Chandrashekhar Azad : उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर सियासी पारा अभी से चढ़ने लगा है. नगीना से सांसद और आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के मुखिया चंद्रशेखर आजाद ने आगामी चुनावों के लिए अपनी रणनीति का खुलासा कर दिया है. कांशीराम जयंती के अवसर पर बाराबंकी पहुंचे चंद्रशेखर ने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी गठबंधन के लिए तैयार है लेकिन उन्होंने इसके साथ ही एक ‘डेडलाइन’ भी खींच दी है.
कांशीराम जयंती और Azad Samaj Party के छठे स्थापना दिवस के मौके पर Barabanki में आयोजित महारैली में चंद्रशेखर आज़ाद ने करणी सेना की धमकियों का जवाब देते हुए कहा कि वो चमड़े की चप्पल पहनकर आए हैं और भीम आर्मी का झंडा और डंडा दोनों मजबूत हैं..उन्होंने ये भी कहा कि वो चमड़ा उतारना,… pic.twitter.com/ZoCLjiU1cZ
— UP Tak (@UPTakOfficial) March 16, 2026
Chandrashekhar Azad-बीजेपी के साथ कभी नहीं होगा गठबंधन
चंद्रशेखर आजाद ने पत्रकारों से बातचीत में साफ तौर पर कहा कि वे भारतीय जनता पार्टी (BJP) के साथ कभी हाथ नहीं मिलाएंगे. उन्होंने इसके पीछे का कारण वैचारिक मतभेद बताया. चंद्रशेखर आजाद ने कहा
‘बीजेपी के साथ हमारा वैचारिक विरोध है, इसलिए उनके साथ जाने का सवाल ही पैदा नहीं होता। बीजेपी को छोड़कर हम राज्य में किसी भी अन्य दल के साथ गठबंधन करने पर विचार कर सकते हैं.’
गठबंधन पर कौन लेगा आखिरी फैसला?
गठबंधन की सुगबुगाहटों के बीच आजाद ने यह भी स्पष्ट किया कि निर्णय लेने की प्रक्रिया लोकतांत्रिक होगी. उनके अनुसार गठबंधन का अंतिम फैसला पार्टी का प्रदेश नेतृत्व और कार्यकर्ता करेंगे. पार्टी की इकाई जो भी तय करेगी, उन्हें वह मंजूर होगा. उनका मुख्य उद्देश्य सत्ता परिवर्तन और भाजपा को हराना है.
विपक्षी दलों से किया एकजुट होने का आह्वान
आजाद समाज पार्टी के मुखिया ने यूपी के सभी विपक्षी दलों से निडर होकर साथ आने की अपील की है. उन्होंने कहा, “किसी को भी भाजपा से डरने की जरूरत नहीं है. बस हमारे साथ आ जाएं, हम सब मिलकर इस सरकार को उखाड़ फेंकेंगे.”
क्या इंडिया गठबंधन में शामिल होंगे चंद्रशेखर?
राजनीतिक गलियारों में चंद्रशेखर के इस बयान को सपा-कांग्रेस (INDIA Alliance) के लिए एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है. जानकारों का मानना है कि आजाद पार्टी की पहली प्राथमिकता सपा और कांग्रेस के साथ मिलकर चुनाव लड़ना है. प्लान बी से हैं कि यदि बड़े दलों से बात नहीं बनती है, तो वे असदुद्दीन ओवैसी (AIMIM) या अन्य छोटे क्षेत्रीय दलों के साथ तीसरा मोर्चा बना सकते हैं.

