छत्तीसगढ़ में UCC लागू करने की तैयारी तेज, सरकार ने जनता से मांगे सुझाव

Chhattisgarh UCC Implementation रायपुर : छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य में यूनिफॉर्म सिविल कोड (Uniform Civil Code-UCC) लागू करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है. सरकार ने प्रस्तावित UCC के मसौदे पर आम जनता से सुझाव और आपत्तियां आमंत्रित की हैं. राज्य सरकार का कहना है कि नागरिकों की भागीदारी से तैयार होने वाला कानून अधिक व्यावहारिक और व्यापक होगा.

सरकार ने स्पष्ट किया है कि इच्छुक नागरिक 15 अक्टूबर 2026 तक अपने सुझाव, सुझावों में संशोधन या आपत्तियां निर्धारित माध्यमों से दर्ज करा सकते हैं. प्राप्त सभी सुझावों का अध्ययन करने के बाद अंतिम मसौदा तैयार किया जाएगा.

Chhattisgarh UCC Implementation में जन भागीदारी पर सरकार का जोर

राज्य सरकार का कहना है कि UCC जैसे महत्वपूर्ण विषय पर व्यापक जनभागीदारी आवश्यक है. इसलिए विभिन्न वर्गों, सामाजिक संगठनों, विधि विशेषज्ञों, शिक्षाविदों और आम नागरिकों से राय लेने की प्रक्रिया शुरू की गई है.

सरकार का मानना है कि सार्वजनिक सुझावों से ऐसा कानून तैयार करने में मदद मिलेगी जो समाज के विभिन्न वर्गों की अपेक्षाओं और संवैधानिक मूल्यों के अनुरूप हो.

क्या है यूनिफॉर्म सिविल कोड?

यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) का उद्देश्य विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, गोद लेने और संपत्ति के बंटवारे जैसे नागरिक मामलों के लिए सभी नागरिकों पर समान कानून लागू करना है. वर्तमान में इन विषयों पर अलग-अलग समुदायों के लिए अलग-अलग व्यक्तिगत कानून लागू होते हैं. संविधान के नीति निदेशक तत्वों के अनुच्छेद 44 में राज्य को समान नागरिक संहिता लागू करने का प्रयास करने की बात कही गई है.

सुझाव देने की अंतिम तिथि 15 अक्टूबर

सरकार ने नागरिकों से अपील की है कि वे 15 अक्टूबर 2026 तक अपने सुझाव निर्धारित प्रक्रिया के तहत भेजें. प्राप्त सुझावों का परीक्षण करने के बाद विशेषज्ञ समिति अंतिम मसौदे को तैयार करेगी, जिसके आधार पर आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी की जाएगी.

राजनीतिक और कानूनी दृष्टि से अहम पहल

छत्तीसगढ़ में UCC को लेकर शुरू की गई यह प्रक्रिया राजनीतिक और कानूनी दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जा रही है. इससे पहले देश के कुछ राज्यों में भी समान नागरिक संहिता को लेकर पहल की जा चुकी है. अब छत्तीसगढ़ सरकार भी जनसहभागिता के माध्यम से इस दिशा में आगे बढ़ रही है.

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि व्यापक सहमति के साथ मसौदा तैयार होता है तो यह राज्य में नागरिक कानूनों को लेकर एक महत्वपूर्ण बदलाव साबित हो सकता है. वहीं, विभिन्न सामाजिक और धार्मिक संगठनों की राय भी इस प्रक्रिया में अहम भूमिका निभाएगी।

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