प्रयागराज
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि आठ साल की अपनी ही बेटी का सगे पिता द्वारा यौन शोषण क्षम्य अपराध ही नहीं, ऐसे अपराध समाज के लिए नासूर है. ऐसे आरोपी पिता को जमानत पर छोड़ा गया तो समाज में गलत संदेश जाएगा.
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गाजियाबाद के मोदीनगर मे रहने वाले हरिओम शर्मा की जमानत अर्जी खारिज करते हुए उसे रिहा करने से इन्कार कर दिया और सत्र अदालत (sessions court) को छह महीने में ट्रायल पूरा करने का निर्देश दिया है.
यह आदेश न्यायमूर्ति शेखर कुमार यादव ने दिया है.
आरोपी हरिओम शर्मा की पत्नी ने उसके खिलाफ अपनी ही नाबालिग बेटी का यौनशोषण करने का आरोप लगाया है. पीड़िता ने अदालत में अपने पिता की गंदी करतूतों का खुलासा किया है.
याचिकाकर्ता हरिओम शर्मा का कहना है कि पारिवारिक विवाद और संपत्ति के लिए उसकी पत्नी ने बेटी को ढाल बनाकर झूठे आरोप लगाये है.वह सगा बाप है.ऐसी घिनौनी हरकत नहीं कर सकता.
कोर्ट ने कहा कि सुनवाई चल रही है, पिलहाल आरोपी जमानत पाने का हकदार नहीं हैं.

