US-Israel Air Strikes : वॉशिंगटन/तेहरान: मध्य पूर्व में युद्ध की लपटें अब बेकाबू होती दिख रही हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के बीच जारी जुबानी जंग अब धरातल पर भीषण सैन्य कार्रवाई में तब्दील हो गई है. ट्रंप द्वारा दी गई औपचारिक डेडलाइन अभी समाप्त भी नहीं हुई थी कि अमेरिकी और इजरायली वायुसेना ने ईरान समर्थित विद्रोहियों के ठिकानों पर सात विनाशकारी एयरस्ट्राइक कर अपनी मंशा साफ कर दी है. इस सैन्य कार्रवाई ने पूरी दुनिया को एक बड़े क्षेत्रीय युद्ध की दहलीज पर खड़ा कर दिया है.
US-Israel Air Strikes ने साफ कर दिया ट्रंप का इरादा
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस संघर्ष को एक नया और खतरनाक मोड़ दे दिया है. उन्होंने सीधे तौर पर ईरान को चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि मंगलवार शाम तक सामरिक रूप से महत्वपूर्ण ‘होर्मुज़ स्ट्रेट’ को फिर से व्यापार और आवाजाही के लिए नहीं खोला गया, तो अमेरिका ईरान के घरेलू बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने से नहीं हिचकिचाएगा. ट्रंप ने बेहद सख्त शब्दों का इस्तेमाल करते हुए कहा कि आगामी मंगलवार ईरान के लिए ‘पावर प्लांट डे’ और ‘पुलों का दिन’ साबित होगा. उनकी इस धमकी का सीधा अर्थ है कि अब अमेरिका केवल सैन्य ठिकानों तक सीमित न रहकर ईरान की बिजली व्यवस्था और परिवहन तंत्र को पूरी तरह ध्वस्त करने की तैयारी में है.
अमेरिका को ईरान का जवाब
ट्रंप की इस आक्रामक रणनीति पर ईरान के भीतर से भी तीखी प्रतिक्रियाएं आ रही हैं. ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकर ग़ालिबफ़ ने राष्ट्रपति ट्रंप के बयानों को विनाशकारी करार दिया है. ग़ालिबफ़ ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को आगाह करते हुए कहा कि ट्रंप के ये लापरवाह और युद्धोन्मादी कदम पूरे क्षेत्र को एक जीते-जागते नरक में धकेलने का जोखिम पैदा कर रहे हैं. उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि युद्ध अपराधों और धमकियों के जरिए अमेरिका अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षाएं पूरी नहीं कर पाएगा.
युद्ध विराम की कोशिशें नाकाम !
वहीं, पर्दे के पीछे जारी कूटनीतिक कोशिशें भी नाकाम होती दिख रही हैं. ट्रंप प्रशासन का दावा है कि उन्होंने मध्यस्थों के जरिए ईरान को संघर्ष विराम का एक प्रस्ताव भेजा था, लेकिन ईरान की तरफ से जो जवाब आया है वह संतोषजनक नहीं है. दूसरी ओर, ईरानी सेना ने आधिकारिक तौर पर ट्रंप की धमकियों को एक मानसिक भ्रम करार दिया है. ईरानी सैन्य कमांडरों का मानना है कि अमेरिका इस तरह की धमकियां देकर क्षेत्र में खोई हुई अपनी प्रतिष्ठा और हालिया वर्षों में मिली ‘बेइज्जती’ की भरपाई करने की नाकाम कोशिश कर रहा है.
सोमवार को ईरान में अमेरिका इजराइल हमले में 34 लोगों की मौत
जमीनी हालात की बात करें तो सोमवार का दिन ईरान और उसके पड़ोसी क्षेत्रों के लिए रक्तपात भरा रहा. पूरे ईरान में अमेरिका और इजरायल द्वारा किए गए हमलों में अब तक कम से कम 34 लोगों की जान जा चुकी है. इसके जवाब में ईरान ने भी चुप न रहने का संकेत दिया है. ईरानी मिसाइलों और ड्रोन ने खाड़ी देशों में स्थित कई महत्वपूर्ण ठिकानों पर हमले जारी रखे हैं. गाज़ा से आ रही खबरें भी विचलित करने वाली हैं, जहाँ विस्थापित फिलिस्तीनियों को शरण देने वाले एक स्कूल के पास इजरायली हवाई हमले में 10 मासूम लोगों की मौत हो गई.
ईरान में रेल नेटवर्क हाई रिस्क जोन घोषित
इस तनाव का सबसे बड़ा असर अब ईरान के आम जनजीवन पर पड़ने लगा है. ईरान सरकार ने देश के पूरे रेल नेटवर्क को ‘हाई रिस्क ज़ोन’ घोषित कर दिया है. यह कदम ट्रंप की उस धमकी के बाद उठाया गया है जिसमें उन्होंने पुलों और बुनियादी ढांचे को उड़ाने की बात कही थी. अधिकारियों ने जनता से अपील की है कि वे सुरक्षा कारणों से फिलहाल रेल यात्राओं से परहेज करें. यह चेतावनी इस बात का पुख्ता संकेत है कि संघर्ष अब टार्गेटेड ऑपरेशंस से निकलकर व्यापक तबाही की ओर बढ़ रहा है, जहाँ बिजली, पानी और परिवहन जैसे नागरिक संसाधन अब सीधे युद्ध के निशाने पर हैं.

