Border 2 Review : 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध की पृष्ठभूमि पर बनी फिल्म बॉर्डर 2 (Border-2) केवल एक वॉर फिल्म नहीं, बल्कि ये फिल्म भारत की शस्त्र सेनाओं के साहस और बलिदान की कहानी है. ये फिल्म 13 जून 1997 में जेपी दत्ता की फिल्म बॉर्डर की कहानी को आगे बढ़ाती है और इसे एक बड़े स्केल पर लेकर जाती है. इस फिल्म में दिखाया गया है कि भारत पाकिस्तान के बीच 1971 में हआ युद्ध केवल लोंगेवाला तक सीमित नहीं था, बल्कि ये लड़ाई तो जमीन, हवा और समुद्र तीनों मोर्चों पर लड़ा गया था.
Border 2 Review : फिल्म की कहानी
बोर्डर 2 की कहानी में इमोशन भी है और गंभीरता भी. कहनी केवल गोले बारुद की नहीं बल्कि युद्ध की विभिषिका के दौरान उसे लड़ने वाले सैनिकों के अंदर चल रहे भय , भरोसे और जिम्मेदारी के एहसास को भी सामने लाती है, कई जगह पर कहानी थोड़ी ठहरी हुई सी लगती है, लेकिन यही ठहराव कहानी को गहराई भी देती है.
फिल्म की कहानी कई मोर्चों पर एक साथ चलती है. देश के अलग-अलग हिस्सों से आये सैनिक एक साथ जमा होते हैं. सबके रंग-रुप, भाषा अलग हैं लेकिन लक्ष्य एक ही .. देश की रक्षा. फिल्म में दिखाया गया है कि 1971 में भारत पाकिस्तान के बीच जो युद्ध हुआ वो केवल जमीन से जमीन पर ही नहीं लड़ा गया बल्कि धरती आकाश और समुद्र के रास्ते एक साथ कई मोर्चो से हमले किये गये लेकिन कैसे भारतीय सैनिकों की रणनीति, समझदारी और हिम्मत के आगे हर दुश्मन का हर कोशिश नाकाम हो गई.
फिल्म में एक्टिंग
लंबे अरसे के बाद सनी देओल अपने रंग मे दिखे हैं . फिल्म में सनी देओल लीड रोल में हैं, वहीं दलजीत दोसांझ , वरुण धवन , अहान शेट्टी के अभियन ने भी आसमान को छुआ है.
फिल्म में लीड रोल में मौजूद सनी देओल इसकी बड़ी ताकत लगते हैं. दमदार डायलॉग डिलीवरी से लोग तालियां और सीटियां बजाते के लिए मजबूत हो जाते हैं. सनी देओल का आक्रामक अंदाज, अपने लक्ष्य लिए जुनून और देशभक्ति का जज्बा दर्शको में भी जोश भर देता है.बोर्डर 2 में भी सनी देओल अपने पूरे रंग में नजर आते हैं.
बात दलजीत दोसांझ की करे तो ये गंभीर और संजीदा कलाकार फिल्म की आत्मा जान पड़ता है. तनावपूर्ण सीन्स में भी सहज एक्टिंग के साथ साथ सॉफ्ट कॉमेडी से पूरे माहौल को खुशनुमा बना देते हैं. उनका किरदार बहुत अपनापन लेकर आता है , जो युद्ध की कठोरता के बीच एक सुखद अहसास कराता है.
वरुण धवन और अहान शेट्टी भी काफी सधे हुए नजर आते हैं. वरुण धवन जहां अपनी गंभीरता से बिना शोर के मजबूती कैरेक्टर बनते हैं, वहीं अहान शेट्टी अपने छोटे से रोल के बाद भी पर्दे पर प्रभाव छोड़ जाते हैं. स्क्रीन पर उनकी ईमानदारी और जोश साफ नजर आती है.
फिल्म में फीमेल लीड नहीं है, जिनकी कमी खलती है, लेकिन ये फिल्म पूरी तरह से युद्ध के मैदान की पृष्ठभूमि पर बनी है, इस लिए कहानी पूरी तरह से युद्ध को ही फोकस करती है.
फिल्म के डायरेक्टर अनुराग सिंह इस व़र स्टोरी के साथ पूरी तरह से जस्टिस करते नजर आते हैं.इमोशन से भरी वॉर एपिक कहनी बनाई है, जो कल्ट कल्सिक बॉर्डर 1 के साथ पूरी तरह से न्याय करती है. फिल्म का संगीत कहानी को पूरी तरह से सपोर्ट करता है, गाने दिल पर छाप छोड़ जाते हैं.
सिनेमैटोग्राफी और साउंड कमाल का है. बार्डर 1 के मुकाबले फिल्म का कैनवस बड़ा और भव्य है. वॉर जोन, सैनिकों, धमाके की आवाज आदि को असरदार तरीके से दिखाया गया है. साउंड डिजाइन इतना जबर्दस्त है कि इससे हर सीन का इम्पैक्ट और रोमांच बढ़ जाता है.
देखने लायक है या नहीं ये फिल्म ?
Border 2 को क्रिटिक तरण आदर्श ने साढे चार स्टार देते हुए आउटस्टैंडिंग करार दिया है. फिल्म एक बड़े स्केल पर बनी इमोशनल और दमदार वॉर एपिक है.महिला किरदार कुछ खास नहीं हैं, लेकिन कहानी के हिसाब से मौजूद एक्टर्स की मजबूत एक्टिंग, सॉलिड डायरेक्शन और पावरफुल कहानी इसे देखने लायक बनाती है. फिल्म The End के साथ दर्शकों के बीच दिल में गर्व, सम्मान और भारतीय सैनिकों के लिए ना खत्म होने वाला सम्मान छोड़ जाती है.

