Swami Avimukteshwaranand : प्रयागराज माघ मेला में मौनी अमावस्या पर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का अपने 200-300 शिष्यों के साथ पहुंचने और स्नान करने से रोके जाने का मामला गर्मा गया है. स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को प्रशासन ने सुरक्षा कारणों का हवाला स्नान करने से रोक दिया. जिसके बाद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और प्रशासन के बीच बवाल बढ़ गया है. प्रयागराज में मंगलवार को तमाम सवालो के बीच पुलिस प्रशासन ने एक प्रेस काफ्रेंस बुलाई लेकिन जब संतो के साथ दुर्व्याहार के मामले में और 24 घंटे में जवाब देने के मामले पर सवाल पूछे गये तो अधिकारी बिना जवाब दिये वहां से उठकर जाने लगे.
🚨“अरे, भाग क्यों रहे हैं? जवाब दीजिए।”
यूपी के पत्रकारों ने आज रीढ़ दिखाई।
अधिकारियों को बिना जवाब दिए जाने नहीं दिया।शंकराचार्य मसले पर
प्रेस कांफ्रेंस खत्म कर निकल रहे थे।
पत्रकारों ने ऐसा घेरा कि
डीएम, कमिश्नर, पुलिस कमिश्नर
सबको उल्टे पांव लौटना पड़ा।आज पत्रकारिता… pic.twitter.com/h9yEjiR1jb
— Adv. Vijay Singh (@VijaySingh_law) January 19, 2026
Swami Avimukteshwaranand ने प्रशासन पर लगाया दुर्व्यावहार का आरोप
स्वामी अविमुक्तश्वरानंद ने स्थानीय प्रशासन पर उनके साथ दुर्व्यवहार करने का आरोप लगाया.उन्होने मीडिया से बात करते हुए प्रयागराज के पुलिस आयुक्त जोगिंदर कुमार पर जमकर हमला बोला.उन्होंने कहा कि अधिकारी ने ना केवल उनका अपमान किया बल्कि अनर्गल आरोप भी लगाये.
“यह जो व्यक्ति है, यही सबसे ज्यादा हठधर्मी वहां पर था”
In the fresh episode of UP government vs Swami Avimukteshwaranand, the latter can be heard targeting Joginder Kumar, Prayagraj police commissioner. pic.twitter.com/8Zej9aWAWZ
— Piyush Rai (@Benarasiyaa) January 20, 2026
दरअसल उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने स्वामी अविमुक्तेश्वरा नंद को बताया है कि वो शंकराचार्य हैं ही नहीं. प्रयागराज प्रशासन ने एक नोटिस जारी करके उनसे शंकराचार्य पद के दावे पर स्पष्टीकरण मांगा है. प्रशासन ने अपने नोटिस में सुप्रीम कोर्ट में लंबित सिविल अपील (संख्या 3010/2020 और 3011/2020) का संदर्भ देते हुए कहा कि शीर्ष अदालत ने अक्टूबर 2022 में किसी भी ज्योतिष्पीठ के नये शंकराचार्य के पट्टाभिषेक पर रोक लगा दी थी.
Shankaracharya Swami Avimukteshwaranand Challenges State Authority, Says “Even India’s President Cannot Decide Who is a Shankaracharya”
Shankaracharya Swami Avimukteshwaranand has asserted that the title and authority of a Shankaracharya cannot be determined by the state. He… pic.twitter.com/gfJ79CCzSy
— Atulkrishan (@iAtulKrishan1) January 20, 2026
इस नोटिस में कहा गया है कि जब सुप्रीमकोर्ट ने अंतिम फैसला होने तक किसी को भी शंकराचार्य की नियुक्ति से मना कर दिया है, तो स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद अपने शिविर और बोर्ड पर एक शंकराचार्य के रुप में आसीन कैसे हैं. प्रयागराज प्रशासन ने स्वामी अविमुक्तेश्वरा नंद पर शंकराचार्य के पद का दुरुपयोग करने का आरोप लगाया है. प्रशासन ने स्वामी अविमुक्तश्वरा नंद से कहा है कि वो प्रशासन के इस नोटिस का 24 घंटे मे जवाब दें कि उनके कृत्ल को अदालत की अवमानना क्यों ना माना जाये.
At 12:18 am, UP govt sent a notice to Shankaracharya Avimukteshwaranand, seeking explanation for use of title ‘Shankaracharya ‘ since case regarding Pattabhishek is pending in Supreme Court.
Notice issued on behalf of Prayagraj Mela Authority. pic.twitter.com/9wlLABwYl5
— Akanksha Kumar (@akanksha_kumar3) January 20, 2026
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को लेकर क्या है प्रशासन की आपत्ति?
अपने नोटिस में प्रशासन ने ये स्पष्ट किया है कि इस साल के माघ मेला के दौरान स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के शिविर में लगे बोर्ड और पोस्टरों पर उन्हें ‘ज्योतिष्पीठ का शंकराचार्य’ कह कर प्रदर्शित किया जा रहा है.जबकि ये सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के खिलाफ है.
माघ मेले में धरने पर बैठे हैं स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद
आपको बता दें कि मौनी अमावस्या के दिन प्रयागराज में शाही स्नान करने पहुंचे शंकराचार्य को प्रशासन ने व्यवस्था का हवाला देते हे स्नान करने से रोक दिया था. जिसके बाद शंकराचार्य वहीं अपने समर्थको के साथ धरने पर बैठ गये. प्रशासन ने यहां धरने पर बैठे साधुओं को उठाने के लिए बल प्रयोग किया, दिसमें कई साधु सन्यसियों को चोटे भी आई हैं. इस घटना को लेकर प्रयागराज मे काफी रोष है. इस मामले पर आज उच्च अधिकारियों की एक प्रेस काँफ्रेंस भी हुई जिसमें अधिकारी पत्रकारों के सवालों के जवाब दिये बिना वहां से चले गये.

