Dogs Terror Uttarakhand चमोली: उत्तराखंड में अब तक आपने गुलदार और बाघ के डर से स्कूल बंद होने की खबरें सुनी होंगी, लेकिन चमोली जिले के नारायणबगड़ से सामने आया मामला बेहद अलग है. यहां आवारा और कथित तौर पर पागल कुत्तों का आतंक इतना बढ़ गया कि प्रशासन को 10 स्कूलों में चार दिन का अवकाश घोषित करना पड़ा है.
नारायणबगड़ क्षेत्र में लगातार कुत्तों के हमलों की शिकायतों और बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए इन विद्यालयों में 20 से 23 अगस्त 2026 तक छुट्टी रहेगी. इस दौरान विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसके लिए ऑनलाइन कक्षाएं संचालित करने के निर्देश दिए गए हैं.
Dogs Terror Uttarakhand:पहली बार स्कूल बंद करने की नौबत
चमोली के मुख्य शिक्षा अधिकारी आकाश सारस्वत ने नारायणबगड़ विकासखंड में सड़क के आसपास स्थित 10 विद्यालयों में अवकाश घोषित किया है. बताया गया है कि पिछले कुछ दिनों से क्षेत्र में आवारा कुत्तों के हमले बढ़े हैं और कई स्कूली बच्चों सहित आम लोगों को काटे जाने की घटनाएं सामने आई हैं.
स्थानीय लोगों के मुताबिक, कुत्तों के डर से बच्चे स्कूल जाने में भी घबरा रहे थे. अभिभावकों में भी बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई थी. इसके बाद प्रशासन ने एहतियाती कदम उठाते हुए स्कूल बंद करने का निर्णय लिया.
एक पागल कुत्ते से शुरू हुई दहशत
स्थानीय लोगों के अनुसार, नारायणबगड़ में कुत्तों की दहशत की शुरुआत मंगलवार को एक आक्रामक कुत्ते से हुई. बताया गया कि इस कुत्ते ने बाजार क्षेत्र में पांच लोगों को काट लिया. इसके अलावा उसने दूसरे कुत्तों और मवेशियों पर भी हमला किया
स्थानीय लोगों का कहना है कि हमले के बाद क्षेत्र में डर का माहौल बन गया. कई लोग सुरक्षा के लिए डंडे लेकर घर से निकलने लगे. कुछ लोगों ने कथित तौर पर दो कुत्तों को पीटकर मारने की बात भी कही है.
पशुपालन विभाग के विशेषज्ञों के मुताबिक, कुत्तों के व्यवहार में आक्रामकता बढ़ने के पीछे कई कारण हो सकते हैं. हालांकि, किसी क्षेत्र में कुत्तों के आक्रामक होने का कारण केवल एक ही वजह मानना उचित नहीं होगा
दो स्कूली छात्रों को भी काटा
कुत्तों के हमलों का असर स्कूली बच्चों पर भी पड़ा है. बुधवार को उत्तरांचल विद्या निकेतन के दो छात्रों को कुत्ते द्वारा काटे जाने की जानकारी सामने आई. स्कूल के प्रधानाचार्य डीएस रावत के मुताबिक, छात्रों को उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया और पुलिस को भी सूचना दी गई.
घटना के बाद अभिभावकों में चिंता और बढ़ गई. कई माता-पिता बच्चों को स्कूल भेजने को लेकर आशंकित नजर आए. व्यापारियों ने भी अपने प्रतिष्ठानों में सुरक्षा के लिए डंडे आदि रखने शुरू कर दिए.
कुत्तों को पकड़ने के लिए कई विभागों की टीम सक्रिय
स्थिति को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन ने केवल एक विभाग पर निर्भर रहने के बजाय कई विभागों की संयुक्त टीम को मैदान में उतारा है. इसमें वन विभाग, आपदा प्रबंधन और पशुपालन विभाग समेत अन्य कर्मचारी शामिल हैं.
बुधवार को संयुक्त टीम ने क्षेत्र में अभियान चलाकर कई कुत्तों को पकड़ने और उनका उपचार करने की कार्रवाई की. मींग गधेरा क्षेत्र में भी कथित तौर पर आक्रामक कुत्तों की समस्या बनी हुई है.
प्रशासन का उद्देश्य प्रभावित क्षेत्रों में लोगों और खासकर स्कूली बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है.
ब्लॉक प्रमुख ने डीएम को सौंपा था ज्ञापन
नारायणबगड़ क्षेत्र में लगातार सामने आ रही घटनाओं के बाद ब्लॉक प्रमुख गणेश चंदोला ने जिलाधिकारी को ज्ञापन देकर आवारा कुत्तों के आतंक से लोगों को राहत दिलाने की मांग की थी.
इसके बाद जिलाधिकारी गौरव कुमार ने मामले को गंभीरता से लेते हुए शिक्षा विभाग को आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए. मुख्य शिक्षा अधिकारी आकाश सारस्वत ने इसके बाद 10 विद्यालयों में चार दिन के अवकाश का आदेश जारी किया.
डीएम बोले- ऑनलाइन चलेंगी कक्षाएं
जिलाधिकारी गौरव कुमार ने बताया कि नारायणबगड़ क्षेत्र में आवारा कुत्तों के आतंक के संबंध में मुख्य शिक्षा अधिकारी ने उन्हें अवगत कराया था. बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए 10 विद्यालयों में 20 से 23 अगस्त तक अवकाश घोषित किया गया है.
उन्होंने बताया कि इस अवधि में विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसके लिए ऑनलाइन कक्षाएं संचालित की जाएंगी.
इन 10 स्कूलों में रहेगा अवकाश
नारायणबगड़ क्षेत्र में प्रशासन के आदेश के तहत निम्न विद्यालयों में चार दिन का अवकाश रहेगा:
- राजकीय इंटर कॉलेज
- राजकीय बालिका इंटर कॉलेज
- सरस्वती शिशु मंदिर
- उत्तरांचल विद्या निकेतन
- राजकीय प्राथमिक विद्यालय
- श्री गुरु राम राय पब्लिक स्कूल, पंती
- राजकीय प्राथमिक विद्यालय, नलगांव
- राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय, नलगांव
- मॉडर्न चिल्ड्रंस एकेडमी
- उत्तराखंड विद्यालय निकेतन
इन विद्यालयों में 20, 21, 22 और 23 अगस्त को नियमित कक्षाएं नहीं होंगी.
आवारा कुत्तों की समस्या पर फिर उठे सवाल
नारायणबगड़ की घटना ने पहाड़ी क्षेत्रों में आवारा कुत्तों की बढ़ती समस्या पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं. उत्तराखंड के पर्वतीय इलाकों में पहले ही वन्यजीवों के हमले लोगों के लिए चिंता का विषय रहे हैं. अब आबादी वाले क्षेत्रों में आक्रामक आवारा कुत्तों के झुंड और उनके हमलों ने स्थानीय प्रशासन के सामने एक नई चुनौती खड़ी कर दी है.
आवारा कुत्तों के प्रबंधन की जिम्मेदारी स्थानीय निकायों की होती है. इनमें पकड़ना, नसबंदी, टीकाकरण और जरूरत के अनुसार शेल्टर की व्यवस्था जैसे उपाय शामिल हैं. नारायणबगड़ की घटना यह सवाल भी खड़ा करती है कि पहाड़ी क्षेत्रों में इन व्यवस्थाओं को कितनी प्रभावी तरीके से लागू किया जा रहा है.
बच्चों की सुरक्षा प्रशासन की प्राथमिकता
फिलहाल प्रशासन ने स्कूलों में छुट्टी घोषित करके तत्काल सुरक्षा उपाय किया है. साथ ही संयुक्त टीम को क्षेत्र में सक्रिय कर कुत्तों को पकड़ने और उनका उपचार करने का अभियान चलाया जा रहा है.
अब नजर इस बात पर रहेगी कि प्रशासन कब तक क्षेत्र में कुत्तों के आतंक पर प्रभावी नियंत्रण कर पाता है और बच्चों की सुरक्षित तरीके से स्कूल वापसी कब संभव होती है.

