गाजा के लिए तथाकथित ‘बोर्ड ऑफ पीस’ Gaza peace board का हिस्सा बनने के लिए अमेरिका ने हाल ही में जिन देशों से संपर्क किया है, उनमें भारत भी शामिल है. भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने रविवार को वह पत्र शेयर किया जो अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखा था, जिसमें उन्होंने मोदी से बोर्ड में शामिल होने का अनुरोध किया था.
ट्रम्प ने पीएम मोदी को पत्र में क्या लिखा
राष्ट्रपति ट्रंप ने लेटर में लिखा, “यह मेरे लिए बहुत सम्मान की बात है कि मैं आपको, भारत गणराज्य के प्रधानमंत्री के तौर पर, मिडिल ईस्ट में शांति को मज़बूत करने के लिए एक बहुत ही ऐतिहासिक और शानदार कोशिश में मेरे साथ शामिल होने के लिए आमंत्रित कर रहा हूँ और साथ ही, ग्लोबल संघर्ष को सुलझाने के लिए एक नए साहसिक तरीके की शुरुआत कर रहा हूँ.”
क्या होगा Gaza peace board का काम
इसके बाद ट्रंप ने गाजा में युद्ध खत्म करने के लिए अपने प्रशासन की पहले की 20-पॉइंट योजना का ज़िक्र किया और कहा कि ‘बोर्ड ऑफ पीस’ उसी रोडमैप को आगे बढ़ाने के लिए है. राष्ट्रपति ने इस बोर्ड को “सबसे प्रभावशाली और महत्वपूर्ण” बताया और कहा कि यह उन देशों को एक साथ लाएगा जो स्थायी शांति चाहते हैं.
लेटर के आखिर में लिखा था, “हम जल्द ही अपने शानदार और समर्पित पार्टनर्स को बुलाएंगे, जिनमें से ज़्यादातर बहुत सम्मानित वर्ल्ड लीडर्स हैं.”
अगर भारत ट्रंप का इनविटेशन स्वीकार करता है, तो वह तीन साल के लिए बोर्ड का हिस्सा होगा, लेकिन कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार, 1 बिलियन डॉलर का योगदान सदस्य देशों को बोर्ड में स्थायी सीट की गारंटी देगा. हालांकि, व्हाइट हाउस ने रविवार को इन दावों को खारिज करते हुए उन्हें “गुमराह करने वाला” बताया.
‘बोर्ड ऑफ़ पीस’ को यह देखने का काम सौंपा गया है कि ट्रंप के सीज़फ़ायर प्रस्ताव के दूसरे चरण के तहत गाज़ा में डेवलपमेंट कैसे होते हैं.
भारत का न्यौते को लेकर रुख अभी साफ नहीं
भारत के अलावा, हंगरी, ऑस्ट्रेलिया, वियतनाम, पाकिस्तान, जॉर्डन, ग्रीस, साइप्रस, कनाडा, तुर्की, मिस्र, पैराग्वे, अर्जेंटीना और अल्बानिया जैसे कई अन्य देशों को भी बोर्ड का हिस्सा बनने के लिए इनवाइट किया गया है.
न्यूज़ एजेंसी AP के मुताबिक, दो देशों, हंगरी और वियतनाम ने इनविटेशन स्वीकार कर लिया है. इस बीच, अभी तक इस बात की कोई ऑफिशियल पुष्टि नहीं हुई है कि भारत इनविटेशन स्वीकार करेगा या नहीं.
PM मोदी को डोनाल्ड ट्रंप का ‘बोर्ड ऑफ पीस’ को लेकर लिखा गया लेटर ऐसे समय में आया है जब भारत और अमेरिका ट्रेड बातचीत में लगे हुए हैं, जिसे रूस के साथ तेल ट्रेड को लेकर भारत पर 50% टैरिफ लगाने के अमेरिका के फैसले के बाद और भी ज़्यादा अहमियत मिली है.
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