Uddhav-Raj Thakre Alliance : महाराष्ट्र की राजनीति में रसूख करने वाले ठाकरे परिवार के दो बेटे पूरे 20 साल के बाद एक बार फिर से एक दूसरे साथ आ गये. राज ठाकरे ने नवंबर 2005 में शिवसेना को छोड़ा था और अपनी एक अलग पार्टी बना कर प्रभाव छोड़ने की कोशिश की लेकिन अब ठीक 20 साल बाद अपने चचेरे भाई उद्धव ठाकरे के साथ गठबंधन में आ गए हैं.
Uddhav-Raj Thakre Alliance:BMC Election में मिलकर लडेंगे चुनाव
उद्दव ठाकरे की शिवसेना और राज ठाकरे की मनसे (MNS) के बीच बीएमसी चुनाव को लेकर गठबंधन हुआ है. बुधवार को उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे दोनों परिवार समेत मुंबई में बाला साहेब ठाकरे के स्मारक पर गए और श्रद्धांजलि अर्पित की. दोनो भाई महाराष्ट्र के हितों के लिए अपने झगड़े भुलाने की बात एक साथ आये हैं.
जनता की भलाई या आस्तित्व की लड़ाई !
हालांकि उद्धव और राज ठाकरे के बीच गठबंधन के पीछे केवल यही मामला नहीं है, बल्कि इस गठबंधन के पहले बीते कुछ सालो में दोनो पार्टियों में काफी कुछ घटित हो चुका है.
शिवसेना का बंटवारा
बाला साहब ठाकरे के निधन के बाद शिवसेना पूरी तरह से उद्धव ठाकरे की कमान में थी लेकिन एकनाथ शिंदे के द्वारा पार्टी तोड़े जाने के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में काफी उथल-पुथल हो गया. एक नाथ शिंदे के सीएम बनने और अब डिप्टी सीएम बनने के बाद पार्टी का एक बड़ा धड़ा एकनाथ शिंदे वाली शिवसेना के साथ है. वहीं शिवसेना से अलग पार्टी बना कर चुनाव लड़ने पर राज ठाकरे के मनसे को लगातार कई चुनावों में नतीजा सिफर ही मिला. ऐसे में माना जा रहा है कि महाराष्ट्र में अब ठाकरे परिवार के अस्तित्व की लड़ाई है. प्रदेश में अस्तित्व से लेकर वर्चस्व तक की लड़ाई के लिए यह जरूरी था कि दोनों भाई साथ आ जायें. दोनों पार्टियों की विचारधार भी एक ही है. दोनों मराठावाद की ही राजनीति करते रहे हैं.
सीटों पर समीकऱण साधने में जुटे दोनों भाई
महाराष्ट्र में 15 जनवरी को नगर निगम के चुनाव होने हैं. राज्य के सभी 29 नगर निगमों में नगर पालिका के लिए एक ही चरण में चुनाव होंगे. महाराष्ट्र की मुख्य सियासत से बाहर हो चुकी उद्धव ठाकरे की शिवसेना अब किसी सूरत में मुंबई नगर निगम यानी बीएमसी के चुनाव में पीछे नहीं रहना चाहती है. ऐसे में दोनों भाई सीटों का समीकरण साधने की तैयारी में हैं, ताकि लोकल बॉडी इलेक्शन में पूरे सहयोग के साथ उतरा जा सके.
227 में किसे मिलेगी कितनी सीटें
उद्धव ठाकरे की शिवसेना और राज ठाकरे की महाराष्ट्र नव निर्माण सेना के बीच 227 सीटों में से 145 से 150 सीट उद्धव की शिवसेना और 65 से 70 सीट महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना को मिल सकती हैं.शरद पवार की एनसीपी को 10 से 12 सीटें मिल सकती हैं.
हमारे लिए सीट महत्वपूर्ण नहीं – राज ठाकरे
गठबंधन के बाद सीट बंटवारे के सवाल पर राज ठाकरे ने कहा कि उनके लिए सीटें बहुत मायने नहीं रखती हैं, बस होना या चाहिये कि महाराष्ट्र के हितों के साथ समझौता ना किया जाए. मुंबई का मेयर कोई मराठी ही बने, यही हमारा टारगेट है.
हलांकि दोनो भाइयों के गठबंधन को लेकर एकनाथ शिंदे की शिवसेना का कहना है कि ये दोनों भाई पहले ही बालासाहेब ठाकरे की विचारधारा से समझौता कर चुके हैं और इसके लिए बालासाहेब की आत्मा इन्हें कभी माफ नहीं करेगी.
2009 में मनसे को मिली थी 13 सीटें
उद्धव ठाकरे से अलग होकर जब राज ठाकरे ने अपनी पार्टी बनाई और चुनाव लड़ा तो सबसे अधिक सीटें उन्हें 2009 में मिली. राज ठाकरे को 2009 के विधानसभा चुनाव में 13 विधानसभा सीटें मिली थीं. लेकिन इसके बाद से मनसे की स्थिति लगातार खराब ही होती चली गई. 2014 और 2019 में एक-एक सीट मिली वहीं 2024 में खाता भी नहीं खुल पाया. ऐसा माना जा रहा है कि राज ठाकरे के लिए भी गठबंधन के अलावा कोई रास्ता नहीं था. अब जब शिवसेना में बगावत के बाद दोनो भाई एक साथ आये हैं. उम्मीद की जा रही है कि ठाकरे परिवार एक बार फिर से लोगों के बीच मजबूत संदेश लेकर जायेगा.

