5 State Election Reusult : पांच राज्यों—पश्चिम बंगाल, असम, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी—में हुए हाई-वोल्टेज विधानसभा चुनावों के बाद अब फैसले की घड़ी आ गई है. सोमवार सुबह 8 बजे से इन राज्यों में मतगणना शुरू हो जाएगी, जिसके साथ ही महीनों से चल रही राजनीतिक उठापटक और दावों का अंत होगा. सबसे पहले डाक मतपत्रों (पोस्टल बैलेट) की गिनती की जाएगी और उसके तुरंत बाद ईवीएम के जरिए डाले गए वोटों के पिटारे खुलेंगे. यह चुनाव न केवल क्षेत्रीय दलों के लिए अपनी जमीन बचाने की लड़ाई है, बल्कि भाजपा और कांग्रेस जैसे राष्ट्रीय दलों के लिए भी भविष्य की दिशा तय करने वाला लिटमस टेस्ट साबित होगा.
5 State Election Reusult:अभेद्य सुरक्षा इंतजाम,QR कोड से मिलेगी एंट्री
चुनाव आयोग ने इस बार सुरक्षा के बेहद कड़े और आधुनिक इंतजाम किए हैं. मतगणना केंद्रों पर त्रि-स्तरीय सुरक्षा घेरा तैयार किया गया है, जिसमें केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल की दर्जनों कंपनियां तैनात हैं. सुरक्षा को और पुख्ता बनाने के लिए पहली बार क्यूआर कोड आधारित फोटो पहचान पत्र सिस्टम लागू किया गया है, ताकि किसी भी अनधिकृत व्यक्ति का प्रवेश रोका जा सके. रिटर्निंग अधिकारियों और पर्यवेक्षकों को छोड़कर किसी भी व्यक्ति को मतगणना केंद्र के भीतर मोबाइल फोन ले जाने की अनुमति नहीं दी गई है.
पश्चिम बंगाल और असम: प्रतिष्ठा की सबसे बड़ी जंग
पश्चिम बंगाल की 293 सीटों के लिए 77 केंद्रों पर वोटों की गिनती होगी. पश्चिंम बंगाल के एक विधानसभा क्षेत्र फलता पर पुनर्मतदान का आदेश हुआ है, इसलिए उसकी गिनती बाद में होगी. इस बार राज्य में 92.47 प्रतिशत का ऐतिहासिक मतदान हुआ है, जो ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस और भाजपा के बीच की कड़ी टक्कर को दर्शाता है. हालांकि, दक्षिण 24 परगना की फलता सीट पर गड़बड़ी के कारण वहां 21 मई को दोबारा वोटिंग होगी, इसलिए उसका परिणाम अभी नहीं आएगा. वहीं असम में भाजपा नीत एनडीए तीसरी बार सत्ता में वापसी की उम्मीद लगाए बैठा है, जहां 126 सीटों के लिए 40 केंद्रों पर सुरक्षा के कड़े पहरे में गिनती होगी.
दक्षिण का संग्राम: केरल और तमिलनाडु में बदलाव की आहट
केरल में इस बार मुकाबला बेहद रोचक है क्योंकि अगर वाम मोर्चा (LDF) सत्ता से बाहर होता है, तो यह भारतीय राजनीति में वामपंथ के लिए एक बड़ा झटका होगा. वहां 140 सीटों के लिए 883 उम्मीदवारों की किस्मत का फैसला होना है. दूसरी तरफ, तमिलनाडु की 234 सीटों पर डीएमके अपनी सत्ता बरकरार रखने की कोशिश में है, लेकिन अन्नाद्रमुक के अलावा अभिनेता विजय और सीमन की पार्टियों ने मुकाबले को बहुकोणीय बना दिया है. पुडुचेरी में भी एनडीए और विपक्षी गठबंधन के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिल रही है.
क्या कहते हैं राजनीतिक विशेषज्ञ?
वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इन चुनावों के नतीजे आगामी राष्ट्रीय राजनीति की धुरी तय करेंगे. विशेषज्ञों के अनुसार, “यदि पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी वापसी करती हैं, तो यह विपक्षी एकता का नया केंद्र बनेगा. वहीं असम में भाजपा की जीत उसके पूर्वोत्तर दुर्ग को और मजबूत करेगी. केरल और तमिलनाडु के नतीजे यह बताएंगे कि क्या दक्षिण भारत में अभी भी क्षेत्रीय अस्मिता और पारंपरिक गठबंधन ही हावी हैं या वहां नए राजनीतिक चेहरों के लिए जगह बन रही है.” जानकारों का यह भी कहना है कि इन परिणामों का असर आगामी राज्यसभा चुनावों और पार्टी नेतृत्व के आंतरिक समीकरणों पर भी पड़ेगा.

