Tuesday, February 17, 2026

G Ram G bill पेश, बिल पेश होने के बाद लोकसभा 2 बजे तक स्थगित, संसद के बाहर विपक्ष का प्रदर्शन, प्रियंका गांधी ने संभाला विपक्ष की ओर से मोर्चा

संसद का शीतकालीन सत्र अपने आखिरी दौर में है, और मंगलवार को लोकसभा में कई बिल पेश किए गए. सरकार ने UPA-काल की MGNREGA योजना की जगह लेने के लिए लोकसभा में विकसित भारत – रोज़गार और आजीविका मिशन (ग्रामीण), जिसे VB–G Ram G bill पेश किया.
वैसे तो इस बिल को सोमवार को पेश किया जाना था, लेकिन केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इसे मंगलवार को पेश किया.
कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने मंगलवार को कई मुद्दों पर इस बिल का विरोध किया, जिसमें MGNREGA की तुलना में केंद्र सरकार की हिस्सेदारी में कमी भी शामिल है.

G Ram G bill के खिलाफ संसद के द्वार पर विपक्ष का प्रदर्शन

विपक्षी सांसदों ने MGNREGA का नाम बदलने के मुद्दे पर संसद में मकर द्वार के बाहर विरोध प्रदर्शन किया.

लोकसभा दोपहर 2 बजे तक स्थगित

G-RAM-G बिल पेश होने के बाद लोकसभा में भारी हंगामा देखने को मिला. विपक्ष इस बिल को वापस लेने की मांग कर रहा था. जिसके चलते लोकसभा के स्पीकर ने दोपहर 2 बजे तक स्थगित कर दी गई.

शिवराज चौहान ने पूछा कि विपक्ष राम के नाम के खिलाफ क्यों है

शिवराज चौहान ने जवाहर रोज़गार योजना का हवाला देते हुए G-RAM-G बिल का बचाव किया, और कहा कि कांग्रेस ने इसका नाम बदल दिया था. शिवराज चौहान ने पूछा कि विपक्ष राम के नाम के खिलाफ क्यों है

शशि थरूर ने जी-राम-जी बिल का विरोध किया

शशि थरूर ने जी-राम-जी बिल का विरोध करते हुए कहा कि महात्मा गांधी का ‘राम राज्य’ का विजन कोई राजनीतिक कदम नहीं था.
उन्होंने कहा, मेरा पहला ऑब्जेक्शन, जैसा कि दूसरों का भी है, राष्ट्रपिता का नाम हटाने का गलत फैसला है, जिसके कारण पहले ही बताए जा चुके हैं, जिन्हें मैं दोहराऊंगा नहीं. लेकिन यह सिर्फ एक एडमिनिस्ट्रेटिव बदलाव नहीं है; यह इस ज़रूरी प्रोग्राम की मूल भावना और फिलॉसॉफिकल बुनियाद पर हमला है.

महात्मा गांधी का राम राज्य का विज़न कभी भी पूरी तरह से पॉलिटिकल प्रोजेक्ट नहीं था. यह गांवों को मज़बूत बनाने पर आधारित एक सामाजिक-आर्थिक ब्लूप्रिंट था, और ग्राम स्वराज में उनका अटूट विश्वास उस विज़न का मुख्य हिस्सा था. मूल एक्ट में उनका नाम होने से इस गहरे जुड़ाव को माना गया था – कि सच्ची रोज़गार गारंटी और तरक्की ज़मीनी स्तर से होनी चाहिए, जो सबसे आखिरी व्यक्ति को सबसे पहले रखने के उनके सिद्धांत को दिखाता है. महात्मा गांधी का नाम हटाना बिल से उसकी नैतिक दिशा और ऐतिहासिक वैधता छीन लेना है.

जी-रैम-जी बिल के खिलाफ विपक्ष एकजुट

जी-रैम-जी बिल के खिलाफ विपक्ष का विरोध, कई सांसदों ने नियम 72 के तहत अलग-अलग मुद्दों पर अपनी आपत्तियां जताईं.

प्रियंका गांधी ने G-RAM-G बिल के ज़रिए केंद्र के हिस्से में कटौती का विरोध किया

संसद शीतकालीन सत्र LIVE अपडेट: प्रियंका गांधी MGNREGA की तुलना में G-RAM-G बिल के ज़रिए केंद्र के हिस्से में कटौती का विरोध कर रही हैं.
कांग्रेस सासंद ने कहा, महात्मा गांधी रोजगार गारंटी कानून (मनरेगा) पिछले 20 साल से ग्रामीण भारत को रोजगार देने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में सक्षम रहा है. यह ऐसा क्रांतिकारी कानून है कि जब इसको बनाया गया तो सदन के सभी राजनीतिक दलों ने इससे सहमति जताई. इसके द्वारा गरीब से गरीब लोगों को 100 दिन का रोजगार मिलता है. जब हम अपने क्षेत्रों में जाते हैं, तो दूर से ही दिख जाता है कि कौन से लोग मनरेगा के मजदूर हैं. उनके चेहरे पर झुर्रियां होती हैं और हाथ पत्थर के हो चुके होते हैं. मनरेगा के तहत हमारे गरीब-भाई बहनों को रोजगार की जो कानूनी गारंटी मिलती है, वह इस योजना में मांग के आधार पर संचालित होती है. मतलब जहां रोजगार की मांग है, वहां इस योजना के द्वारा 100 दिनों का रोजगार देना अनिवार्य है. इसके साथ ही केंद्र से इसके लिए जो पूंजी जाती है, वह भी जमीनी स्तर की मांग पर आधारित होती है. लेकिन इस विधेयक में केंद्र को यह अनुमति दी गई है कि वह पहले से निर्धारित कर ले कि कितनी पूंजी किस राज्य को भेजी जाएगी. इससे संविधान के 73वें संविधान संशोधन को नजरअंदाज किया जा रहा है.
उन्होंने कहा कि, हर योजना का नाम बदलने की सरकार की सनक हमें समझ नहीं आती. जब-जब ऐसा किया जाता है, तब केंद्र को पैसे खर्च करने पड़ते हैं. बिना चर्चा और सदन की सलाह लिए इस विधेयक को पास नहीं किया जाना चाहिए. यह विधेयक वापस लिया जाना चाहिए, इसके बदले एक नया विधेयक पास किया जाना चाहिए. गहन जांच और व्यापक चर्चा के लिए यह बिल संसद की स्थायी समिति को भेजा जाए.

शिवराज चौहान ने मनरेगा की जगह G-RAM-G बिल पेश करने के लिए इजाजत मांगी

हंगामे के बीच शिवराज चौहान ने मनरेगा की जगह G-RAM-G बिल पेश करने के लिए इजाजत मांगी है.

सबका बीमा सबकी रक्षा (बीमा कानूनों में संशोधन) विधेयक, 2025 पेश किया गया

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लोकसभा में सबका बीमा सबकी रक्षा (बीमा कानूनों में संशोधन) विधेयक, 2025 पेश किया, जो भारत के बीमा ढांचे को मजबूत करने के लिए प्रमुख बीमा-संबंधित कानूनों में और संशोधन करने के उद्देश्य से एक प्रस्तावित कानून है.

विपक्ष ने ‘सबका बीमा सबकी रक्षा (बीमा कानूनों में संशोधन) बिल’ का विरोध किया

विपक्ष ने ‘सबका बीमा सबकी रक्षा (बीमा कानूनों में संशोधन) बिल’ का विरोध किया है, जिसमें कई सदस्यों ने कानूनों के ‘हिंदीकरण’ पर आपत्ति जताई है.

निर्मला सीतारमण ने ‘सबका बीमा सबकी रक्षा बिल’ का बचाव किया

निर्मala सीतारमण ने ‘सबका बीमा सबकी रक्षा (बीमा कानूनों में संशोधन) बिल’ का बचाव करते हुए कहा कि सब कुछ ‘चर्चा का हिस्सा’ है.

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