‘इंडियाज गॉट लेटेंट’ के समय रैना-रणवीर अल्लाहबादिया को बड़ी राहत,सुप्रीम कोर्ट ने सभी FIR रद्द कीं

Samay Raina-Ranveer Allahbadia Case नई दिल्ली: स्टैंड-अप कॉमेडियन समय रैना और मशहूर पॉडकास्टर रणवीर अल्लाहबादिया को ‘इंडियाज गॉट लेटेंट’ विवाद में बड़ी राहत मिली है. सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को दिव्यांग व्यक्तियों के खिलाफ कथित असंवेदनशील टिप्पणियों से जुड़े सभी एफआईआर और उनसे संबंधित कार्यवाहियों को रद्द कर दिया. यह मामला लंबे समय से अदालत में चल रहा था और सुनवाई के दौरान दोनों को कई बार कड़ी फटकार भी लग चुकी थी.

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन जजों की पीठ ने यह फैसला सुनाया. पीठ में CJI सूर्यकांत के अलावा जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस जेवी मोहना शामिल थे. अदालत ने माना कि समय रैना और अन्य आरोपियों ने कोर्ट के निर्देशों का अनुपालन किया है. इसके तहत दिव्यांगजनों के लिए जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए और फंड जुटाने की प्रक्रिया भी पूरी की गई.

Samay Raina-Ranveer Allahbadia Case : क्या था समय रैना और रणवीर अल्लाहबादिया का विवाद?

विवादित मामला समय रैना के चर्चित यूट्यूब शो ‘इंडियाज गॉट लेटेंट’ से जुड़ा है. शो में रणवीर अल्लाहबादिया और अन्य पैनलिस्टों की ओर से दिव्यांगजनों, खासकर स्पाइनल मस्कुलर एट्रॉफी (SMA) से पीड़ित लोगों को लेकर की गई टिप्पणियों पर विवाद खड़ा हुआ था.

इसके बाद अलग-अलग राज्यों में कई एफआईआर दर्ज की गईं. Cure SMA India Foundation की ओर से भी इस मामले को सुप्रीम कोर्ट के सामने उठाया गया था.

रणवीर अल्लाहबादिया ने इसके बाद सुप्रीम कोर्ट का रुख करते हुए विभिन्न राज्यों में दर्ज एफआईआर को एक साथ जोड़ने और दंडात्मक कार्रवाई से सुरक्षा की मांग की थी.

सुप्रीम कोर्ट ने अभिव्यक्ति की आजादी पर क्या कहा था?

मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कथित टिप्पणियों की कड़ी आलोचना की थी. अदालत ने स्पष्ट किया था कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का मतलब यह नहीं है कि कोई व्यक्ति सामाजिक मानदंडों का उल्लंघन करने वाली भाषा का इस्तेमाल करने के लिए स्वतंत्र है.

हालांकि, रणवीर अल्लाहबादिया को जान से मारने की धमकियां मिलने की शिकायत के बाद अदालत ने उन्हें अंतरिम सुरक्षा भी प्रदान की थी.

सुप्रीम कोर्ट ने सभी FIR रद्द कीं

शुक्रवार के आदेश के बाद समय रैना, रणवीर अल्लाहबादिया और मामले से जुड़े अन्य आरोपियों को बड़ी कानूनी राहत मिली है. अदालत ने आरोपियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर और उनसे जुड़ी अन्य कार्यवाहियों को समाप्त कर दिया.

हालांकि, ऑनलाइन कंटेंट रेगुलेशन जैसे व्यापक मुद्दों पर आगे निर्देश देने के लिए मामला अदालत के समक्ष सूचीबद्ध रहेगा.

कनाडा में दिए बयान पर समय रैना को मिली थी फटकार

मामले की सुनवाई के दौरान मार्च 2025 में समय रैना को सुप्रीम कोर्ट की नाराजगी का सामना करना पड़ा था. कनाडा में एक शो के दौरान उन्होंने इस मामले का जिक्र करते हुए दर्शकों से मजाक में कहा था कि उनके वकील की फीस भरने के लिए धन्यवाद.

इसके बाद 3 मार्च 2025 को अदालत ने उन्हें कड़ी चेतावनी दी थी. सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि अदालत को हल्के में नहीं लिया जा सकता.

इसी दौरान अदालत ने रणवीर अल्लाहबादिया को अपना पॉडकास्ट ‘द रणवीर शो’ दोबारा शुरू करने की अनुमति भी दी थी. कोर्ट ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और नैतिक जिम्मेदारी के बीच संतुलन की जरूरत पर जोर दिया था.

जुलाई 2026 में दोनों पर लगा था 3-3 लाख रुपये का जुर्माना

यह विवाद जुलाई 2026 में एक बार फिर सुर्खियों में आया था. सुप्रीम कोर्ट ने अपने निर्देशों का पालन नहीं करने पर समय रैना और रणवीर अल्लाहबादिया को कड़ी फटकार लगाई थी.

अदालत ने दोनों पर 3-3 लाख रुपये का जुर्माना लगाया था और अनुपालन हलफनामा दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया था.

उस दौरान CJI सूर्यकांत ने समय रैना के रवैये पर नाराजगी जताते हुए कहा था कि अदालत को गुमराह करने की कोशिश स्वीकार नहीं की जा सकती. कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया था कि विदेश में होने का मतलब यह नहीं है कि कोई व्यक्ति भारतीय अदालत के अधिकार क्षेत्र से बाहर हो जाता है.

रणवीर अल्लाहबादिया के अश्लील सवाल पर भी हुआ था विवाद

‘इंडियाज गॉट लेटेंट’ विवाद की शुरुआत केवल दिव्यांगजनों से जुड़ी टिप्पणियों से नहीं हुई थी. शो में रणवीर अल्लाहबादिया की ओर से माता-पिता को लेकर पूछे गए अश्लील सवालों पर भी बड़ा विवाद हुआ था.

इस मामले के बाद कई एफआईआर दर्ज की गईं और विवादित एपिसोड को हटाया गया. मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा, जहां अल्लाहबादिया को अंतरिम राहत मिली थी.

अब खत्म हुआ लंबे समय से चल रहा विवाद

‘इंडियाज गॉट लेटेंट’ से शुरू हुआ यह विवाद लंबे समय तक अदालत में चलता रहा. मामले में सुप्रीम कोर्ट ने समय रैना और अन्य से दिव्यांगजनों के लिए जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने और फंड जुटाने जैसे कदम उठाने को कहा था.

अदालत के निर्देशों के अनुपालन के बाद अब सुप्रीम कोर्ट ने संबंधित एफआईआर और कार्यवाहियों को समाप्त कर दिया है. हालांकि, ऑनलाइन कंटेंट और उसके नियमन से जुड़े व्यापक कानूनी सवालों पर अदालत की सुनवाई आगे भी जारी रह सकती है.

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