White House on Indo-US Trade Deal : अमेरिका के आधिकारिक भवन व्हाइट हाउस ने भारत और अमेरिका के बीच हुई व्यापार समझौते को ऐतिहासिक बताया है. ट्रंप प्रशासन ने इस समझौते को लेकर अमेरिकी हित की बात करते हुए कहा कि है कि इस समझौते से भारत के बाजार अमेरिकी उत्पादों के लिए खुल गये हैं. शर्तों पर समझौते के बाद अमेरिका ने भारत पर लगने वाले अतिरिक्त रेसिप्रोकल टैरिफ को 25% से घटाकर 18% करने की बात कही है.

व्हाइट हाउस ने जारी किया बयान
अमेरिका ने आधिकारिक तौर पर एक बयान जारी किया है, जिसमें बताया गया है कि दोनों देशों के बीच किन शर्तों पर व्यापार समझौता हुआ है. बयान में कहा गया है कि अमेरिका भारत पर पर लगे 25 परसेंट रेसिप्रोकल टैरिफ को घटाकर 18 परसेंट करने पर सहमत हो गया है.
भारत ने मानी कौन-कौन सी शर्त ?
अमेरिका ने अपने बयान मे जो बाते कहीं हैं उससे इतन तो तय हो गया है कि ट्रंप का ये दावा झूठा है कि भारत अमेरिका के खिलाफ टैरिफ और नॉन-टैरिफ बैरियर को जीरो करने पर सहमत हो गया है.
व्हाइट हाउस ने अपने बयान में ये साफ किया है कि अमेरिका ने भारत पर लगने वाले रेसिप्रोकल टैरिफ केवल इसी शर्त पर हटाई है कि भारत रुस से तेल नहीं खरीदेगा. अगर भारत ये शर्त तोड़ता है तो अमेरिका एक बार फिर से भारत पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगा देगा.
भारत ने इन वस्तुओं से हटाया टैरिफ
व्हाइट हाउस ने बताया कि भारत कई तरह के उत्पाद पर टैरिफ हटाने को लेकर राजी हो गया है. जिन वस्तुओं पर से भारत ने टैरिफ हटाया या कम किया है, उनमें यूएस से आने वाले इंडस्ट्रियल सामानों और कई तरह के खाने पीने वाली चीजें और खेती के प्रोडक्ट्स शामिल हैं. खाने पीने की चीजों में सूखे डिस्टिलर्स ग्रेन (DDGs), लाल ज्वार, ट्री नट्स, ताजे और प्रोसेस्ड फल, कुछ दालें, सोयाबीन तेल, वाइन और स्पिरिट्स और दूसरे प्रोडक्ट्स शामिल हैं.
बयान मे ये भी साफ किया गया है कि भारत ने ज्यादा से ज्यादा अमेरिकी प्रोडक्ट्स खरीदने और 500 बिलियन डॉलर से ज्यादा के एनर्जी, इन्फॉर्मेशन और कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी और एग्रीकल्चरल कोल से साथ सथ कई दूसरे यूएस प्रोडक्ट्स खरीदने का वादा किया है.
भारत ने किन बातों पर जताई सहमति?
व्हाइट हाउस के बयान में कहा गया है कि नई दिल्ली ने प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में दोतरफा व्यापार के दौरान असर डालने वाली रुकावटों को दूर करने पर भी सहमति जताई है.भारत ने कहा है कि वो अपने डिजिटल सर्विस टैक्स भी हटा देगा. इससे दोनो देशो के बीच मजबूत बाइलेटरल डिजिटल ट्रेड नियमों पर बातचीत हो सकेगी. इसमें इलेक्ट्रॉनिक ट्रांसमिशन पर कस्टम ड्यूटी लगाने पर रोक लगाने वाले नियम भी शामिल हैं.

