ईरान पर हमले के बाद ट्रंप–मोदी की पहली बातचीत,मिडिल-ईस्ट युद्ध और होर्मुज जलमार्ग खोलने पर हुआ विचार

Trump Modi Call Iran War : ईरान पर 28 मार्च को हुए हमले के बाद पहली बार अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच अहम टेलीफोन वार्ता हुई है. इस बातचीत की जानकारी अमेरिकी दूत सर्जियो गोर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर साझा की.

Trump Modi Call Iran War:होर्मुज स्ट्रेट और मिडिल ईस्ट के हालात पर हुई बात 

बताया गया है कि दोनों नेताओं के बीच मुख्य रूप से मध्य पूर्व (पश्चिम एशिया) में जारी संघर्ष और खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य को खुला बनाए रखने के महत्व पर चर्चा हुई. यह जलडमरूमध्य वैश्विक तेल आपूर्ति के लिहाज से बेहद अहम माना जाता है.

यह बातचीत ऐसे समय पर हुई है जब ट्रंप प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि ईरान के साथ चल रहा अमेरिका-इजरायल युद्ध खत्म होने की ओर बढ़ सकता है. ट्रंप ने हाल ही में कहा था कि तेहरान के साथ “सार्थक बातचीत” जारी है और उन्होंने ईरान के बिजली संयंत्रों पर संभावित हमले की समयसीमा को पांच दिनों के लिए टाल दिया है.

ईरान ने अमेरिका के दावों को किया खारिज   

हालांकि, ईरान की ओर से इस दावे पर विरोधाभासी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं. कुछ अधिकारियों का कहना है कि ट्रंप प्रशासन ईरान की कड़ी चेतावनी के बाद पीछे हट गया है, जबकि कुछ संकेत यह भी दे रहे हैं कि अप्रत्यक्ष रूप से बातचीत जारी है.

इस बीच प्रधानमंत्री मोदी ने भी हाल ही में ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन से बातचीत की थी, हालांकि किसी संभावित मध्यस्थता की भूमिका पर अभी तक कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है. रिपोर्ट्स के अनुसार, पाकिस्तान उन चार देशों में शामिल है जो अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता की कोशिश कर रहे हैं. अन्य देशों में सऊदी अरब, तुर्की और मिस्र शामिल हैं.

ईरान अमेरिका युद्ध में अब तक जानमाल का भारी नुकसान  

इस संघर्ष में अब तक भारी जानमाल का नुकसान हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान में 1500 से अधिक, लेबनान में 1000 से ज्यादा, इजरायल में 15 और 13 अमेरिकी सैनिकों की मौत हो चुकी है. इसके अलावा खाड़ी क्षेत्र में भी बहुत से लोग हताहत हुए हैं. लेबनान में इजरायली हमलों के कारण लाखों लोग विस्थापित हो गए हैं.

हालांकि ईरान ने औपचारिक रूप से किसी भी सीधी बातचीत से इनकार किया है, लेकिन अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि मध्यस्थों के जरिए कुछ प्रस्ताव तेहरान तक पहुंचे हैं, जिनकी समीक्षा की जा रही है.

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने इस संकट को लेकर कई देशों के नेताओं से चर्चा की है, जबकि संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघर ग़ालिबफ़ ने साफ कहा है कि अब तक कोई औपचारिक वार्ता नहीं हुई है. उन्होंने ट्रंप के बयानों को तेल और वित्तीय बाजारों को प्रभावित करने की कोशिश भी बताया है.

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