Supreme court : उन्नाव में नाबालिग के साथ दुष्कर्म का दोषी और उम्र कैद का सजायाफ्ता कुलदीप सेंगर Kuldeep Senger को सुप्रीम कोर्ट से करारा झटका लगा है. सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल दिल्ली हाई कोर्ट के द्वारा भाजपा के पूर्व एमएलए कुलदीप सेंगर की दी गई उस जमानत पर स्टे लगा दिया है, जिसमें सेंगर को जेल से बाहर जाने की इजाजत मिल गई थी. कोर्ट ने कहा कि इस अपराधी पर जितने गंभीर आरोप लगे हैं , उसे किसी भी मामले में जमानत नहीं मिलनी चाहिये .
Supreme court में सीजेआई की कोर्ट में हुई सुनवाई
कुलदीप सेंगर को जमानत दिये जाने के दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले को सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट में चैलेंज किया था. कोर्ट में हलांकि इस फैसले पर सुनवाई जारी है . सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट में कुलदीप सेंगर को जमानत दिये जाने के फैसले को रद्द करने और सजा को बरकरार रखने की अपील की है.
कुलदीप सेंगर की जमानत याचिका को रद्द करने की अपील वाली याचिका पर आज सीजेआई की कोर्ट में सुनवाई हुई. CJI जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जे.के. माहेश्वरी और जस्टिस जॉर्ज मसीह ने याचिका सुनी. सुप्रीम कोर्ट ने अपने निर्देश मे ये साफ किया कि कुलदीप सेंगर को हाईकोर्ट के आदेश के आधार पर रिहा नहीं किया जाएगा . साथ ही, कोर्ट ने सीबीआई की अपील पर कुलदीप सेंगर को नोटिस भी जारी किया है.
सरकार के वकील की दलील
सरकार के वकील सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट पीडिता के पक्ष में दलील देते हुए कहा कि जिस समय पीडिता के साथ ये दुष्कर्म हुआ , उस समय उसकी उम्र 16 वर्ष से भी कम थी. इस मामले में अभी अपील भी लंबित है.
वहीं सीबीआई के वकील ने भी अपनी दलील में कहा कि इस मामले में निचली अदालत ने अभियुक्त कुलदीप सेंगर को निर्विवाद रूप से धारा 376 के तहत नाबालिग के साथ दुष्कर्म का दोषी पाया और उसे धारा 376 के तहत आजीवन कारावास की सजा सुनाई है. सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि धारा 376(2) के तहत भी न्यूनतम सजा 20 वर्ष है और अधिकतम सजा अभियुक्त की आखिरी सांस तक का कारावास है. दुष्कर्म के समय पीड़िता की उम्र केवल 16 साल थी ,इसलिए यह मामला गंभीर सजा के अंतर्गत आएगा.
हाईकोर्ट के किस फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाया स्टे ?
सुप्रीम कोर्ट ने 23 दिसंबर को दिये गये दिल्ली हाई कोर्ट के उस फैसले पर तत्काल स्टे लगा दिया है जिसके अंतर्गत नाबालिक के साथ दुष्कर्म दोषी और उम्र के सजा याफ्ता कुलदीप सिंह सेंगर की सजा पर रोक लगाते हुए उसे जमानत पर रिहा करने के आदेश दे दिये थे. हाई कोर्ट ने एक जघन्य अपराध के सजायाफ्ता पूर्व एमएलए को 25 लाख रुपये के निजी मुचलके पर जमानत दे दिया था . दिल्ली हाई कोर्ट के इस फैसले का देश भर में विरोध हो रहा है.

