यह हमला पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर द्वारा दो-राष्ट्र सिद्धांत को सामने लाने के कुछ ही दिनों बाद हुआ.
16 अप्रैल, बुधवार को इस्लामाबाद में प्रवासी पाकिस्तानियों के एक सम्मेलन को संबोधित करते हुए जनरल मुनीर ने कहा कि पाकिस्तान “भारतीय कब्जे के खिलाफ संघर्ष” में कश्मीरी लोगों के साथ खड़ा रहेगा.
उन्होंने कहा, “यह हमारी गले की नस थी, यह हमारी गले की नस है, हम इसे नहीं भूलेंगे.”
उसी संबोधन में, पाकिस्तान के सेना प्रमुख ने देश के लोगों से बच्चों को कहानियाँ सुनाने का भी आह्वान किया था ताकि वे यह न भूलें कि वे “हिंदुओं से अलग हैं.”
उन्होंने पाकिस्तान के संस्थापक एम.ए. जिन्ना द्वारा प्रतिपादित द्वि-राष्ट्र सिद्धांत का हवाला देते हुए कहा, “आपको अपने बच्चों को पाकिस्तान की कहानी बतानी होगी, ताकि वे यह न भूलें कि हमारे पूर्वज हमें जीवन के हर संभव पहलू में हिंदुओं से अलग समझते थे.”

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