Thursday, February 26, 2026

Agniveer Scheme में सरकार कर सकती है बदलाव, परमानेंट होने वालों की संख्या में होगी बढ़ोतरी ?

नई दिल्ली  :  सेना में भर्ती के लिए साल 2022 में लागू की गई अग्निवीर योजना (Agniveer Scheme) के लिए केंद्र सरकार को शुरआती दौर में खूब विरोध का सामना करना पड़ा. पूरे देश में जगह जगह प्रदर्शन हुए ,फिर भी सरकार ने नीतियों में बदलाव का हवाला देते हुए इसे देश के भविष्य केलिए बेहतर विकल्प बताते हुए लागू किया गया. शुरुआती दौर में इस AgniveerScheme  के तहत भर्ती में शामिल सिर्फ 25 % कैंडिडेट्स को परमानेंट किया जाना था और बाकी 75 % को 4 साल की सेवा देने के लिए नियुक्त किये जाने का प्रावधान है, अब खबर है कि सरकार इस Agniveer Scheme में कुछ औऱ बदलाव करने जा रही है. सूत्रों के मुताबिक सरकार जल्द ही सेना में परमानेंट होने वाले जवानों की संख्या में इजाफा कर सकती है. फिलहाल इसे लेकर आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा गया है. मौजूदा नियमों के के अंतर्गत अग्निवीर योजना Agnivir Scheme के तहत सेना का हिस्सा बनने वाले जवानों में से 25 फीसदी को प्रशिक्षण के बाद स्थाई किये जाने का प्रवधान है.

Agniveer Scheme:25 से बढ़ाकर 50% करने पर चल रहा है विचार

दरअसल रक्षा मंत्रालय अग्निवीरों के परमानेंट किए जाने के प्रतिशत को 25 % से बढ़ाकर 50 % करने पर गहनता से विचार कर रहा है. ये जानकारी कुछ उच्च पदाधिकारियों के सूत्रों के हवाले से मीडिया में आई है . पिछले साल लागू की गई अग्निवीर योजना के अंतर्गत एक युवा को जवानों के तौर पर 4 साल केलिए सेना के अलग पदों पर  नियुक्त करने और 4 साल का समय पूरा हो जाने के बाद 75 % को एक तय राशि के साथ सेवा से अलग कर दिये जाने की योजना है.

सुझावों के बाद Agniveir Scheme में बदलाव पर चल रहा है विचार

बता दें थल सेना , जल सेना और वायु सेना तीनों में यही प्रक्रिया अपनाई गई है। तीनों सेनाओं में अग्निवीरों के पहले बैच आ चुके हैं. सूत्रों के मुताबिक योजना में सुधारों को लेकर अनेक सुझाव सेनाओं की ओर से मिले हैं. खासकर नौसेना एवं वायुसेना का कहना है कि चार साल में 75 फीसदी प्रशिक्षित अग्निवीरों को घर भेजने से उसे नुकसान है क्योंकि जैसे ही वे तकनीकी कामों में बेहतर होंगे उसके साथ ही उनका सेवाकाल पूरा हो जाएगा. जिससे सेना का वक्त पैसा और सैनिकों की ट्रेनिंग सब बेकार हो जायेगी . इससे सिर्फ और सिर्फ देश को नुक्सान ही नुकसान है.

खासतौर पर नौ सेना और वायुसेना में ज्यादातर सैनिक तकनीक कार्य करते हैं. थल सेना में भी काफी शाखाओं में जवानों को तकनीकी कार्य करना होता है. सरकारी सूत्रों के मुताबिक सुझाव पर विचार किया जा रहा है. अभी पहले बैच को भी एक ही साल हुआ है इसलिए सरकार के पास इस मामले में फैसला लेने के लिए अभी वक्त है.

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