Swami Avimukteshwaranand : माघ मेले में अपने शिष्यो के साथ पहुंचे शंकराचार्य स्वामी अविनुक्तेश्वरानंद को प्रयागराज माघमेला प्रशासन ने एक बार फिर से नोटिस भेजा है. प्रशासन ने स्वामी अविनुक्तेश्वरानंद को ये नोटिस 48 घंटे मे दूसरी बार भेजा है. नोटिस में उन्हें कहा गया है कि वो इस बात का जवाब दें कि उन्होंने माघ मेले वाले दिन बैरियर तोड़ने और जबरन भीड़ के बीच पालकी लेकर घुसने की कोशिश क्यों की ?

Swami Avimukteshwaranand को मेला प्रशासन ने नोटिस में क्या लिखा है ?
प्रयागराज मेला प्राधिकरण की ओर से जारी नोटिस में पूछा गया है कि स्वामी जी ये बतायें कि मौनी अमावस्या वाले दिन उनके आचरण से मेले की व्यवस्था छिन्न-भिन्न हुई थी, लाखों श्रद्धालुओं की सुरक्षा को खतरा पैदा हो गया था. तो स्वामी जी ने ऐसा क्यों किया? मेला प्रशासन ने अपने नोटिस मे कहा है कि आपके आचरण के कारण मेला में ये लाखों श्रद्धालुओं के लिए इमरजेंस जैसे हालात बन गये. मेला प्रशासन मे स्वामी अविमुक्तेश्वार नंद से इन आरोपों के जबाब अगले 48 घंटों में मांगा है. जवाब ना आने की स्थिति में मेला प्रशासन ने कहा कि अगर उन्होंने नोटिस का जवाब नहीं दिया तो इस स्थिति में प्रशासन मेला स्थल पर दी गई जमीन और सुविधाएं निरस्त कर सकता है. इसतना ही नहीं स्वामी अविमुक्तेश्रानंद को प्रशासन हमेशा के लिए इस मेले में आने से प्रतिबंधित (बैन) भी कर सकता है.
स्वामी अविमुक्तेश्वरा नंद ने भेजा काउंटर नोटिस
पिछले 4 दिन से माघ मेले में धरने पर बैठे स्वामी अविमुक्तेश्वरा नंद ने मेला प्रशासन के नोटिस के जवाब में काउंटर नोटिस भेजा है, जिसमें उन्होने नोटिस वापस लेने की मांग की है. स्वामी अविमुक्तेश्वरा नंद ने नोटिस वापस ना लेने के स्थिति में प्रशासन को कानूनी कार्रवाई (कंटेंप्ट ऑफ कोर्ट) की चेतावनी दी है. उन्होंने प्रशासन के पहले नोटिस को सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवमानना है और प्रशासन पर साजिश का आरोप लगाया.
स्वामी अविमुक्तेश्वरा नंद ने आरोप लगाया कि योगी सरकार और प्रशासन उनके खिलाफ साजिश कर रही हैं, क्योंकि शंकराचार्य पद परंपरा से तय होता है, न कि प्रशासन या कोर्ट से कागज मांगकर. ऐसे में प्रशासन किस हक से उनसे शंकराचार्य होने के कागज मांग रहा है.
मेला प्रशासन ने पहले नोटिस में क्या लिखा था ?
आपको बता दें कि माघ मेले में स्नान के लिए पहुंचे शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरा नंद से मेला प्रशासन पूछा है कि वो शंकराचार्य कैसे हैं. उनके शंकराचार्य होने के क्या प्रमाण हैं ?
प्रशासन ने इन सवालों के साथ ही 18 जनवरी यानी मौनी अमावस्या के दिन स्वामी को नोटिस भेजा और 24 घंटे में इसका जवाब देन के लिए कहा. उस दिन से मेला प्रशासन और स्वामी अविमुक्तेश्वरा नंद के बीच विवाद जारी है. इस बीच देशभर के शंकराचार्या और साधुसंत स्वामी अविनक्तेश्वरा नंद के समर्थन में आ रहे हैं. विपक्षी दल इसे संतो का अपमान बता रहे हैं. समाझवादी पार्टी और कांग्रेस का कहना है कि सरकार विनाशकाले विपरीत बुद्धि का प्रयोग कर रही है.

