Supreme Court : 8 जनवरी को पालिटिकल कंसल्टेंसी फर्म I-PAC पर छापेमारी के दौरान सरकारी काम में बाधा पहुंचाने के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय ने मुख्यमंत्री ममता बैनर्जी, डीजीपी राजीव कुमार और कोलकाता के पुलिस कमिश्नर मनोज वर्मा के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगई है. याचिका में ED ने कहा है कि 8 जनवरी को कोलकाता में IPAC निदेशक प्रतीक जैन के घर और उनके अन्य ठिकानों पर हुई छापेमारी के दौरान अधिकारियो के काम में बाधा डाली गई, वहां मौजूद कई सबूतों से छेड़छाड़ हुई और कई डिजिटल उपकरण जबरन ले लिए गए.
Supreme Court में ईडी के आरोप
प्रवर्तन निदेशालय ने सीएम ममता बैनर्जी और राज्य पुलिस पर सरकारी काम में बाधा पहुंचाने का आरोप लगाया है. इडी ने अपनी याचिका में सीएम ममता बैनर्जी पर एक वैधानिक काम मे बाधा पहुंचा कर घोटाले की जांच को पटरी से उतारने की कोशिश बताया है. आरोप लगाया कि जानबूझकर यहां साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ हुई और सबूतों को नष्ट किया गया.
सुप्रीम कोर्ट उन स्थानों पर छापेमारी की जानकारी दी गई, जहां 8 जनवरी को ईडी की टीम पहुंची थी. ईडी ने कोर्ट को बताया कि ताजा छापेमारी मनी लांड्रिंग(PMLA) के तहत दर्ज धाराओं के तहत हुई थी. ये छापेमारी कोलकाता में दो जगहों पर हुई- पार्क स्ट्रीट में मौजूद प्रतीक जैन के आवास और बिधाननगर के सेक्टर-वी में इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी कंसल्टिंग (IPAC) प्राइवेट लिमिटेड (IPAC) के दफ्तर में.
2,742.32 करोड़ के कोयला घोटाले के जांच
ये मामला 2,742.32 करोड़ के कोयला घोटाले और उससे मिले पैसों की मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा है. ईडी ने दावा किया कि पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी टीएमसी ने गोवा के चुनाव में दी गई सेवाओं के लिए IPAC को हवाला के जरिये 20 करोड़ रुपये से अधिक की दी गई.इस मामले में जांच के लिए जब ईडी की टीम पहुंची तो सीएम ममता बनर्जी वहां 100 से अधिक पुलिसकर्मियों के साथ आ गई है, वहां उन्होंने अधिकारियों से कुछ फाइलें, प्रतीक जैन का फोन और कुछ अन्य दस्तावेज ले लिये .
ईडी का आरोप है कि वहां अधिकारियो को धमकाया और डराया गया, जिसके कारण पंचनामा की कार्यवाही प्रभावित हुई और जांच पूरी नहीं करने दी गई. फिर पश्चिम बंगाल सरकार ने दुर्भावना बस और बदले की कार्रवाई के तहत ईडी के अधिकारियों के खिलाफ कोलकाता के अलग-अलग थानों में चार FIR दर्ज करा दी. ईडी ने याचिका में ये भी कहा है कि कलकत्ता हाईकोर्ट में इस मामले की सुनावई के दौरान सत्तारूढ़ दल (टीएमसी) के समर्थकों ने हंगामा किया, जिसके कारण कोर्ट में सुनवाई की सुनवाई नहीं हो सककी. ED का तर्क है कि ऐसे हालात में हाई कोर्ट में वैकल्पिक उपाय प्रभावहीन हो गये.

