Saturday, July 4, 2026
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बंगाल चुनाव से पहले सुप्रीम कोर्ट का बड़ा झटका, मतदाता सूची से बाहर हुए लाखों लोग नहीं डाल पाएंगे वोट

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Supreme Court Bangal SIR
Supreme Court Bangal SIR

Supreme Court Bangal SIR : पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के आगामी चरणों से पहले सुप्रीम कोर्ट ने मतदाता सूची विवाद पर एक अत्यंत महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है. अदालत ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची से हटाए गए लाखों लोगों को फिलहाल किसी भी प्रकार की अंतरिम राहत देने से साफ इनकार कर दिया है. मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने स्पष्ट किया कि जिनकी अपीलें अभी लंबित हैं, उन्हें वर्तमान परिस्थितियों में मतदान का अधिकार देना पूरी तरह असंभव है, क्योंकि ऐसा करने से पूरी चुनावी प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है.

Supreme Court Bangal SIR : पूरे राज्य में 34 लाख अपील लंबित 

सुनवाई के दौरान यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि राज्य में लगभग 34 लाख अपीलें अभी भी लंबित हैं. तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सांसद कल्याण बनर्जी ने अदालत में पक्ष रखते हुए कहा कि कम से कम 16 लाख लोगों ने नाम हटाए जाने के खिलाफ अपील की है. उन्होंने मानवीय आधार पर इन लोगों को अगले दो चरणों के मतदान में हिस्सा लेने की अनुमति देने का आग्रह किया था. हालांकि, पीठ ने इस दलील को खारिज करते हुए कहा कि यदि इस स्तर पर हस्तक्षेप किया गया तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं और संबंधित व्यक्तियों के मतदान अधिकारों को लेकर कानूनी जटिलताएं पैदा हो जाएंगी.

 वोट का अधिरकार केवल कानूनी प्रक्रिया नहीं बल्कि पहचान से जुड़ा है – न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची

न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची ने इस मामले पर बेहद भावुक और संवैधानिक टिप्पणी करते हुए कहा कि वोट देने का अधिकार केवल एक कानूनी प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह एक नागरिक की भावनात्मक पहचान से जुड़ा है. उन्होंने कहा कि जिस देश में किसी का जन्म हुआ हो, वहां सरकार चुनने की प्रक्रिया का हिस्सा होना लोकतंत्र की आत्मा है. कोर्ट ने कलकत्ता उच्च न्यायालय की रिपोर्ट का हवाला देते हुए माना कि इतनी बड़ी संख्या में लंबित अपीलों का निपटारा रातों-रात नहीं किया जा सकता और पूर्व न्यायाधीशों वाले न्यायाधिकरणों पर समयसीमा का दबाव डालना उचित नहीं होगा.

 ‘चुनाव आयोग पर मनमाना करने का आरोप’

यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब 13 लोगों के एक समूह ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर आरोप लगाया कि चुनाव आयोग बिना उचित प्रक्रिया का पालन किए मनमाने ढंग से नाम हटा रहा है. याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि यदि अपीलों की सुनवाई समय पर नहीं होती है, तो उनके लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन होगा. दूसरी ओर, चुनाव आयोग की ओर से पेश वकील ने बताया कि बांग्लादेश सीमा से सटे जिलों में हटाए गए लगभग 27 लाख मामलों के निपटारे के लिए 19 अपीलीय न्यायाधिकरण पहले ही काम कर रहे हैं.

बंगाल में मतदान से पहले मतदाता सूची फ्रीज

फिलहाल, भारत निर्वाचन आयोग ने पश्चिम बंगाल की मतदाता सूची को ‘फ्रीज’ कर दिया है, जिसका अर्थ है कि अब बिना किसी विशेष अदालती निर्देश के सूची में कोई नया नाम नहीं जोड़ा जा सकता. सुप्रीम कोर्ट ने याचिका को ‘समय से पहले’ करार देते हुए खारिज कर दिया और याचिकाकर्ताओं को संबंधित न्यायाधिकरणों से ही राहत मांगने की सलाह दी है. अदालत के इस रुख से यह साफ हो गया है कि इस बार के चुनाव में उन लाखों मतदाताओं की किस्मत अधर में लटकी रहेगी जिनके नाम SIR प्रक्रिया के तहत सूची से बाहर कर दिए गए हैं.