ट्रंप के 25 मिनट के भाषण से हिला वॉल स्ट्रीट, 550 बिलियन डॉलर की मार्केट वैल्यू साफ!

US Stock Market Crash :  2 अप्रैल 2026 को अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान को लेकर राष्ट्र के नाम संबोधन दिया. इस भाषण का ईरान पर और दुनिया के अन्य  देशों पर क्या असर हुआ , ये तो अभी साफ नहीं है लेकिन अमेरिका के लिए बेहद भारी साबित हुआ है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के करीब 25 मिनट के इस संबोधन के दौरान अमेरिकी शेयर बाजार में जबरदस्त गिरावट दर्ज की गई, जिससे वैश्विक निवेशकों में हड़कंप मच गया.

US Stock Market Crash : भाषण शुरु होते ही गिरा बाजार 

भाषण शुरू होने के कुछ ही मिनटों में S&P 500 फ्यूचर्स लगभग 1.1% तक गिर गए. जैसे-जैसे ट्रंप का बयान आगे बढ़ता गया, बाजार में अनिश्चितता बढ़ती गई और निवेशकों ने तेजी से अपनी पोजिशन कम करनी शुरू कर दी. नतीजा यह हुआ कि मात्र 25 मिनट के भीतर लगभग 550 बिलियन डॉलर यानी करीब 5.5 लाख करोड़ रुपये की मार्केट वैल्यू खत्म हो गई. ये भी तब हुआ जब ट्रंप ने अपने भाषण में दावा किया कि

“इस खतरे का सामना करने के लिए अमेरिका आर्थिक रूप से पहले कभी इतना बेहतर ढंग से तैयार नहीं रहा है। हम दुनिया में सबसे तेज़ी से आगे बढ़ने वाला देश हैं—जहाँ रिकॉर्ड तोड़ निवेश हो रहा है, शेयर बाज़ार अपने अब तक के सबसे ऊँचे स्तर पर है, और कोई महँगाई नहीं है। इन सभी बातों ने हमें उस ‘कैंसर’ से छुटकारा पाने के लिए सही स्थिति में ला खड़ा किया है, जो लंबे समय से सुलग रहा था”

“सबसे महंगा भाषण” क्यों कहा जा रहा?

इस बड़ी गिरावट को देखते हुए कई अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थानों और मार्केट विश्लेषकों ने इसे ट्रंप का “सबसे महंगा भाषण” करार दिया है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, इतने कम समय में इतनी बड़ी पूंजी का बाजार से गायब होना बेहद असामान्य है. यही वजह है कि यह घटना ग्लोबल फाइनेंशियल मार्केट में चर्चा का बड़ा विषय बन गई है.

ईरान को लेकर बयान बना वजह

विशेषज्ञों का मानना है कि यह गिरावट मुख्य रूप से ईरान को लेकर बढ़ते जियोपॉलिटिकल तनाव के कारण आई. ट्रंप के सख्त रुख और संभावित नीतिगत फैसलों ने निवेशकों के बीच अनिश्चितता को बढ़ा दिया. जब भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव बढ़ता है, तो निवेशक जोखिम से बचने के लिए बाजार से दूरी बनाने लगते हैं, जिसका सीधा असर शेयर बाजार पर पड़ता है.

पहले भी दिख चुका है असर

यह पहली बार नहीं है जब Donald Trump के किसी बयान या नीति घोषणा का बाजार पर इतना बड़ा प्रभाव पड़ा हो. इससे पहले भी टैरिफ, ट्रेड वॉर और विदेश नीति से जुड़े उनके फैसलों ने बाजार में भारी उतार-चढ़ाव पैदा किया है. कई बार तो बाजार में 2 ट्रिलियन डॉलर तक का बदलाव भी  देखा गया है.

निवेशकों के लिए क्या संकेत?

इस घटना ने एक बार फिर साफ कर दिया है कि वैश्विक राजनीति और बाजार के बीच गहरा संबंध है. खासतौर पर जब बात अमेरिका जैसे बड़े आर्थिक शक्ति की हो, तो वहां के राजनीतिक बयान भी बाजार की दिशा तय कर सकते हैं. आने वाले दिनों में निवेशकों की नजर अब ईरान से जुड़े घटनाक्रम और अमेरिकी नीतियों पर टिकी रहेगी.

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