Wednesday, January 21, 2026

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने दी नॉर्वे के पीएम को धमकी – कहा मुझे नोबल नहीं मिला,अब ग्रीनलैंड चाहिये….

Trump Letter to Norway PM : शांति का नोबेल पुरस्कार ना मिलने की अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की खीज अब खुल कर सामने आ गई है. वेनेजुएला की विपक्षी पार्टी की नेता मारिया कोरिना माचाडो से भले ही राष्ट्रपति ट्रंप ने शांति का नबेल पुरस्कार हथिया लिया हो लेकिन वो भली भांति जानते हैं कि उन्हें ये पुरस्कार नहीं मिला है.  ऐसे में अब अमेरिकी राष्ट्पति ने दुनिया को बता दिया है कि उन्हें शांति के प्रयासों से कोई लेना देना नहीं हैं. अगर उन्हें शांति का नोबेल पुरस्कार मिलता तभी तो वो शांति के बारे में सोचते वर्ना उनका शांति से कोई लेना देना नहीं है.

Trump Letter to Norway PM : राष्ट्रपति ट्रंप ने दी नार्वे के पीएम को धमकी  

राष्ट्रपति ट्रंप ने नॉर्वे के प्रधानमंत्री जोनास गहर स्टोर को एक धमकी भरी चिट्टी भेजी है, जिसमें लिखा है कि उन्हें नोबेल पुरस्कार नहीं दिया गया, इसलिए अब उन्हें शांति से कोई लेना देना नहीं है, शांति उनके लिए कोई प्राथमिकता नहीं रह गई है. नॉर्वे की सरकार की तऱफ से 19 जनवरी को राष्ट्रपति ट्रंप की चिट्ठी की पुष्टि की गई है. नार्वे के प्रधानमंत्री कार्यालय के अखबार को दी गई सूचना में कहा गया है कि अमेरिका राष्ट्रपति ट्रंप ने एक चिट्टी भेजी है जिसमें कहा गया है कि नोबेल पुरस्कार नहीं मिलने के बाद वे अब शांति के लिए बाध्य नहीं हैं.

नार्वे की मीडिया से आ रही खबरों के मुताबिक राष्ट्रपति ने नार्वे के प्रधानमंत्री से कहा है कि वो  डेनमार्क से कहें कि ग्रीनलैंड अमेरिका को सौंप दिया जाए.

राष्ट्रपति ट्रंप ने अपनी चिट्ठी में लिखा है कि “चूंकि आपके देश ने आठ युद्धों को रोकने के लिए बाद भी मुझे नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित नहीं करने का फैसला किया है, इसलिए अब मुझे केवल शांति के बारे में सोचने की जरूरत नहीं है. हालांकि शांति हमेशा सर्वोपरि रहेगी लेकिन अब मैं इस ये सोच सकता हूं कि संयुक्त राज्य अमेरिका के लिए क्या अच्छा और सही है.”

ग्रीनलैंड को सुरक्षित नहीं रख सकता है डेनमार्क – ट्रंप

अपनी चिट्ठी में प्रेसिडेंट ट्रंप ने लिखा है कि  ‘डेनमार्क रूस या चीन से उस जमीन (ग्रीनलैंड) की रक्षा नहीं कर सकता है. वैसे भी डेनमार्क के पास कोई लिखित दस्तावेज नहीं है तो फिर उसके पास स्वामित्व का अधिकार कैसे है. बस इतना ही है कि सैकड़ों साल पहले एक शिप वहां उतरी थी, लेकिन हमारी शिप भी वहां उतरती थीं.’

दरअसल डोनल्ड ट्रंप का पूरा गुस्सा शांति का नोबेल पुरस्कार ने मिलने के लेकर है. जबकि ये बात पूरी दुनिया जानती है कि नोबेल पुरस्कार देने का फैसला ओस्लो स्थित एक स्वतंत्र समिति करती है. नार्वे की सरकार का इसमें कोई हस्तक्षेप नहीं होता है, इसके बावजूद ये पहला मौका नहीं है जब राष्ट्रपति ट्रंप ने नोबेल पुरस्कार ना मिलने पर नार्वे की सरकार पर निशाना साधा है. राष्ट्रपति ट्रंप नोबेल पुरस्कार ना मिलने की खीज लगातार नार्वे पर उतार रहे हैं.

ट्रंप की चिट्ठी पर नॉर्वे पीएम ने क्या कहा?

 नार्वे के अखबार Aftenposten  ने अपने एक रिपोर्ट में बताया कि प्रधानमंत्री जोनास गहर स्टोरे ने बताया कि उन्होंने और फिनलैंड के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब ने अमेरिकी राष्ट्रपति को एक पत्र लिखा था जिसमें अमेरिका के बढ़े हुए टैरिफ का विरोध किया था. इसी पत्र के जवाब में 18 जनवरी को अमेरिका राष्ट्रपति ट्रंप ने उन्हें और फिनलैंड के राष्ट्रपति को जवाब भेजा जिसमें नोबेल शांत पुरस्कार को लेकर बातें कहीं गई हैं.

हर हाल में अब अमेरिकी राष्ट्रपति चाहते हैं ग्रीनलैंड  पर कब्जा   

अमेरिकी राष्ट्रपति लगातार खुद को नोबेल शांति पुरस्कार  के लिए सबसे उपयुक्त उम्मीदवार बताते रहे हैं. इसके बावजूद जब नोबेल पुरस्कार समिति ने ट्रंप को इस पुरस्कार को ना चुनकर ये पुरस्कार वेनेजुएला  की विपक्षी पार्टी की प्रमुख मारिया कोरिना माचाडो को दे दिया तो ट्रंप भड़क गये और रातो रात ये ऐलान कर दिया कि मारिया कोरिना माचाडो अपना पुरस्कार उन्हें सौंप देगी.

नोबेल पुरस्कार ना मिलने से भड़के ट्रंप अब दादगिरी पर उतारु हैं. पहले लोकतांत्रिक देश वेनेजुएला के राष्ट्ररति और उनकी पत्नी को रातों रात उनके आवास से अपहरण करके बंदी बना लिया और अब हर हालत में ग्रीनलैंड पर कब्जा करना चाहते हैं.

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