रिजू दत्ता बनेंगे बंगाल के शिंदे…TMC में दो-फाड़ की तैयारी, 50 से ज्यादा MLS छोड़ सकते हैं ममता का साथ

West Bangal TMC split , कोलकाता: पश्चिम बंगाल में सत्ता से बाहर होते ही टीएमसी में बगावत की आग तेज हो गई है. 15 साल तक सत्ता में राज करने वाली  ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) का हाल ये हो रहा है कि अब इस पार्टी में टूटने का खतरा मंडरा रहा है. अनुशासनहीनता के मामले में टीएमसी से निकाले गये नेता रिजू दत्ता ने दावा किया है कि TMC के 80 विधायकों में से 50 से अधिक विधायक बगावत के मूड में हैं और खुद को असली तृणमूल कांग्रेस बताने की तैयारी कर रहे हैं.

West Bangal TMC split: स्पीकर के सामने आज उठेंगे 3 बड़े मुद्दे

दावे के मुताबिक, बागी विधायक आज विधानसभा स्पीकर से मुलाकात कर सकते हैं. रिजू दत्ता ने बताया कि यह गुट स्पीकर के सामने मुख्य रूप से तीन मांगें और मुद्दे रखेगा:

  1. असली TMC का दावा: हमारे पास दो-तिहाई बहुमत है और 50 से ज्यादा विधायक हमारे साथ हैं, इसलिए हम ही असली तृणमूल कांग्रेस हैं.

  2. नया नेता विपक्ष: विधानसभा में शोभनदेव चट्टोपाध्याय की जगह ऋतब्रत बनर्जी को विपक्ष का नेता चुना जाए.

  3. पार्टी सिंबल पर हक: दो-तिहाई बहुमत होने के कारण पार्टी का मूल चुनाव चिह्न हमारे गुट को मिलना चाहिए.

क्या कहता है गणित? पश्चिम बंगाल विधानसभा में फिलहाल TMC के कुल 80 विधायक हैं। दल-बदल कानून से बचने और नए गुट को मान्यता दिलाने के लिए कम से कम दो-तिहाई यानी 54 विधायकों की जरूरत होगी। इससे कम संख्या होने पर स्पीकर नए गुट को मान्यता नहीं देंगे। हालांकि, यह दावा करने वाले रिजू दत्ता खुद विधायक नहीं हैं।

टीएमसी में टूट की संभावनाओं पर सियासी घमासान , 3 बड़े बयान

1. BJP: “TMC के दागी नेताओं के लिए हमारे दरवाजे बंद” पश्चिम बंगाल बीजेपी अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने साफ किया, “TMC के लिए हमारे दरवाजे पूरी तरह बंद हैं. हमने बिना किसी बाहरी मदद के 207 का आंकड़ा छुआ है. हमारी रणनीति जमीनी स्तर की है, हम दागी लोगों को पार्टी में क्यों शामिल करेंगे? बीजेपी का कभी ‘तृणमूलीकरण’ नहीं होगा.”

2. TMC: “विधायक ममता बनर्जी के साथ ही रहेंगे” TMC नेता शोभनदेव चट्टोपाध्याय ने दलबदल की अटकलों को खारिज करते हुए कहा, “पार्टी के अधिकांश विधायक पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के साथ मजबूती से खड़े रहेंगे. पुराने और वफादार नेता ही संगठन पर अपना नियंत्रण बनाए रखेंगे.”

3. कांग्रेस: “ममता जो बो रही हैं, वही काट रही हैं” कांग्रेस नेता उदित राज ने तीखा हमला बोलते हुए कहा, “ममता बनर्जी ने जो बोया है, वही काट रही हैं. उनके पास अब विरोध प्रदर्शन के लिए लोग तक नहीं बचे हैं. मुझे नहीं लगता कि TMC अब ज्यादा दिन जिंदा रह पाएगी. कार्यकर्ताओं में भारी असंतोष है. ममता को अब ‘INDIA’ ब्लॉक को मजबूत करने पर ध्यान देना चाहिए.”

फर्जी साइन विवाद: 2 विधायकों पर गिरी गाज

इस सियासी ड्रामे की शुरुआत सोमवार को हुई, जब ममता बनर्जी ने दो विधायकों—संदीपन साहा और ऋतब्रत बनर्जी को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया।

  • आरोप क्या था? दोनों विधायकों ने स्पीकर से शिकायत की थी कि शोभनदेव को नेता विपक्ष बनाने वाले प्रस्ताव पर उनके फर्जी हस्ताक्षर (Sign) किए गए थे.

  • कार्रवाई के बाद क्या हुआ? निष्कासन के बाद दोनों विधायकों ने MLA हॉस्टल में टीएमसी के कई अन्य विधायकों के साथ गुप्त बैठक की. दावा है कि इस बैठक में ममता बनर्जी के कई करीबी विधायक भी शामिल हुए थे.

अगर TMC टूटती है, तो क्या हैं 2 मुख्य संभावनाएं?

अगर बागी गुट 54 विधायकों (दो-तिहाई) का समर्थन जुटा लेता है, तो राज्य में दो ही परिस्थितियां बनेंगी:

  • पहली संभावना (BJP में विलय): यदि 54 विधायक एक साथ बीजेपी में शामिल होने का फैसला करते हैं, तो उन पर एंटी-डिफेक्शन लॉ (दल-बदल कानून) लागू नहीं होगा और उनकी सदस्यता बची रहेगी.

  • दूसरी संभावना (असली TMC का दावा): बागी विधायक अलग गुट बनाकर चुनाव आयोग (EC) के पास ‘असली TMC’ और चुनाव चिह्न पर दावा ठोक सकते हैं. ऐसी स्थिति में मामला सुप्रीम कोर्ट तक भी जा सकता है.

फ्लैशबैक: पिछले 12 दिनों का घटनाक्रम, जिसने बढ़ाईं ममता की मुश्किलें
  • 31 मई (विधायकों का बॉयकॉट): ममता बनर्जी ने विधायकों की अहम बैठक बुलाई थी, जिसमें 80 में से सिर्फ 20 विधायक पहुंचे. 60 विधायकों के गायब रहने के चलते बैठक रद्द करनी पड़ी.

  • 31 मई (कल्याण बनर्जी पर हमला): हुगली में सांसद कल्याण बनर्जी पर कथित तौर पर बीजेपी समर्थकों द्वारा पथराव किया गया, जिसमें वे घायल हो गए.

  • 30 मई (अभिषेक बनर्जी के साथ मारपीट): दक्षिण सोनारपुर में सांसद अभिषेक बनर्जी पर चप्पल और अंडे फेंके गए. अभिषेक ने इसे अपनी हत्या की साजिश बताया.

  • 27 मई (सांसद काकोली का इस्तीफा): बारासात से सांसद काकोली घोष ने पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया. इस्तीफे से ठीक पहले वे मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की बैठक में नजर आई थीं.

  • 20 मई (धरने से दूरी): विधानसभा चुनाव में हार के बाद कोलकाता में पोस्ट-पोल हिंसा के खिलाफ TMC के धरने में 80 में से केवल 35 विधायक ही शामिल हुए, जिससे असंतोष साफ दिखने लगा था.

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