Tuesday, January 27, 2026

Delhi riots case: सुप्रीम कोर्ट ने उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत देने से किया इनकार, बाकी 5 को मिली जमानत

Delhi riots case: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को छात्र नेताओं शरजील इमाम और उमर खालिद को जमानत देने से इनकार कर दिया. याद दिला दें कि, यह दोनों 2020 के दिल्ली दंगों के मामले में कई सालों से जेल में बंद हैं. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में पांच अन्य सह-आरोपियों को रिहा करने का आदेश दिया, जिनमें गुलफिशा फातिमा, मीरान हैदर, शिफा उर रहमान, मोहम्मद सलीम खान और शादाब अहमद शामिल हैं. ये जमानत कुछ शर्तों पर दी गई है.

Delhi riots case: गुलफिशा फातिमा समेत 5 को मिली जमानत

इसके साथ ही, सुप्रीम कोर्ट ने पांच अन्य सह-आरोपियों – गुलफिशा फातिमा, मीरान हैदर, शिफा उर रहमान, मोहम्मद सलीम खान और शादाब अहमद को उनके कथित रोल में साफ़ अंतर बताते हुए रिहा करने की इजाज़त दे दी.
हालांकि, कोर्ट ने यह भी साफ किया कि जमानत का मतलब यह नहीं है कि उनके खिलाफ लगे आरोप कम गंभीर हो गए हैं. कोर्ट ने उनकी रिहाई के लिए 12 शर्तें रखीं, और चेतावनी दी कि किसी भी शर्त का उल्लंघन करने पर जमानत रद्द कर दी जाएगी.
यह आदेश 10 दिसंबर को सुरक्षित रखा गया था, और सोमवार को सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस अरविंद कुमार और एनवी अंजारी की बेंच ने इसे पढ़कर सुनाया.

‘खालिद, इमाम दूसरे आरोपियों की तुलना में गुणात्मक रूप से अलग स्थिति में हैं’- सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने दोनों नेताओं पर लगे आरोपों की गंभीरता का हवाला दिया, और कहा कि इस मामले में दूसरे आरोपियों की तुलना में वे “गुणात्मक रूप से अलग स्थिति” में हैं.
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस मामले में, हर अपील की अलग-अलग जांच करना ज़रूरी है, और रिकॉर्ड से पता चलता है कि जब अपराध की बात आती है तो अपील करने वाले बराबर स्थिति में नहीं हैं.
बार एंड बेंच ने कोर्ट के हवाले से कहा, “भागीदारी की हायरार्की के लिए कोर्ट को हर एप्लीकेशन का अलग-अलग आकलन करना होगा. आर्टिकल 21 के तहत राज्य को लंबे समय तक प्री-ट्रायल हिरासत को सही ठहराना होगा.”
सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कहा कि शरजील इमाम और उमर खालिद “दूसरे आरोपियों की तुलना में गुणात्मक रूप से अलग स्थिति में हैं.”

बार एंड बेंच के हवाले से आज के आदेश में कुछ खास बातें:

“चर्चा सिर्फ देरी और लंबे समय तक जेल में रहने तक सीमित रही है. UAPA के अपराध शायद ही कभी अलग-थलग कामों तक सीमित होते हैं. कानूनी ढांचा इस समझ को दिखाता है.”

“बेल बचाव का मूल्यांकन करने का मंच नहीं है. न्यायिक संयम कर्तव्य से पीछे हटना नहीं है. सही एप्लीकेशन के लिए कोर्ट को एक व्यवस्थित जांच करनी होगी.”

SC बेंच ने UAPA की धारा 15 की लागू होने की बात भी कही, जो एक “आतंकवादी कृत्य” को परिभाषित करती है. बेंच ने कथित तौर पर कहा कि सिर्फ मौत और विनाश ही नहीं, यह खास प्रावधान उन कामों को भी शामिल करता है जो सेवाओं को बाधित करते हैं और अर्थव्यवस्था के लिए खतरा हैं.

कोर्ट ने कहा कि UAPA के तहत हर एप्लीकेशन का स्वतंत्र रूप से मूल्यांकन किया जा रहा है क्योंकि हर आरोपी की अपराध में भागीदारी अलग-अलग थी. बेंच ने कहा, “उमर खालिद और शरजील इमाम अन्य आरोपियों की तुलना में गुणात्मक रूप से अलग स्थिति में हैं.”

कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि ट्रायल समय पर पूरा हो और गवाहों की जांच बिना किसी देरी के की जाए.

दिल्ली पुलिस जमानत का कर रही थी विरोध

आपको बता दें, उमर खालिद और शरजील इमाम फरवरी 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के मामले में आरोपी हैं. वे कई सालों से जेल में हैं और उन्होंने दिल्ली हाई कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी जिसमें उन्हें ज़मानत देने से इनकार कर दिया गया था.
दिल्ली पुलिस लंबे समय से इस मामले में सभी आरोपियों की ज़मानत का विरोध कर रही है, यह तर्क देते हुए कि 2020 के दंगे भारत की संप्रभुता पर एक “सोची-समझी, पहले से प्लान की गई और अच्छी तरह से डिज़ाइन की गई” हमला था. हालांकि, शरजील इमाम का तर्क है कि उन्हें बिना किसी सबूत या सज़ा के “बौद्धिक आतंकवादी” का लेबल दिया गया.

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