UK Waste Management Rules 2026 देहरादून : स्वच्छ और कचरा-मुक्त उत्तराखंड की दिशा में राज्य सरकार ने ठोस अपशिष्ट प्रबंधन व्यवस्था को और मजबूत करने की तैयारी शुरू कर दी है. ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026 के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर शहरी और ग्रामीण स्थानीय निकायों में व्यापक स्तर पर तैयारियां की जा रही हैं. राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव डॉ. पराग मधुकर धकाते ने बुधवार को सचिवालय स्थित मीडिया सेंटर में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर नए नियमों और राज्य में चल रही व्यवस्थाओं की जानकारी दी.
उन्होंने कहा कि नए नियमों का उद्देश्य केवल कचरे का निस्तारण करना नहीं, बल्कि स्रोत पर कचरा पृथक्करण, रिसाइक्लिंग, संसाधनों के दोबारा उपयोग और सर्कुलर इकोनॉमी को बढ़ावा देना है. नियमों के प्रभावी पालन से कचरा प्रबंधन में जवाबदेही और पारदर्शिता बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है.
UK Waste Management Rules 2026 : अब चार श्रेणियों में अलग होगा कचरा
डॉ. धकाते के मुताबिक वर्ष 2016 के नियमों में कचरे को तीन श्रेणियों में अलग करने का प्रावधान था. नए नियमों में इसे बढ़ाकर चार श्रेणियों में किया गया है.
इनमें शामिल हैं—
- गीला कचरा
- सूखा कचरा
- सैनिटरी कचरा
- विशेष देखभाल वाला कचरा
इस व्यवस्था का उद्देश्य कचरे को शुरुआत से ही अलग-अलग रखने और उसके अनुसार वैज्ञानिक तरीके से प्रसंस्करण एवं निस्तारण सुनिश्चित करना है.
बड़े संस्थान होंगे बल्क वेस्ट जनरेटर
नए नियमों के तहत ऐसे प्रतिष्ठानों को बल्क वेस्ट जनरेटर की श्रेणी में रखा जाएगा, जो निर्धारित मानकों में से किसी एक को पूरा करते हैं.
इसके लिए तीन प्रमुख मानक तय किए गए हैं—
- 2,000 वर्ग मीटर से अधिक क्षेत्रफल,
- प्रतिदिन 40 हजार लीटर से अधिक पानी की खपत,
- प्रतिदिन 100 किलोग्राम से अधिक ठोस कचरे का उत्पादन.
ऐसे संस्थानों के पंजीकरण के साथ-साथ उनके द्वारा उत्पन्न कचरे के प्रसंस्करण और रिसाइक्लिंग की जिम्मेदारी भी तय की गई है.
हर जिले में गठित हुआ डिस्ट्रिक्ट स्पेशल सेल
डॉ. धकाते ने बताया कि ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए प्रदेश के प्रत्येक जिले में डिस्ट्रिक्ट स्पेशल सेल गठित किए गए हैं. इन सेल के माध्यम से शहरी एवं ग्रामीण स्थानीय निकायों में कचरा प्रबंधन व्यवस्था की निगरानी की जाएगी.
खास तौर पर डंपिंग साइट और लीगेसी वेस्ट के निस्तारण पर नजर रखी जा रही है. सरकार ने राज्य में पुराने जमा कचरे यानी लीगेसी वेस्ट के निस्तारण को दिसंबर 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा है.
1,930 मीट्रिक टन कचरा रोज पैदा
प्रेस कॉन्फ्रेंस में दी गई जानकारी के अनुसार उत्तराखंड में प्रतिदिन करीब 1,930 मीट्रिक टन ठोस कचरा उत्पन्न हो रहा है. इनमें से लगभग 1,800 मीट्रिक टन कचरे का रोजाना प्रसंस्करण किया जा रहा है.
राज्य में प्लास्टिक कचरे के लिए भी अलग से प्रसंस्करण व्यवस्था विकसित की गई है. अधिकारियों का कहना है कि कचरे के वैज्ञानिक प्रबंधन के साथ रिसाइक्लिंग और संसाधनों के पुन: उपयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है.
500 वाहनों में चार कम्पार्टमेंट
चार श्रेणियों में कचरा पृथक्करण को प्रभावी बनाने के लिए लगभग 500 कचरा संग्रहण वाहनों में चार अलग-अलग कम्पार्टमेंट तैयार किए जा रहे हैं. इससे गीले, सूखे, सैनिटरी और विशेष देखभाल वाले कचरे को अलग-अलग एकत्र किया जा सकेगा.
वहीं कचरा संग्रहण वाहनों की निगरानी के लिए डिजिटल व्हीकल ट्रैकिंग सिस्टम भी लागू किया गया है. इसके जरिए यह पता लगाया जा सकेगा कि कचरा संग्रहण वाहन निर्धारित मार्ग और व्यवस्था के अनुसार काम कर रहे हैं या नहीं. इससे व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ने की उम्मीद है.
खरीदे जा रहे 657 नए वाहन
कचरा संग्रहण व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए राज्य में 657 नए वाहन खरीदे जा रहे हैं. इनमें करीब 480 ई-वाहन शामिल हैं. इससे एक ओर कचरा संग्रहण की क्षमता बढ़ेगी, वहीं दूसरी ओर पर्यावरण के अनुकूल परिवहन व्यवस्था को भी बढ़ावा मिलेगा.
राज्य में फिलहाल—
- 22 इंटीग्रेटेड सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट
- करीब 50 मैटेरियल रिकवरी फैसिलिटी
- 600 से अधिक वेस्ट कम्पोस्टर
संचालित किए जा रहे हैं.
डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन पर जोर
राज्य में वर्तमान में लगभग शत-प्रतिशत डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण किए जाने की जानकारी दी गई. अब सरकार का फोकस कचरा संग्रहण के साथ-साथ उसके सही पृथक्करण, प्रसंस्करण और वैज्ञानिक निस्तारण पर है.
अधिकारियों के मुताबिक केवल घरों से कचरा उठाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि कचरे को उसकी प्रकृति के अनुसार अलग करना और अधिकतम मात्रा में रिसाइक्लिंग एवं पुन: उपयोग सुनिश्चित करना भी जरूरी है.
आम लोगों की भागीदारी सबसे जरूरी
अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमों को सफल बनाने के लिए केवल सरकारी विभागों की कार्रवाई पर्याप्त नहीं होगी. इसके लिए नगरीय निकायों, ग्राम पंचायतों, जिला प्रशासन, राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और आम जनता को मिलकर काम करना होगा.
स्रोत पर कचरा अलग करने से लेकर उसके वैज्ञानिक निस्तारण तक नागरिकों की भूमिका महत्वपूर्ण है. सरकार का लक्ष्य कचरे को समस्या के बजाय संसाधन के रूप में इस्तेमाल करते हुए उत्तराखंड को अधिक स्वच्छ और पर्यावरण-अनुकूल राज्य बनाने की दिशा में आगे बढ़ाना है.
प्रेस कॉन्फ्रेंस में सहायक निदेशक, पीआईबी देहरादून संजीव सुन्दिरयाल और निदेशक शहरी विकास प्रवीण कुमार भी मौजूद रहे.

