‘ईरान पर परमाणु हमले की तैयारी में है UN और अमेरिका’, यूएन अधिकारी के दावे और इस्तीफे से मचा बवाल

Nuclear attack on Iran : मिडिल ईस्ट की धरती पर बारूद की गंध अभी कम भी नहीं हुई थी कि दुनिया को दहला देने वाली एक खबर सामने आई है. संयुक्त राष्ट्र (UN) के एक वरिष्ठ राजनयिक अधिकारी मोहम्मद सफा (Mohammad Safa) ने एक ऐसा सनसनीखेज दावा किया है जिसने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में तूफान खड़ा कर दिया है. सफा का आरोप है कि अमेरिका और संयुक्त राष्ट्र मिलकर ईरान पर परमाणु हमले की खौफनाक साजिश रच रहे हैं. इस बात का खुलासा करते हुए उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है ताकि वे ‘मानवता के खिलाफ होने वाले इस अपराध’ के गवाह न बनें.

Nuclear attack on Iran:इस्तीफे के पीछे का खौफनाक सच !

मोहम्मद सफा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर अपना इस्तीफा साझा करते हुए दुनिया को आगाह किया है. उन्होंने बताया कि संयुक्त राष्ट्र के कुछ बड़े अधिकारी एक ताकतवर लॉबी के दबाव में काम कर रहे हैं. सफा के मुताबिक, स्थिति इतनी गंभीर है कि लोग इसका अंदाजा भी नहीं लगा पा रहे हैं. उन्होंने साफ तौर पर कहा कि वे इस ‘परमाणु शीतकाल’ (Nuclear Winter) को रोकना चाहते हैं, जिससे पूरी दुनिया का विनाश हो सकता है.

‘तेहरान कोई रेगिस्तान नहीं, वहां भी मासूम बच्चे रहते हैं’

सफा ने तेहरान की एक खूबसूरत तस्वीर साझा करते हुए उन लोगों पर तीखा हमला बोला जो युद्ध की वकालत करते हैं. उन्होंने कहा कि जो लोग बमबारी के नाम पर खुश हो रहे हैं, वे शायद भूल गए हैं कि तेहरान कोई खाली मैदान नहीं है. वहां 1 करोड़ से ज्यादा लोग रहते हैं, जिनमें मासूम बच्चे, परिवार और उनके सपने बसे हैं. उन्होंने सवाल उठाया कि क्या दुनिया बर्लिन, पेरिस या लंदन जैसे शहरों पर परमाणु हमले की कल्पना भी कर सकती है? युद्ध की चाह रखना एक मानसिक बीमारी है.

कौन हैं मोहम्मद सफा?

मोहम्मद सफा कोई आम व्यक्ति नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक जाना-माना नाम हैं. वे ‘पैट्रियॉटिक विजन’ (PVA) नामक संगठन के मुख्य प्रतिनिधि के रूप में संयुक्त राष्ट्र में काम कर रहे थे. इस संगठन को संयुक्त राष्ट्र की आर्थिक और सामाजिक परिषद में विशेष सलाहकार का दर्जा प्राप्त है. मो. सफा साल 2013 से इस संस्था के कार्यकारी निदेशक थे और 2016 से वे UN में अपनी सेवाएं दे रहे थे.

अमेरिका में भी उठने लगी विरोध की आवाज

अपनी पोस्ट में सफा ने यह भी जिक्र किया कि अमेरिका के भीतर भी लोग इस खतरे को महसूस कर रहे हैं. उन्होंने बताया कि हाल ही में करीब 1 करोड़ लोगों ने ‘No Kings’ (कोई राजा नहीं) के नारे लगाते हुए विरोध प्रदर्शन किया है. परमाणु हथियारों के इस्तेमाल की संभावना अब केवल एक चर्चा नहीं बल्कि एक बेहद खतरनाक हकीकत बनती दिख रही है, जिसे अगर समय रहते नहीं रोका गया तो परिणाम भयावह होंगे.

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